दिल्ली सरकार के 20 कॉलेजों में नहीं हैं स्थाई प्रिंसिपल, लंबे समय से पड़े हैं ये खाली! जानिए क्या है इसकी वजह?

दिल्ली सरकार के 20 से अधिक कॉलेजों में प्रिंसिपल के पद खाली पड़े है.

दिल्ली सरकार के 20 से अधिक कॉलेजों में प्रिंसिपल के पद खाली पड़े है.

दिल्ली सरकार के 20 से अधिक कॉलेजों में प्रिंसिपल के पद खाली पड़े है. इसके अलावा लगभग 2000 सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति की जानी है. इन पदों पर नियुक्ति किए जाने को लेकर 2018-2019 में विज्ञापन निकाले गए थे. लेकिन इसकी समय सीमा नवम्बर-दिसम्बर 2020 में समाप्त हो चुकी है. वहीं, अब इन पदों को भरने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को या तो फिर से विज्ञापन निकालने के लिए कॉलेजों को सर्कुलर जारी करना पड़ेगा या शुद्धिपत्र ( कोरिजेंडम ) देना होगा.

  • Share this:


नई दिल्ली. दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi University) से सम्बद्ध दिल्ली सरकार के 20 से अधिक कॉलेजों में प्रिंसिपल के पद खाली पड़े है. इसके अलावा लगभग 2000 सहायक प्रोफेसर के पदों पर स्थायी नियुक्ति की जानी है. इन पदों पर नियुक्ति किए जाने को लेकर 2018-2019 में विज्ञापन निकाले गए थे. लेकिन इसकी समय सीमा नवम्बर-दिसम्बर 2020 में समाप्त हो चुकी है.

वहीं, अब इन पदों को भरने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को या तो फिर से विज्ञापन निकालने के लिए कॉलेजों को सर्कुलर जारी करना पड़ेगा या शुद्धिपत्र ( कोरिजेंडम ) देना होगा.

दिल्ली सरकार के कॉलेजों में खाली पड़े प्रिंसिपल व सहायक प्रोफेसर के पदों को भरने के लिए आम आदमी पार्टी (Aam Adami Party) के शिक्षक संगठन ने दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) से मांग की है और कहा है कि इन कॉलेजों में पहले प्रिंसिपलों की स्थायी नियुक्ति करें.
दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (Delhi Teachers Association) के प्रभारी व (अकेडेमिक काउंसिल Academic Council) के पूर्व सदस्य डॉ. हंसराज 'सुमन 'ने बताया है कि दिल्ली सरकार (Delhi Government) के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में लंबे समय से प्रिंसिपल पदों को नहीं भरा गया है.

कुछ कॉलेजों में 5 साल और उससे अधिक समय से कार्यवाहक/ओएसडी के रूप में कार्य करते हुए हो गए हैं जबकि यूजीसी रेगुलेशन के अंतर्गत स्थायी प्रिंसिपल का कार्यकाल 5 साल का होता है. मगर ये प्रिंसिपल उससे ज्यादा समय तक अपने पदों पर बने हुए हैं. लेकिन उनकी स्थायी नियुक्ति आज तक नहीं की गई.

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन बार-बार इन्हें एक्सटेंशन दे रहा है जबकि अधिकांश कॉलेजों ने अपने यहां प्रिंसिपल पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाले थे. लेकिन दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी नहीं थीं मगर अब तो इन कॉलेजों में सरकार की गवर्निंग बॉडी को भी एक्सटेंशन मिला हुआ है ऐसी स्थिति में फिर से विज्ञापन देकर इन पदों का रोस्टर बनाकर भरा जा सकता है.



उन्होंने मांग की है कि विज्ञापन निकालने से पहले इन पदों का रोस्टर रजिस्टर तैयार कराया जाए. रोस्टर रजिस्टर तैयार होने पर जो पद एससी/एसटी, ओबीसी व दिव्यांगों के बनते हैं, उसी के आधार पर इन पदों का विज्ञापन निकाला जाए. इसके बाद प्रिंसिपल पदों पर स्थायी नियुक्ति की जा सकती है.

डॉ. सुमन ने बताया है कि प्रिंसिपलों के पदों पर स्थायी नियुक्ति न होने से इन कॉलेजों में सहायक प्रोफ़ेसर की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है जबकि गैर शैक्षिक पदों पर नियुक्ति व पदोन्नति की जा रही है. लंबे समय से प्रिंसिपल पदों पर नियुक्तियां ना होने से 20 से अधिक कॉलेजों के प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं. ये सभी कॉलेज दिल्ली सरकार के है जहां अधिकांश कॉलेजों में गवर्निंग बॉडी सरकार की है.

दिल्ली सरकार के इन कॉलेजों में नहीं है प्रिंसिपल

श्री अरबिंदो कॉलेज, श्री अरबिंदो कॉलेज(सांध्य) मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज(सांध्य) सत्यवती कॉलेज, सत्यवती कॉलेज (सांध्य ), शहीद भगतसिंह कॉलेज, शहीद भगतसिंह कॉलेज(सांध्य) श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, विवेकानंद कॉलेज, भारती कॉलेज, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉलेज, महाराजा अग्रसेन कॉलेज, राजधानी कॉलेज, शिवाजी कॉलेज, दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज, आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, भगिनी निवेदिता कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, (कोर्ट में विचाराधीन है) गार्गी कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज, मैत्रीय कॉलेज आदि शामिल हैं.

कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी को मिला जून तक का एक्सटेंशन

डॉ. सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल 14 मार्च को समाप्त हो चुका था. उसके बाद दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों को जून तक एक्सटेंशन दे दिया गया है.

उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मांग की है कि वे प्रिंसिपल पदों को भरने के लिए जल्द से जल्द कॉलेजों के रोस्टर रजिस्टर तैयार कराकर उसे लायजन ऑफिसर से पास कराकर विज्ञापन निकाले और स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कराए.


अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज