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जज के पूर्व सहयोगी को कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा, कहा- दोषी ने जजों व सहायक कर्मियों के बीच भरोसे को तोड़ा

जज के पूर्व सहयोगी को कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा, कहा- दोषी ने जजों व सहायक कर्मियों के बीच भरोसे को तोड़ा

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने अपने अहम फैसले में दोषी शिव शंकर प्रसाद सिन्हा को जेल की सजा सुनाई. (फाइल फोटो)

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने अपने अहम फैसले में दोषी शिव शंकर प्रसाद सिन्हा को जेल की सजा सुनाई. (फाइल फोटो)

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा (Chief Metropolitan Magistrate Pankaj Sharma) ने अपने फैसले में कहा कि घटना से पहले दोषी शिव शंकर प्रसाद सिन्हा मामले में शिकायतकर्ता किरण बंसल (Judge Kiran Bansal) की अदालत में सहायक अहमद के रूप में काम कर चुका था. उस वक्‍त वह एक सिविल जज थीं.

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नई दिल्‍ली : दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत (Delhi Patiala House Court) ने जज के पूर्व कर्मचारी को रंगदारी व बच्चों को जान से मारने की धमकी देने के मामले में पांच साल कैद की सजा सुनाई है. यह मामला 2007 का है, जब सहायक अहमद के रूप में काम कर चुके एक शख्‍स पर जज के दो बच्चों को जान से मारने की धमकी देकर उनसे रंगदारी वसूलने आरोप लगा. मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा ने (CMM Pankaj Sharma) अपने अहम फैसले में दोषी शिव शंकर प्रसाद सिन्हा को जेल की सजा सुनाते हुए कहा कि इस घटना ने न्याय की धारा को प्रभावित किया और जजों व सहायक कर्मियों के बीच विश्वास की कमी पैदा की है.

मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा (Chief Metropolitan Magistrate Pankaj Sharma) ने अपने फैसले में कहा कि घटना से पहले दोषी शिव शंकर प्रसाद सिन्हा मामले में शिकायतकर्ता किरण बंसल (Judge Kiran Bansal) की अदालत में सहायक अहमद के रूप में काम कर चुका था. उस वक्‍त वह एक सिविल जज थीं.

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अदालत ने कहा कि जाहिर तौर पर शिकायतकर्ता के साथ काम करने के दौरान उसे उनके परिवार के सदस्यों और उसकी कमजोरियों के बारे में पता चला. सिन्हा ने शिकायतकर्ता से चार लाख रुपये की मांग की थी. पैसे नहीं देने पर उसने जज को बच्चों को मारने की धमकी दी थी. एक टेक्स्ट मैसेज के जर‍िये दोषी ने बंसल के पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी. घटना के बाद आरोपी को सेवा से हटा दिया गया.

अदालत ने कहा कि कार्यस्थल पर विश्‍वास एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आम तौर पर सह-कर्मी या एक अधिकारी अपने सहयोगी कर्मचारियों पर भरोसा करता है. सीएमएम पंकज शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि दोषी ने अपने बॉस की कमजोरी के बारे में जानकर भरोसे का दुरुपयोग करते हुए उन्‍हें बच्चों की मौत के डर में फंसाकर पैसे निकालने की एक भयावह योजना बनाई. इस तरह दोषी ने न केवल अपने बॉस यानी शिकायतकर्ता के भरोसे को तोड़ा, बल्कि उसने उस भरोसे को भी तोड़ दिया है जो एक अधिकारी अपने सहयोगी स्टाफ के साथ रखता है.

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सीएमएम पंकज शर्मा ने फैसले में आगे कहा कि जज के मन में डर पैदा करने से उसकी ठीक से काम करने की क्षमता प्रभावित होती है. यह न्याय व्यवस्था को सीधे तौर पर प्रभावित करता है, जोकि अक्षम्य कृत्य है. अदालत ने यह कहते हुए उसे कम सजा देने से इनकार कर दिया कि इससे व्यवस्था को और नुकसान होगा. साथ ही भविष्य में ऐसे बेईमान लोगों को इस तरह का अपराध करने के लिए प्रोत्साहित मिलेगा.

Tags: Delhi Court, Patiala House Court

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