दिल्ली में कूड़े से बनेगी बिजली और खाद, CM केजरीवाल ने की वेस्ट टू एनर्जी प्लांट की शुुरुआत

गाजीपुर मंडी से हर दिन निकलने वाले 15 टन कूड़े से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से 1500 यूनिट बिजली प्रतिदिन बनाई जाएगी
गाजीपुर मंडी से हर दिन निकलने वाले 15 टन कूड़े से वेस्ट टू एनर्जी प्लांट से 1500 यूनिट बिजली प्रतिदिन बनाई जाएगी

दिल्ली में कचरा प्रबंधन के तहत वेस्ट टू पावर प्लांट का शुरुआत हुई है. इसके तहत गाजीपुर मंडी से हर दिन निकलने वाले 15 टन कचरे से 1500 यूनिट बिजली बनाई जाएगी. साथ ही पौधों में डालने वाला खाद भी बनकर तैयार होगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 28, 2020, 4:55 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को गाजीपुर के पोल्ट्री मार्केट और सब्जी मंडी से निकलने वाले कूड़े से बिजली और खाद बनाने के प्लांट का उद्घाटन किया. गाजीपुर मंडी से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे से वेस्ट टू पावर प्लांट की मदद से बिजली बनाई जाएगी. दिल्ली में कचरा प्रबंधन के लिए आने वाले कुछ वर्षों में इस तरह के कई छोटे-छोटे प्लांट स्थापित किए जाने की जरूरत है. मौजूदा बड़े डब्ल्यूटीपी प्लांट और ऐसे सैकड़ों छोटे प्लांट्स को स्थापित करने के बाद रोजना निकलने वाले कचरे को कूड़े के पहाड़ों पर नहीं डालना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि कचरे को री-साइकिल किया जाना चाहिए, खाद में बदलने, बिजली पैदा करने या ईंट भट्टों में उपयोग होना चाहिए, इससे दिल्ली समृद्ध हो सकती है.

वहीं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस प्लांट से बनी बिजली लोगों के घरों को रोशन भी करेगी. साथ ही लोगों को कूड़े से निजात भी दिलाएगी. उन्होंने कहा कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, कूड़े से बिजली बनाने और खाद बनाने वाला प्लांट शुरू हो रहा है. इस मंडी में जितना भी प्रतिदिन के आधार पर कूड़ा पैदा होगा, उस सारे कूड़े से रोज बिजली बनाई जाएगी. दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए उसे वैसी दिखनी भी चाहिए, उस स्तर की साफ-सफाई भी होनी चाहिए, लेकिन हम देखते हैं कि चारों तरफ बहुत ज्यादा कूड़ा-कचरा रहता है. दिल्ली के अंदर कूड़े के तीन बड़े-बड़े पहाड़ बन गए है.


सिसोदिया ने कहा कि अब जो यह प्लान चालू हो रहा है, इसी तरह के ढेर सारे प्लांट पूरी दिल्ली में लगाने की जरूरत है. यह छोटा सा प्लांट है, 15 टन कूड़ा कुछ भी नहीं होता है, उससे 1500 यूनिट बिजली प्रतिदिन बनेगी, जो बहुत ज्यादा नहीं है. लेकिन ऐसे छोटे-छोटे सैकड़ों प्लांट पूरी दिल्ली के अंदर लगने की जरूरत है. एक तरफ कुछ बड़े प्लांट भी वेस्ट टू एनर्जी के प्लांट लगे हुए हैं, वो भी अच्छी बात है और दूसरी तरफ बहुत सारे छोटे-छोटे प्लांट पूरी दिल्ली के अंदर लगेंगे, तो हम फिर ऐसी स्थिति में पहुंच सकते हैं कि दिल्ली का सारा कूड़ा, चाहे वह मंडी से निकले, चाहे घरों से निकले, चाहे दुकानों से निकले या फिर फैक्ट्रियों से निकले, वह सारा कूड़ा फिर इन पहाड़ों पर नहीं जाना चाहिए.





प्लांट से बनी बिजली रोशन करेगी और कूड़े से निजात भी दिलाएगी
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने कहा दिल्ली में कूड़े से बिजली बनाने के लिए प्लांट की शुरुआत की गई है. यह जो सब्जी मंडियों का कूड़ा है, मुर्गा मंडी का कूड़ा है, इससे बिजली बनाने के प्लांट की शुरुआत हुई है. इसे बनी बिजली अब दिल्ली में घरों को भी रोशन करेगी और साथ-साथ इस प्रयास से जो कूड़ा आसपास फैलता था, उससे भी लोगों को निजात मिलेगी. करीब नौ करोड़ रुपए की लागत से इस प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2017 में की गई थी. इस नौ करोड़ रुपए में 420 लाख रुपए प्रोजेक्ट की लागत, छह साल का वार्षिक रख-रखाव के लिए करार और मंडी की साफ-सफाई के साथ कूड़े के निस्तारण पर आने वाला खर्च आदि शामिल है. इस प्लांट की क्षमता 15 टन प्रतिदिन की है. फूल मंडी से पांच टन प्रतिदिन कचरा आता है, गाजीपुर की फल एवं सब्जी मार्केट से करीब 10 टन कचरा आता है. इन दोनों आर्गैनिक कचरे को मिला कर यह प्लांट पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल किया जाएगा. इस प्लांट से प्रतिदिन 1500 यूनिट बिजली पैदा होगी.
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