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ट्रैक्टर परेड हिंसा मामला: दसवीं कक्षा के छात्र समेत पांच लोगों को कोर्ट ने दी जमानत

गणतंत्र दिवस पर निकाली ट्रैक्टर परेड में किसानों के वेश में आए उपद्रवियों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जमकर हिंसा की थी (फाइल फोटो)

गणतंत्र दिवस पर निकाली ट्रैक्टर परेड में किसानों के वेश में आए उपद्रवियों ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जमकर हिंसा की थी (फाइल फोटो)

कोर्ट ने कहा कि उन्हें केवल इस आशंका में हिरासत (Detain) में नहीं रखा जा सकता है कि वो फिर से ऐसा अपराध कर सकते हैं. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने नांगलोई क्षेत्र में हिंसा के मामले में रवि, आशीष, प्रवेश, दीपक सिंह और एक छात्र को 30 हजार रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के मुचलके पर जमानत (Bail) दे दी

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 3, 2021, 11:02 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर किसानों की ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) के दौरान हिंसा (Delhi Violence) से संबंधित एक मामले में दसवीं क्लास के एक छात्र समेत पांच लोगों को जमानत (Bail) दे दी. कोर्ट ने कहा कि उन्हें केवल इस आशंका में हिरासत में नहीं रखा जा सकता है कि वो फिर से ऐसा अपराध कर सकते हैं. बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने नांगलोई क्षेत्र में हिंसा के मामले में रवि, आशीष, प्रवेश, दीपक सिंह और एक छात्र को 30 हजार रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के मुचलके पर जमानत दे दी.

अदालत ने कहा कि पुलिस ने आरोप लगाया है कि आरोपी लोग उन प्रदर्शनकारियों में शामिल थे जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और आंसू गैस छोड़ने वाली पुलिस की बंदूक लूट ली. छीनी गई बंदूक को अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है.

जज ने पांच जमानत याचिकाओं पर अपने एक जैसे आदेश में कहा, ‘रिकॉर्ड से पता चलता है कि मामले में आवेदक (रवि) के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है. वो पिछले एक महीने से अधिक समय से हिरासत में है. अभियोजन पक्ष ने आवेदक के पहले किसी अपराध में शामिल होने का आरोप नहीं लगाया गया है.’ उन्होंने कहा कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, मेरा विचार है कि आरोपियों को हिरासत में रखने का कोई मतलब नहीं है. उन्हें केवल इस आशंका में हिरासत में नहीं रखा जा सकता है कि वो फिर से ऐसा ही अपराध कर सकते हैं.



आरोपियों के वकील का दावा- मामले में उन्हें झूठा फंसाया गया
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने दावा कि इस मामले में उन्हें झूठा फंसाया गया है और वो किसानों के विरोध मार्च में शांतिपूर्ण ढंग से शामिल होने आये थे. उनके वकील ने कहा कि किसी भी सीसीटीवी कैमरे में आरोपी नहीं पाये गये हैं और एफआईआर दर्ज करने में 18 घंटे की देरी हुई.

पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक बलबीर सिंह ने जमानत याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी किसान नहीं हैं और दंगे में शामिल होने के लिए उन्हें कथित तौर पर बुलवाया गया था.

बता दें कि केंद्र सरकार के नये कृषि कानूनों के विरोध को लेकर बीते 26 जनवरी को किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकाली थी. इस दौरान पुलिस के साथ प्रदर्शनकारी किसानों के बीच हिंसा और झड़प हुई थी, जिसमें 500 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गये थे और एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई थी. (भाषा से इनपुट)
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