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BJP के खिलाफ ये है अरविंद केजरीवाल की चुप्पी का राज?

Anil Rai | News18Hindi
Updated: January 8, 2020, 4:45 PM IST
BJP के खिलाफ ये है अरविंद केजरीवाल की चुप्पी का राज?
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आजकल PM मोदी के खिलाफ सीधे-सीधे बोलने से बचते हैं.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) के खिलाफ अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की खामोशी का राज क्या है, इस सवाल का जवाब आपको यहां मिलेगा?

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  • Last Updated: January 8, 2020, 4:45 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद के केजरीवाल इन दिनों रहस्मय चुप्पी साधे हुए हैं. बात-बात पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करने वाले आम आदमी पार्टी सुप्रीमो और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उन मुद्दों पर भी बोलने से भी परहेज कर रहे हैं जिन मुद्दों पर बीजेपी नेता सीधे-सीधे केजरीवाल पर हमला कर रहे हैं. हालांकि बीच-बीच में केजरीवाल के सेनापति और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया मीडिया के सामने आते तो हैं लेकिन वो भी उन मुद्दों पर कम ही बोलते है जिन पर बीजेपी उन्हें घेरना चाहती है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये चुप्पी केजरीवाल के किसी मास्टर प्लान का हिस्सा है या इन मुद्दों पर केजरीवाल के पास जबाब ही नहीं है.

ये है केजरीवाल की चुप्पी का राज?
केजरीवाल को नजदीक से जानने वालों का दावा है कि केजरीवाल बिना वजह कोई काम नहीं करते. और उनकी ये चुप्पी वेवजह नहीं है. केजरीवाल की चुप्पी पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुई जो और बढ़ती गई. केजरीवाल अब प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलने से बचते नजर आते हैं और उसकी वजह भी है. जानकारों की मानें तो पूरे देश में आम आदमी पार्टी के विस्तार की रणनीति बनाने के क्रम में केजरवील प्रधानमंत्री मोदी पर हमलावर हुआ करते थे लेकिन जब एक एक कर पार्टी कई राज्यों में हारती गई साथ ही पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में भी पार्टी का जनधार खिसकता गया तो केजरवील की समझ में आ गया कि पार्टी के विस्तार से ज्यादा जरूरी है दिल्ली की सरकार बचाना. और तबसे केजरीवाल ने अपने आपको दिल्ली में फोकस कर लिया और वेवजह के मुद्दों पर बयानबाजी भी कम कर ली.

केजरीवाल की ये चुप्पी चुनावी मास्टर प्लान का हिस्सा

केजरीवाल की चुप्पी की दूसरी बड़ी वजह पार्टी की चुनाव प्रचार की राजनीति में बदलाव है. आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों का साफ कहना है कि अगर राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव हुआ तो दिल्ली में मोदी और अमित शाह की जोड़ी को पटकनी नहीं दी जा सकती. लेकिन अगर स्थानीय मुद्दों पर चुनाव हुआ तो बीजेपी को धूल चटाना मुश्किल नहीं है. इससे पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में स्थानीय मुद्दों पर कांग्रेस ने बीजेपी को हराया था. लेकिन जब इन्हीं राज्यों में राष्ट्रीय मुद्दों पर लोकसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस का खाता भी मुश्किल से खुला. लोकसभा चुनावों के बाद झारखंड में भी हेमंत सोरेन ने बीजेपी को स्थानीय मुद्दे पर ही चुनाव लड़कर बीजेपी को पटकनी दी.

पार्टी नेताओं को भी चुप रहने की हिदायत
इसके उलट बीजेपी की रणनीति केजरवील के राष्ट्रीय मुद्दे पर उलझाने की है. बीजेपी को पता है कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर केजरीवाल बीजेपी के आगे कहीं नहीं टिकते और यही वो कारण है कि बीजेपी प्रवक्ता लगातार राष्ट्रीय मुद्दों पर केजरवील पर हमला करते रहते हैं. सूत्रों की मानें तो केजरीवाल ने अपने सभी प्रवक्ताओं के साथ-साथ अपनी सोशल मीडिया टीम को भी बीजेपी के इस ट्रैप से सावधान रहने की सलाह दी है और कहा है कि दिल्ली का चुनाव शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली जैसे उन मुद्दों पर लड़ा जाना है जहां आम आदमी पार्टी की सरकार ने जमीनी स्तर पर काम किया है.

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First published: January 3, 2020, 12:09 PM IST
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