जामिया छात्र आसिफ को न्यायिक हिरासत में भेजने के दौरान कोर्ट ने कहा- टार्गेटेड लग रही है जांच
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जामिया छात्र आसिफ को न्यायिक हिरासत में भेजने के दौरान कोर्ट ने कहा- टार्गेटेड लग रही है जांच
राज्य सरकार 15 जून से 10वीं के बोर्ड एग्जाम कराना चाह रही थी.

दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेजते हुए टिप्पणी की है कि इस मामले की जांच केवल एक तरफ टार्गेटेड लग रही है.

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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेजते हुए टिप्पणी की है कि इस मामले की जांच केवल एक तरफ टार्गेटेड लग रही है. दरअसल, तन्हा (24) को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 मई को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की धारा 13 के तहत फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. उनपर भाषण देकर कथित रूप से हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था. जहां सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी था. पुलिस ने उन्हें 27 मई को जज के समक्ष पेश किया था.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा...
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने अपने आदेश में लिखा, ''इंस्पेक्टर लोकेश ने यह सूचित किया है कि दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी और आरोपी सक्रिय रूप से इसमें शामिल थे. एक गवाह के बयान पर मेरा ध्यान आकर्षित किया गया है. जहां आरोपियों के खिलाफ विशिष्ट आरोप हैं. रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के मद्देनजर, आरोपियों को 25 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. जांच केवल एक छोर की तरफ लक्षित (टाग्रेटेड) लग रही है.''

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, 'इंस्पेक्टर लोकेश और अनिल से पूछताछ करने पर, वे यह बताने में विफल रहे हैं इस संबंध में प्रतिद्वंद्वी गुट की भागीदारी के बारे में अब तक क्या जांच की गई है. इसी के मद्देनजर संबंधित डीसीपी जांच की निगरानी करने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है.'



 



संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहा था प्रदर्शन
दरअसल, दिल्ली के अलावा देश के कई राज्यों में केंद्र सरकार के संशोधित नागरिकता कानून लागू करने के बाद लगातार प्रदर्शन जारी रहा. इस दौरान अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इस कानून का लगातार विरोध करते हुए राजधानी के कई भागों में प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान दिल्ली में हिंसा भी भड़क गई. दिल्ली के कुछ भाग इस सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गये. इस कारण ये इलाके कई दिनों तक हिंसा की आग में झुलसते रहे.

 

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