किसानों के समर्थन में AAP का उपवास, सिसोदिया बोले- केंद्र अहंकार छोड़ वापस ले कृषि कानून

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में सोमवार को दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत आप के नेता-कार्यकर्ता उपवास पर हैं

मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने धरना दे रहे किसानों को नक्सली और देशद्रोही कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि देश भर में किसान इसका विरोध कर रहे हैं तो केंद्र सरकार को इसे समझना चाहिए. सरकार को चाहिए कि वो अपनी जिद, अहंकार छोड़ कर तीनों कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस ले और किसानों को भरोसा दिलाए कि हम उनकी चिंता करते हैं

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    नई दिल्ली. कृषि कानूनों (Farm Laws) का विरोध कर रहे किसान आज यानी सोमवार को उपवास (Fast) पर हैं. अन्नदाताओं के समर्थन में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं-कार्यकर्ताओं ने भी उपवास रखा है. उपवास पर बैठे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कहा, 'आज किसानों के समर्थन में पूरा देश है. देश का किसान इन तीन काले कानूनों से डरा हुआ है क्योंकि इनके लागू होने के बाद उसकी जिंदगी में भूचाल आ गया है. जब किसान सड़कों पर विरोध में है तो ये उसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा, नक्सली बोल रहे हैं.'

    बीजेपी नेताओं द्वारा किसानों को देशद्रोही और नक्सली कहे जाने पर सिसोदिया ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि देश भर में किसान इसका विरोध कर रहे हैं तो केंद्र सरकार को इसे समझना चाहिए. सरकार को चाहिए कि वो अपनी जिद, अहंकार छोड़ कर तीनों कृषि कानूनों को वापस ले और किसानों को भरोसा दिलाए कि हम उनकी चिंता करते हैं.



    'किसानों को पहले जितना पैसा मिल रहा था, अब उतना भी नहीं मिल रहा'
    सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानून देश में लागू हो गए हैं. इससे किसान बहुत दुखी है, उसको पहले जितना पैसा मिल रहा था अब उतना भी नहीं मिल रहा है. इसलिए इसके विरोध में सभी किसान आंदोलन कर रहे हैं.

    बता दें कि पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों के किसान कृषि कानूनों का कड़ा विरोध कर रहे हैं. वो पिछले उन्नीस दिन से दिल्ली के बॉर्डर पर जमे हुए हैं. किसानों ने केंद्र सरकार से इन कानूनों को तुरंत रद्द करने की मांग की है. इस समस्या और गतिरोध को सुलझाने के लिए 40 किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच छह दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन अब तक इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका है.

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