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Delhi Fire: सवालों के घेरे में दिल्ली की इंडस्ट्रियल सेफ्टी पॉलिसी, 43 मौतों का जिम्मेदार कौन?

औद्योगिक सुरक्षा ताक पर रखकर किया जा रहा था काम: विशेषज्ञ

औद्योगिक सुरक्षा ताक पर रखकर किया जा रहा था काम: विशेषज्ञ

Delhi Fire: फैक्ट्री एक्ट का सरेआम हो रहा था उल्लंघन, क्या कर रहे थे दिल्ली में औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी.

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नई दिल्ली. अनाज मंडी अग्निकांड (Delhi Anaj Mandi Fire) में 43 लोग असमय काल के गाल में समा गए. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लापरवाही है. फैक्ट्री मालिक की लापरवाही, श्रम विभाग की लापरवाही और सरकार की लापरवाही. उपहार के बाद दिल्ली में यह सबसे बड़ा अग्निकांड बताया जा रहा है. इस अग्निकांड से सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में हैं दिल्ली (Delhi) श्रम विभाग के अधिकारी, जिनके पास इंडस्ट्रियल सेफ्टी का जिम्मा है. इस कारखाने में फैक्ट्री एक्ट का जमकर उल्लंघन हुआ है. बताया जाता है कि 600 वर्गफुट में करीब सवा सौ से अधिक लोग काम कर रहे थे.

कार्यस्थल पर मजदूरों को नहीं सुलाना गैरकानूनी
इंडस्ट्रियल सेफ्टी विशेषज्ञ आरपी गुप्ता कहते हैं कि इस फैक्ट्री में अगर फैक्ट्री एक्ट का पालन हो रहा होता तो इतने लोगों की जान नहीं जाती. छोटे से एरिया में इतने लोगों का काम करना बड़ा सवाल खड़ा करता है. बताया जाता है कि यहां काम करने के बाद सभी मजदूर यहीं पर सो जाते थे, जबकि कोई भी फैक्ट्री मालिक कार्यस्थल पर अपने मजदूरों को नहीं सुला सकता. इमारत से बाहर निकलने के लिए एक ही रास्ता है, जबकि इसके लिए एक वैकल्पिक रास्ता भी होना चाहिए. दिल्ली सरकार को इसकी जांच में फैक्ट्री एक्ट के इन पहलुओं पर जांच जरूर करना चाहिए.

फैक्ट्री में लगी इस आग में 43 लोगों की मौत हो चुकी है. फोटो. एपी


फैक्ट्री मालिक से पूछे जाने चाहिए ये सवाल

>>फैक्ट्री मालिक ने वर्करों का बीमा कराया था कि नहीं.

>>यह कारखाना फैक्ट्री एक्ट के तहत रजिस्टर्ड था या नहीं.

>>इसका वर्किंग एरिया कितना है. प्रति वर्कर वर्किंग एरिया 14.2 क्यूबिक मीटर होना चाहिए.

>>बैग का रॉ मैटीरियल ज्वलनशील होता है, इसलिए इस एरिया में स्कूल बैग बनाने की फैक्ट्री चलाने की अनुमति एक्सप्लोसिव डिपार्टमेंट ने दी थी कि नहीं.

>>फैक्ट्री की फायर एनओसी थी या नहीं.

>>फैक्ट्री से बाहर निकलने का वैकल्पिक रास्ता था या नहीं.

सुप्रीम कोर्ट और NGT दे चुके हैं रिहायशी एरिया से फैक्ट्रियों को हटाने का आदेश
टाउन प्लानर रहे एससी कुश का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने रिहायशी एरिया से फैक्ट्रियों को हटाने का आदेश दिया हुआ है लेकिन पूरे दिल्ली-एनसीआर में अवैध रूप से इनका संचालन किया जा रहा है. भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पांच-पांच मंजिल की फैक्ट्री चलाना अवैध है, लेकिन कुछ लोगों की मिलीभगत से सब कुछ हो रहा है.

मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं. सीएम ने मृतकों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है.

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