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किसान आंदोलन: दिल्ली से सटे हरियाणा के तीन जिलों में मोबाइल इंटरनेट और SMS सर्विस बंद

नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने ट्रैक्टर रैली में दिल्ली में जमकर हिंसा और उपद्रव किया.
नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों ने ट्रैक्टर रैली में दिल्ली में जमकर हिंसा और उपद्रव किया.

केंद्रीय गृह सचिव राजीव अरोड़ा (Rajeev Arora) ने मंगलवार की देर शाम यह आदेश जारी किया है. इसके तहत हरियाणा के सोनीपत, पलवल और झज्जर में इंटरनेट और SMS सर्विस बंद रहेगी. केवल वॉइस कॉल ही एक्टिवेट रहेंगी. यह बैन बुधवार शाम पांच बजे तक लागू रहेगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 30, 2021, 7:45 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के साथ लगते हरियाणा के जिलों में मोबाइल सर्विस बंद (Mobile service Ban) कर दिया गया है. केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा (Rajeev Gauba) ने मंगलवार की देर शाम यह आदेश जारी किया है. इसके तहत हरियाणा के सोनीपत, पलवल और झज्जर में इंटरनेट और SMS सर्विस बंद रहेगी. केवल वॉइस कॉल ही एक्टिवेट रहेंगी. यह बैन बुधवार शाम पांच बजे तक लागू रहेगा. बताया जा रहा है कि किसान आंदोलन और ट्रैक्टर रैली (Tractor Rally) को लेकर अफवाहों और गलत सूचना के फैलाने को रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट सर्विस बंद की गई है.

दरअसल मंगलवार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली में ट्रैक्टर रैली और परेड निकाली थी. इस दौरान लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर हिंसा और उपद्रव हुआ. स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने आवास पर अधिकारियों के साथ आपात बैठक बुलाई थी. शाम तक चली इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. माना जा रहा है कि इसके तहत ही गृह सचिव राजीव अरोड़ा ने यह आदेश जारी किए हैं.

किसानों के आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली से लगे हरियाणा के सीमावर्ती तीन जिलों में मोबाइल इंटरनेट और एसएमएस सर्विस बुधवार शाम पांच बंद तक बंद रहेगा





दिल्ली की सीमा पर 26 नवंबर से किसान दे रहे हैं धरना
बता दें कि किसान केंद्र द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ हैं. वो इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. बीते 26 नवंबर से पंजाब-हरियाणा समेत कई अन्य राज्यों के किसान दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं. तमाम मुश्किलों और दुश्वारियों के बावजूद वो यहां जमे हुए हैं. केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच ग्यारह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक इस मुद्दे का हल नहीं निकल सका है. किसान तीनों कानूनों को वापस लेने की लगातार मांग कर रहे हैं. वो इससे कम पर राजी नहीं हैं.
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