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COVID-19: केजरीवाल का दावा, कोरोना से निपटने में सक्षम है दिल्‍ली, लोग बोले- फेल है सरकार

सपा सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं ललई यादव. (प्रतीकात्मक फोटो)
सपा सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं ललई यादव. (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्‍ली सरकार (Delhi Government)अस्पतालों में जरूरत से अधिक बिस्तर होने का दावा कर रही है, लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया माध्यमों से सामने आती कोविड-19(COVID-19)की कहानियों में राष्ट्रीय राजधानी के उन निवासियों का दर्द और आक्रोश दिखाई दे रहा है जिन्हें अपने बीमार परिजनों के इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 11, 2020, 10:05 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में कोविड-19 (COVID-19) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इस बीच अस्पतालों में भर्ती होने और जांच कराने तक के लिए मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, जिसके चलते राजधानी के निवासी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. सरकार जहां एक तरफ आसानी से उपचार मिलने और अस्पतालों में बिस्तरों की पर्याप्त संख्या होने का दावा कर रही है, वहीं आंखों देखा हाल बता रहे मरीज कुछ और ही हालात बयान कर रहे हैं. दिल्‍ली के निवासियों का कहना है कि संक्रमण होने के खतरे और कोविड-19 की जटिल जांच प्रक्रिया से गुजरने के डर में कोई अंतर नहीं रह गया है.

सरकार ने कही थी ये बात
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बुधवार को कहा था कि शहर में डेढ़ लाख बिस्तरों की जरूरत पड़ेगी. वहीं, इससे एक दिन पहले उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा था कि जुलाई के अंत तक कोरोना वायरस मामलों की संख्या बढ़कर साढ़े पांच लाख हो जाएगी जो कि आज यानी गुरुवार तक सामने आए 32,810 मामलों से कई गुना ज्यादा है.

सरकार कर रही है ये दावा
हालांकि सरकार अस्पतालों में जरूरत से अधिक बिस्तर होने का दावा कर रही है लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया माध्यमों से सामने आती कोविड-19 की कहानियों में राष्ट्रीय राजधानी के उन निवासियों का दर्द और आक्रोश दिखाई दे रहा है जिन्हें अपने बीमार परिजनों के इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जबकि सामाजिक कार्यकर्ता अमरप्रीत कौर ने ट्विटर के जरिये अपने बीमार पिता के लिए सहायता मांगी थी लेकिन समय पर इलाज न मिलने से उनकी मौत होने के बाद अमरप्रीत ने ट्वीट किया, 'वह नहीं रहे. सरकार विफल हुई.'



कौर के पिता की जांच में एक जून को कोविड-19 की पुष्टि हुई थी, लेकिन उन्हें घर पर पृथक-वास में रहने को कहा गया था. तबीयत बिगड़ने पर कौर के पिता को एलएनजेपी अस्पताल ले जाया गया लेकिन परिजनों के मुताबिक मरीज को भर्ती नहीं किया गया और गंगा राम अस्पताल ले जाने को कहा गया.
कौर ने ट्वीट किया, 'मेरे पिता को तेज बुखार है. हमें उन्हें अस्पताल ले जाना होगा. मैं एलएनजेपी दिल्ली के बाहर खड़ी हूं और वे उन्हें भीतर नहीं जाने दे रहे हैं. उन्हें कोरोना, तेज बुखार और सांस की बीमारी है. मदद के बिना वे नहीं बचेंगे.कृपया मदद करें.' हालांकि एक घंटे बाद अस्पताल के बाहर कौर के पिता की मौत हो गई. जबकि एलएनजेपी अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों का खंडन किया.

मामले की जांच चाहती हैं कौर
कौर की कहानी यहीं समाप्त नहीं हुई, बल्कि वह अपने परिवार की भी कोरोना वायरस जांच कराना चाहती थीं जिसके लिए उन्होंने फिर ट्विटर का सहारा लिया.

अमन पाठक की ये है कहानी
अमन पाठक इस मामले में सौभाग्यशाली रहे. उन्हें भी अपने बीमार पिता को भर्ती कराने के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़े और अंततः उन्हें एलएनजेपी अस्पताल में सफलता मिली. पाठक के पिता अभी अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में हैं. उन्‍होंने बताया कि उनके 51 वर्षीय पिता को 24 मई को तेज बुखार आया जो कुछ दिनों के बाद उतर गया.

पाठक के मुताबिक, मेरे पिता की भूख समाप्त हो गई थी. हल्के लक्षणों को देखते हुए हमने सोचा कि घर पर ही उनका ध्यान रखा जाएगा, लेकिन तीन जून से उन्हें सांस की तकलीफ भी शुरू हो गई. मैं उन्हें निजी और सरकारी समेत कई अस्पतालों में लेकर गया लेकिन ज्यादातर अस्पतालों ने भर्ती नहीं किया.
साथ ही उन्होंने कहा कि चार जून को वे अपने पिता की जांच करवाने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अंबेडकर अस्पताल लेकर गए जहां अगले दिन हुई जांच में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई. इसके बाद पाठक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल चक्कर लगाते रहे लेकिन कहीं बिस्तर खाली नहीं मिला.

पाठक ने सरकार पर लगाया ये आरोप
पाठक के मुताबिक दिल्ली सरकार के ऐप पर वास्तविकता के विपरीत कुछ और ही जानकारी दिखती थी. उन्होंने कहा, 'मेरे पिता चल भी नहीं पा रहे थे. मैं उन्हें उसी स्थिति में अस्पताल ले जा रहा था लेकिन कोई अस्पताल भर्ती करने को राजी नहीं था.'

आखिरकार छह जून को पाठक के पिता को अंबेडकर अस्पताल में जगह मिली और वहां से उन्हें एलएनजेपी ले जाया गया.

एक सप्ताह में व्यक्ति पांच अस्पताल गया,लेकिन...
यही नहीं, दिल्ली के एक अन्य निवासी के पिता को बुखार आने के पांच दिन बाद 29 मई को उस व्यक्ति में भी कोरोना वायरस के लक्षण दिखने लगे. अस्पताल और इलाज के बिना नौ दिन बाद उस व्यक्ति की भोपाल में मौत हो गई. पहले वह व्यक्ति एक स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में गया जहां उसे पैरासीटामोल देकर घर भेज दिया गया. व्यक्ति जांच कराने के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल भी गया. अगले एक सप्ताह में व्यक्ति पांच अस्पताल गया,लेकिन उसे कहीं जगह नहीं मिली. कोई विकल्प न देखते हुए वह भोपाल अपने बेटे के पास चला गया. तेज बुखार होने के बावजूद वह व्यक्ति ट्रेन से भोपाल चला गया और किसी को पता भी नहीं चला. जबकि सात जून को व्यक्ति की मौत हो गई. दिल्ली में उसकी 15 साल की बेटी में भी कोविड-19 की पुष्टि हुई और इस सदमे से उक्त व्यक्ति की पत्नी को दमे का दौरा आ गया.

मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने कही ये बात
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा, 'जब इन स्वास्थ्य केंद्रों की परीक्षा की घड़ी आई तब दिल्ली में पांच दिन तक एक व्यक्ति भटकता रहा और उसे उपचार नहीं मिला और उसकी मौत हो गई.'

बहरहाल, दिल्ली के निवासियों की ऐसी अनेक कहानियां हैं. बहुत से लोगों की शिकायत है कि दिल्ली सरकार के ऐप पर दिखने वाले अस्पताल, वेंटिलेटर और बिस्तरों की जानकारी असलियत के एकदम विपरीत है. लोगों का कहना है कि कई बार हेल्पलाइन पर कॉल करने पर भी जवाब नहीं मिलता.
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