चाइल्ड केयर मामले में मॉडल राज्य बनने की तैयारी में जुटी दिल्ली सरकार, बच्चों से मांगे सुझाव

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए मंत्री राजेंद्र पाल गौतम

डिजिटल बाल संवाद को संबोधित करते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मैं बच्चों से अपील करता हूं कि वे बाल देखभाल संस्थानों में सुधार के बारे में अपने सुझावों आगे आकर हमें बताएं. हम पूरे देश के लिए बाल देखभाल संस्थानों के संदर्भ में दिल्ली को एक मॉडल राज्य बनाएंगे.

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    नई दिल्ली. दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने बच्चों से अपील की है कि वे बाल देखभाल संस्थानों में सुधार के बारे में अपने सुझाव बताएं. हम पूरे देश के लिए चाइल्ड केयर संस्थानों के मामले में दिल्ली को एक आदर्श राज्य बनाएंगे. राष्ट्रीय बालिका दिवस पर दिल्ली सरकार ने हस्ताक्षर अभियान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया.


    महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने डीडब्ल्यूसीडी मुख्यालय से डिजिटल बाल संवाद करते हुए बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले बच्चों को संबोधित किया. कार्यक्रम में बच्चों ने कविताएं सुनायीं, गीत गाए और मंत्री से संवाद किया. इस अवसर पर मंत्री गौतम ने डीडब्ल्यूसीडी के प्रोजेक्ट श्रीजन का उद्घाटन भी किया.


    राष्ट्रीय बालिका दिवस के दौरान चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस के बच्चों ने पोस्टर तैयार किए. बच्चों के रचनात्मक कार्यों की प्रदर्शनी डीडब्ल्यूसीडी मुख्यालय में लगाई गई थी. डब्ल्यूसीडी निदेशक डॉ. रश्मि सिंह ने डीडब्ल्यूसीडी के अध्यक्ष अनुराग कुंडू सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे.


    डिजिटल बाल संवाद को संबोधित करते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मैं बच्चों से अपील करता हूं कि वे बाल देखभाल संस्थानों में सुधार के बारे में अपने सुझावों आगे आकर हमें बताएं. हम पूरे देश के लिए बाल देखभाल संस्थानों के संदर्भ में दिल्ली को एक मॉडल राज्य बनाएंगे.


    इस दौरान राजेंद्र पाल गौतम ने बाल देखभाल संस्थानों में सुधार को लेकर बच्चों से आगे आकर सुझाव बताने की अपील की. साथ ही प्रोजेक्ट श्रीजन के रूप में रचनात्मक मंच की कल्पना करने के लिए डीडब्ल्यूसीडी निदेशालय की भूमिका की सराहना की. पूरे देश के लिए बाल देखभाल संस्थानों के संदर्भ में दिल्ली को एक मॉडल राज्य बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई.


    कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं की स्थिति को बेहतर बनाना है. इसके अलावा बच्चों के बीच असमानता मिटाने के लिए सरकार के बाल देखभाल संस्थानों को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटियों को सशक्त बनाओं’ के आधार पर चलाना है.

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