डीयू में 100 फीसदी कटऑफ, CM केजरीवाल ने की अंग्रेजों के जमाने का नियम बदलने की मांग

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना मुश्किल होता जा र‍ाहा है. डीयू के कई कॉलेजों में 100 फीसदी कटऑफ आई है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना मुश्किल होता जा र‍ाहा है. डीयू के कई कॉलेजों में 100 फीसदी कटऑफ आई है.

मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi CM Arvind Kejriwal) का कहना है, 'दिल्ली के कॉलेजों में दिल्ली के बच्चों के लिए केवल 50 फ़ीसदी ही क्षमता है. इसलिए यहां बहुत सारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोलने की जरूरत है. इसके लिए हम तैयार हैं. यूनिवर्सिटी और कॉलेज खोलने के लिए निवेश करने के लिए भी तैयार हैं लेकिन एक बहुत बड़ी कानूनी अड़चन हमारे सामने आ रही है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 11:54 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेजों में दाखिले के लिए 100 फीसदी तक कटऑफ जाने पर मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चिंता जताई है. सीएम केजरीवाल का कहना है कि अगर सौ फीसदी कटऑफ है तो बाकी बच्‍चे पढ़ाई करने के लिए कहां जाएंगे. ऐसे में जिस तेजी से छात्रों की संख्‍या बढ़ रही है उस तेजी से यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों की संख्‍या भी बढ़नी चाहिए.

अरविंद केजरीवाल ने डिजिटल कॉन्‍फ्रेंस कर कहा कि यह चिंता की बात है कि दिल्ली के अंदर कॉलेज और यूनिवर्सिटी की बहुत ज्यादा कमी हो गई है. सीट कम हैं और बच्चों की संख्या ज्यादा हो गई है. हर साल दिल्ली में लगभग ढाई लाख बच्चे 12वीं पास कर करते हैं. उनमें से लगभग सवा लाख बच्चों को दिल्ली के कॉलेजों में एडमिशन मिलता है. ऐसे में बाकी सवा लाख बच्चे कहां जाएं.





उन्‍होंने कहा, ‘दिल्ली के कॉलेजों में दिल्ली के बच्चों के लिए केवल 50 फ़ीसदी ही क्षमता है. इसलिए यहां बहुत सारे कॉलेज और यूनिवर्सिटी खोलने की जरूरत है. इसके लिए हम तैयार हैं. यूनिवर्सिटी और कॉलेज खोलने के लिए निवेश करने के लिए भी तैयार हैं लेकिन एक बहुत बड़ी कानूनी अड़चन हमारे सामने आ रही है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के 91 कॉलेज हैं, आईपी के 127 कॉलेज हैं. साथ ही दिल्ली की नौ यूनिवर्सिटी हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी एक्ट अंग्रेजों के समय बना था. जिसमें यह लिखा है कि दिल्ली में अगर कोई भी कॉलेज खुलेगा तो वह केवल दिल्ली यूनिवर्सिटी के साथ जुड़ सकता है. ऐसे में कोई भी अन्‍य यूनिवर्सिटी या कॉलेज नहीं खोला जा सकता. आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को चिट्ठी लिखकर विनती की है कि इस कानून में जो सेक्शन पांच है उसको हटाया जाए.’
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