लाल किले के सामने पार्किंग में गरीब बच्चों की 'क्लास' लगाते हैं पुलिसकर्मी थान सिंह

लाल किला के आसपास रहने वाले मजदूरों के जो बच्चे ऑनलाइन क्लास कर पाने में नाकाम हैं, उन बच्चों के लिए शिक्षक बन गए कॉन्स्टेबल थान सिंह.
लाल किला के आसपास रहने वाले मजदूरों के जो बच्चे ऑनलाइन क्लास कर पाने में नाकाम हैं, उन बच्चों के लिए शिक्षक बन गए कॉन्स्टेबल थान सिंह.

दिल्ली पुलिस में कॉन्सटेबल हैं थान सिंह. फिलहाल वे लाल किले के आसपास रहने वाले मजदूरों के उन बच्चों के लिए शिक्षक बन गए हैं जिनके पास ऑनलाइन क्लास करने की सुविधा नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 19, 2020, 8:16 PM IST
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नई दिल्ली. कोविड 19 (Covid 19) ने दुनिया भर की गतिविधियां रोक दी हैं. एक तरह से कहें तो जिंदगी थम सी गई है. लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर समाज के उस तबके पर पड़ा है जो वंचित है. जहां लोगों को अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी सोचना पड़ता है. शिक्षा की बात करें तो भी झुग्गियों, गांवों और पिछड़े क्षेत्रों के वे बच्चे इस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिनके पास ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने के लिए स्मार्टफोन और लैपटॉप (smartphones and laptops) नहीं है.

लाल किले के सामने लगती है थान सर की क्लास

हालांकि, बहुत से ऐसे लोग भी सामने आए जिन्होंने इन वंचित और जरूरतमंद बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने में मदद की. ऐसे ही लोगों में सिपाही थान सिंह भी एक नाम है. वे दिल्ली पुलिस में कॉन्सटेबल हैं. फिलहाल ऐसे इलाके के बच्चों के लिए थान सिंह पुलिसवाले नहीं बल्कि शिक्षक बन गए हैं. वे कोविड 19 के इस बुरे वक्त में इन बच्चों के बीच जाकर उन्हें पढ़ाने की सामाजिक जिम्मेवारी का निर्वाह कर रहे हैं. साईं मंदिर की ओर से ये कक्षाएं लाल किले (Red Fort) की पार्किंग में चलाई जा रही हैं. दरअसल, देश भर में जारी लॉकडाउन की वजह से लाल किले की यह पार्किंग भी बंद है. तब थान सिंह ने भी तय किया कि इन बच्चों को वे आमने-सामने बैठ कर पढ़ाएंगे, क्योंकि ये बच्चे ऑनलाइन कक्षाएं नहीं कर सकते थे. उनके पास स्मार्टफोन या लैपटॉप का खर्च उठाने की क्षमता नहीं है.





कोरोना गाइडलाइन का होता है पूरी तरह पालन

यहां आने वाले ज्यादातर बच्चे यहीं आसपास रहनेवाले मजदूरों के बच्चे हैं. उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए सभी कोविड 19 के सभी गाइडलाइन का यहां पालन किया जाता है. ये बच्चे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं और चूंकि इन्हें सैनेटाइजर और मास्क मुहैया कराया गया है तो उसका भी इस्तेमाल करते हैं.

बच्चों के पास ऑनलाइन क्लास की सुविधा नहीं

सिंह ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, 'मैं इस स्कूल को लंबे समय से चला रहा हूं, लेकिन महामारी के शुरुआती दौर में मैंने इसे बच्चों की सुरक्षा के लिए बंद कर दिया था. लेकिन जब मैंने देखा कि कई छात्र ऑनलाइन कक्षाएं लेने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उनके पास फोन और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं नहीं हैं, तो मैंने स्कूल को फिर से खोलने का फैसला किया'.

बंगलुरू के शांथप्पा भी हैं ऐसे ही टीचर

वैसे आपको बता दूं कि इस तरह के बेहतर काम में थान सिंह ही एकमात्र नाम नहीं हैं, इस सूची में अन्य पुलिसकर्मी भी हैं, जिन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेवारी समझी और ऐसे बच्चों की मदद की मदद में जुटे. बंगलुरू पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं शांथप्पा. वे भी वहां प्रवासी मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं. हर सुबह अपनी ड्यूटी पर जाने से पहले वे दूसरे राज्यों से आकर बंगलुरू में रह रहे मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने का सामाजिक दायित्व पूरा कर रहे हैं. जाहिर है इस काम के लिए उन्हें खूब सराहना मिली है.
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