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दिल्ली विधानसभा चुनाव की जंग शुरू, जानिए किस पार्टी को किससे है खतरा?
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ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: January 6, 2020, 4:47 PM IST
दिल्ली विधानसभा चुनाव की जंग शुरू, जानिए किस पार्टी को किससे है खतरा?
2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने प्रत्याशियों के नाम पहले तय कर दिए थे.

आम आदमी पार्टी को बीजेपी से उतना खतरा नहीं है जितना कि कांग्रेस से. कांग्रेस का बढ़ना सत्तारूढ़ दल के लिए संकट पैदा करेगा. पढ़िए, दिल्ली का वोट गणित!  

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  • Last Updated: January 6, 2020, 4:47 PM IST
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नई दिल्ली. चुनाव आयोग ने दिल्ली में चुनावी जंग का ऐलान कर दिया है. पिछले विधानसभा चुनाव में यहां 71 पार्टियां मैदान में थीं. 195 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन कोई भी जमानत सुरक्षित नहीं रख पाया था. क्योंकि सारा वोट तो आम आदमी पार्टी को मिला था. पार्टी को रिकॉर्ड 54.34 फीसदी वोट मिले थे. इस बार भी चुनाव लड़ने वाली पार्टियों की बाढ़ आने वाली है लेकिन असली जंग तो आम आदमी पार्टी (AAP), बीजेपी  (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच है. चुनाव को लेकर आप और बीजेपी के बीच जोरदार सियासी जंग जारी है. हवा, पानी और सीएए को लेकर दोनों एक दूसरे पर वार कर रहे हैं. आइए समझते हैं कि 2020 के चुनाव में आखिर इनमें से कौन किसके लिए खतरा बन सकता है.

वोटबैंक शिफ्टिंग का गणित
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आप के सामने सबसे कड़े मुकाबले में बीजेपी दिखाई दे रही है. लेकिन यहां सत्तारूढ़ दल को बीजेपी से उतना खतरा नहीं है जितना कांग्रेस से. इसके लिए हमें 2015 के चुनाव परिणाम का विश्लेषण करना होगा. आम आदमी पार्टी ने जो वोट हासिल किए थे वो बीजेपी के नहीं बल्कि कांग्रेस के हुआ करते थे. कांग्रेस का ही वोट इस नई नवेली पार्टी की ओर शिफ्ट हो गया.





दिल्ली में कांग्रेस के पारंपरिक वोटरों ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) एंड टीम पर भरोसा जताया था. लेकिन 2020 में कांग्रेस पहले जितनी कमजोर नहीं दिखाई दे रही. उसने अपनी टीम में सुभाष चोपड़ा (पंजाबी) और कीर्ति आजाद (बिहारी-ब्राह्मण) को जगह देकर जातीय समीकरण से आम आदमी पार्टी को उलझाने की कोशिश शुरू कर दी है. इसलिए कांग्रेस का यह वोटबैंक अगर उसकी तरफ वापस आता है तो नुकसान आम आदमी पार्टी को होगा.


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2015 के चुनाव में आम आदमी पार्टी को 54.34 फीसदी वोट मिले



पिछले नतीजों से समझें कौन कितने पानी में?
बीजेपी ने 2013 के चुनाव में 31 सीटें जीती थीं. उसे वोट मिले थे 33.07 फीसदी. 2008 में उसकी 23 सीटें थीं, जबकि वोट 36.34% था. लेकिन 2015 में उसकी सीटें घटकर सिर्फ 3 रह गईं लेकिन वोट परसेंट 30 से कम नहीं हुआ. पार्टी को इस स्थिति में भी 32.19 फीसदी वोट मिले. आम आदमी पार्टी की आंधी चली थी. 70 में से 67 सीटें अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप ने जीती थीं. इसके बावजूद बीजेपी के सिर्फ 2 प्रत्याशियों की ही जमानत जब्त हुई थी.

बीजेपी का वोटबैंक बरकरार!
दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं कि तीन साल के ये आंकड़े बता रहे हैं कि बीजेपी का कोर वोटर किसी भी सूरत में उसके साथ खड़ा है. 2015 में केजरीवाल एंड टीम को जो वोट मिला वो बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस से शिफ्ट हुआ था. कांग्रेस को तब सिर्फ 9.65 फीसदी वोट मिले थे और उसके 62 प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे थे. क्योंकि अन्ना के नेतृत्व में जो आंदोलन हुआ था उसमें निशाने पर कांग्रेस थी.

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कांग्रेस के वोट में गिरावट
प्रो. कुमार कहते हैं कि 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थीं. उसका वोट 24.55 परसेंट था. जबकि 2008 में 43 सीटों के साथ उसके पास 40.31 फीसदी वोटों का समर्थन था. ऐसे में कहा जा सकता है कि आम आदमी पार्टी को उन्हीं लोगों का वोट मिला जो पहले कांग्रेस को वोट देते थे. 2013 और 2015 में आम आदमी पार्टी एक बड़े आंदोलन का प्रोडक्ट थी. उस वक्त कांग्रेस के खिलाफ गुस्से का उसे फायदा मिला. जबकि अब यह पार्टी एक राजनीतिक प्रोडक्ट बन गई है. वो आंदोलन वाली पार्टी का नहीं बल्कि पारंपरिक पार्टियों जैसी राजनीति कर रही है. ऐसे में उसे जनता पहले जैसी तवज्जो देगी, इसमें संशय है. हालांकि उसकी सरकार बनने में ज्यादा संदेह नहीं दिखाई देता बस सीटें घट सकती हैं.

कांग्रेस के हौसले क्यों बुलंद हैं?
प्रो. सुबोध कुमार के मुताबिक कांग्रेस की स्थिति पड़ोसी राज्य हरियाणा में अच्छी हुई है. उसने झारखंड और महाराष्ट्र में बीजेपी को सत्ता से बाहर करवा दिया है. इससे उसके हौसले बुलंद हैं. वो यहां 2015 से बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है. उसका बढ़ना आम आदमी पार्टी के लिए खतरा है. बीजेपी भी अंदरखाने यही चाहती है कि कांग्रेस बढ़े जिससे आप कमजोर हो और उसे फायदा मिले. लेकिन कांग्रेस इतना अच्छा भी प्रदर्शन करने की स्थिति में नहीं है कि आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने का खतरा पैदा हो जाए. क्योंकि केजरीवाल ने लोअर मिडिल क्लास को खुश कर रखा है. बिजली, पानी फ्री मिल रहा है. महिलाओं के लिए बस में किराया फ्री है.

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कितने प्रत्याशियों की जब्त हुई थी जमानत
चुनाव आयोग (Election commission) के आंकड़ों के मुताबिक 2015 में बीजेपी के 69 में से 2 प्रत्याशियों की जमानत नहीं बची थी. बीएसपी के 70 में से 69 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी. कांग्रेस के 62 प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे थे. एनसीपी, सीपीएम, सीपीआई और जेडीयू के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी. जब कोई प्रत्याशी किसी भी चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोट का छठा हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत राशि जब्त मानी जाती है.

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First published: January 6, 2020, 3:50 PM IST
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