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Nirbhaya Case: तत्कालीन पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने कहा- पहली बार वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर दिया जोर
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Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: January 8, 2020, 7:47 PM IST
Nirbhaya Case: तत्कालीन पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार ने कहा- पहली बार वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर दिया जोर
मैंने इससे खतरनाक रेप केसेज अपने पूरे करियर में कभी नहीं देखा था. (फाइल फोटो)

निर्भया केस (Nirbhaya Case) के समय दिल्ली के पुलिस कमिश्नर रहे नीरज कुमार (Neeraj Kumar) कहते हैं, 'उस समय दिल्ली की तत्कालीन सीएम (CM) शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) नहीं चाहती थीं कि मैं पुलिस कमिश्नर के पद पर रहूं. मुझ पर डीसीपी (DCP) छाया शर्मा (Chhaya Sharma) और ज्वाइंट सीपी (Joint CP) विवेक गोगिया (Vivek Gogia) को हटाने का भी राजनीतिक प्रेशर था.

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  • Last Updated: January 8, 2020, 7:47 PM IST
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नई दिल्ली. निर्भया केस (Nirbhaya Case) के दौरान दिल्ली के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर (Commissioner of Police) नीरज कुमार (Neeraj Kumar) ने न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में केस से जुड़े कई खुलासे किए हैं. नीरज कुमार के मुताबिक निर्भया गैंगरेप केस के समय उन पर कितना राजनीतिक प्रेशर था उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है. नीरज कुमार ने अपनी किताब 'खाकी फाइल्स' के एक चैप्टर 'नाइट ऑफ शेम' में भी इस घटना को लेकर की कई बातें कहीं है. नीरज कुमार के मुताबिक, 'तत्कालीन सीएम (CM) शीला दीक्षित (Sheila Dikshit) नहीं चाहती थीं कि मैं पुलिस कमिश्नर के पद पर रहूं. मुझ पर डीसीपी छाया शर्मा (Chhaya Sharma) और ज्वाइंट सीपी विवेक गोगिया (Vivek Gogia) को हटाने का भी राजनीतिक प्रेशर था. मुझसे कहा गया था कि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो खुद पद से हट जाइए.'

शीला दीक्षित नहीं चाहती थीं कि मैं CP के पद पर रहूं : नीरज कुमार
नीरज कुमार कहते हैं, 'आज हम लोगों को बहुत खुशी है कि निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है. हमने उस समय जो सबूत इकठ्ठे किए थे उसको सब जगह माना गया. हम लोगों ने इस घटना के बाद तय किया था कि छोटे से छोटे साक्ष्य भी एकत्र करेंगे, जो आगे चलकर दुष्कर्म के केस के लिए एक मिसाल बने. मैंने इससे खतरनाक रेप केस अपने पूरे करियर में कभी नहीं देखा था.'

उन्होंने कहा कि मैंने उस समय ज्वाइंट सीपी विवेक गोगिया, डीसीपी छाया शर्मा सहित कई अधिकारियों के साथ घंटों बैठक कीं. यह एक तरह से ब्लाइंड केस था, जिसमें आरोपी का कोई सुराग नहीं था. मुझे उस समय सीपी आवास पर कंट्रोल रूम के जरिए इस घटना की जानकारी मिली. हमने दक्षिणी जिले की डीसीपी छाया शर्मा से बात की. उस रात साउथ डिस्ट्रिक्ट पुलिस के सभी वरिष्ठ अधिकारी जहां भी रहे हों वे तुरंत हीं बुलाए गए.'



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ज्वाइंट सीपी विवेक गोगिया, डीसीपी छाया शर्मा सहित कई अधिकारियों के साथ घंटों बैठक की (फाइल फोटो)




बस पर 'यादव' लिखा होने से सुराग मिले
नीरज कुमार कहते हैं, 'लड़की के दोस्त ने जो ब्योरा दिया था, वह काफी नहीं था. लड़की के दोस्त ने कहा था कि जिस सफेद बस में इस घटना को अंजाम दिया गया था उसमें यादव लिखा हुआ था. हमने उस रूट्स की सारी सीसीटीवी फुटेज को जब खंगाला तो यादव लिखी बस नजर आई. इस बस को हम लोगों ने आरके पुरम से खोज निकाल. बस का सुराग जैसे ही मिला हम लोगों ने बस के ड्राइवर राम सिंह को पकड़ लिया. सुबह से लेकर शाम तक हमने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था. ड्राइवर को जब हमने कई तरह के सबूत दिखाए तो उसने बाकी बचे पांच आरोपियों के बारे में भी बता दिया. अगले 72 घंटे में हमने सभी आरोपियों को पकड़ लिया.'

ज्वाइंट सीपी और डीसीपी का हटाने का था दबाव
कुमार कहते हैं, 'जिले की तत्कालीन डीसीपी और उनकी पूरी टीम सभी आरोपी पकड़े जाने तक अपने घर नहीं गई. हमारी पूरी टीम उस रात सोई नहीं थी. हम लोगों ने ड्राइवर से कड़ाई से पूछताछ की और उसका ऐसे सबूतों से सामना कराया गया, जिनको उसे स्वीकार करना पड़ा कि इस कुकर्म में वे लोग शामिल थे. एक अभियुक्त को गिरफ्तार करने के लिए हमारी टीम बिहार के नक्सल एरिया पहुंची थी और रात को ही हम लोगों ने उसे दबोचा था. इस घटना के सारे फॉरेसिंक साक्ष्य जुटाए गए. इस घटना के बाद देश में खासकर दिल्ली में तो आम पब्लिक और मीडिया मेरे इस्तीफे की मांग कर रहा था. कुछ राजनीतिक दल भी मेरे इस्तीफे को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे थे. इसके बावजूद हमने इस केस को पूरी गंभीरता से लिया और पांच दिनों के अंदर सभी अभियुक्तों को गिरप्तार कर लिया.'

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नीरज कुमार कहते हैं, 'हमारी पूरी टीम उस रात सोई नहीं थी.'


पहली बार विदेश से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर गवाही
नीरज कुमार कहते हैं, 'निर्भया कांड पहला ऐसा केस था, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये विदेश से गवाह के बयान दर्ज हुए. निर्भया की मौत सिंगापुर के अस्पताल में हुई थी. इसलिए उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए लिए गए. सफदरजंग अस्पताल में भर्ती लड़की के जख्म बयां कर रहे थे कि जालिमों ने उसके साथ किस तरह से हैवानियत की थी. छाया शर्मा जब निर्भया से मिलीं तो वहां उसने साफ कहा कि मेरे साथ जिसने यह काम किया है उसको सजा मिले वह बख्शे न जाएं.'

18 दिन के अंदर चार्जशीट तैयार कर दी
नीरज कुमार कहते हैं, 'तीन-चार दिनों में सभी आरोपी पकड़े जा चुके थे, लेकिन देश में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. हमारे सामने दो तरह की परेशानी थी, एक इस केस में गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य तैयार करना और दूसरा दिल्ली में लगातार हो रहे उग्र प्रदर्शन से कैसे निपटें और इसके लिए किस तरह की रणनीति बनाई जाए? बहरहाल जो भी हुआ लेकिन, दिल्ली पुलिस दिन-रात काम में लगी और 18 दिन में हमने चार्जशीट दाखिल कर दी. हमारे ऑफिसर्स ने एक मजबूत चार्जशीट तैयार की और सभी आरोपी दोषी भी साबित हुए. यह मेरी जिंदगी का सबसे मुश्किल केस था.'

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मुझे सोनिया गांधी ने साफ कह दिया था कि आप बिना प्रेशर काम करें और एक मजबूत चार्जशीट तैयार करें.


सोनिया गांधी ने सपोर्ट किया
नीरज कुमार बताते हैं कि राजनीतिक प्रेशर लगातार झेलने पड़ रहे थे. इंडिया गेट पर रात में प्रदर्शन होते तो उस समय की यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी खुद प्रदर्शनकारियों से घर पर मिलतीं और संयम बरतने का आग्रह करती थीं. मुझसे सोनिया गांधी ने साफ कह दिया था कि आप बिना प्रेशर काम करें और एक मजबूत चार्जशीट तैयार करें. हालांकि उस समय की तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित जो अब इस दुनिया में नहीं हैं वह नहीं चाहती थीं कि मैं सीपी के पद पर रहूं.'

देश में पहली बार दांतों की जांच से सबूत लिए गए
नीरज कुमार कहते हैं, 'देश में पहली बार इस केस से जुड़े सभी आरोपियों के दांतों की जांच की गई. हमने पहली फॉरेंसिक डेंटिस्ट्री तकनीक का इस्तेमाल किया. हम लोगों ने वैज्ञानिक ढंग से सबूत जुटाए. मैं आपको बताना चाहता हूं हमने इस केस में फॉरेंसिक, मैटीरियल, फिजिकल, डीएनए और तकनीकी सबूत का भी इस्तेमाल किया. मोबाइल, बस, डीएनए, दांतों और जबड़ें की नाप के साथ बॉडी टू बॉडी डीएनए जांच करवाए. मेरी मौजूदगी में चार्जशीट तैयार की गई. हमने इस केस में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर दिया था. बाद में इन्हीं वैज्ञानिक साक्ष्यों ने निर्भया के दोषियों को फांसी के अंजाम तक पहुंचाया. यह वैज्ञानिक साक्ष्य भारत में पहली बार किसी अपराध के लिए आरोपियों को सजा दिलाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

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First published: January 8, 2020, 5:28 PM IST
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