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शराब लाइसेंस की नीलामी में दिल्‍ली सरकार की बल्‍ले-बल्‍ले, एयरपोर्ट जोन में हुई पैसों की तगड़ी बारिश

दिल्ली सरकार को खुदरा शराब लाइसेंस से 8911 करोड़ मिले हैं.

दिल्ली सरकार को खुदरा शराब लाइसेंस से 8911 करोड़ मिले हैं.

Delhi Liquor Shop License: दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति (New Excise Policy) के तहत सभी 32 जोन में खुलने वाली शराब की दुकानों के लिए नीलामी का काम पूरा हो गया है. इससे सरकार को करीब 9 हजार करोड़ का राजस्‍व मिला है. इस दौरान उसे एयरपोर्ट जोन में सबसे अधिक कमाई हुई है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति (New Excise Policy) के तहत नये निर्धारित 32 जोन में खुदरा दुकानों के शराब लाइसेंस (Liquor Shop License) की नीलामी से व्यापक राजस्व जुटाया है. यही नहीं, इस दौरान सरकार को कुछ जोन में रिजर्व प्राइस की तुलना में 50 प्रतिशत या उससे अधिक राजस्व हासिल हुआ है, तो कहीं उम्‍मीद से कम मिला है. दिल्‍ली सरकार ने करीब 9 हजार करोड़ रुपयेहासिल लिए हैं. हालांकि इससे पहले दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने 10 हजार करोड़ मिलने का अनुमान जताया था.

    टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने लाइसेंस फीस के तौर पर 8,911 करोड़ रुपये अर्जित किये हैं, जो कि 7,039 की रिजर्व प्राइस की तुलना में 27 फीसदी अधिक है. कुछ जोन में इसे औसत से अधिक कमाई हुई है, लेकिन कुछ जोन ऐसे भी हैं, जहां अपेक्षित कमाई नहीं हुई.

    इस जोन में दिल्‍ली सरकार की हो गई बल्‍ले-बल्‍ले
    दिल्‍ली सरकार को एयरपोर्ट जोन अर्थात जोन संख्या 32 में बहुत अच्छी कमाई हुई है, जहां 10 शराब की दुकानों के लिए 105 करोड़ रुपये की वार्षिक रिजर्व प्राइस की तुलना में 236 करोड़ रुपये सरकार को प्राप्त हुए हैं. दिल्ली सरकार के सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक पसंदीदा एयरपोर्ट जोन का लाइसेंस पुड्डुचेरी की एक कंपनी को मिला. जबकि 27 शराब दुकानों वाले जोन 17 का रिजर्व प्राइस 226 करोड़ रुपये था, लेकिन उसकी बोली 227 करोड़ रुपये की हो पाई. इस जोन में किशनगंज, रोहिणी का हिस्सा, आदर्श नगर, घूमन हेरा, बिजवासन, कोंडली आदि इलाके शामिल हैं.

    दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे ये जोन
    सरकार की कमाई की दृष्टि से दूसरे नंबर पर जोन संख्या 28 है, जो द्वारका-ए, गौतम पुरी, प्रताप नगर, विजय विहार, भजनपुरा, देवली सहित नौ निगम वार्डों में फैला है. इस जोन में रिजर्व लाइसेंस फीस 223 करोड़ रुपये रखी गई थी, जहां सरकार को 357 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. कुल रकम की दृष्टि से यह सर्वाधिक है. जबकि इस सूची में तीसरे स्थान पर है जोन 11 है, जिसमें 27 शराब दुकानें हैं और यह जोन पंजाबी बाग, सैनिक एन्क्लेव, पहाड़गंज, नजफगढ़़, बपरौला, घोंडा सहित नौ निगम वार्डों में फैला है. इस जोन में रिजर्व प्राइस 222 करोड़ रुपये था, जबकि सरकार को 351 करोड़ मिले हैं.

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    कुल लाइसेंस फीस 8,911 करोड़ रुपये तक पहुंची
    नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली छावनी क्षेत्र के तहत आने वाले जोन 31 में 29 शराब की दुकानें हैं, जिनका रिजर्व प्राइस 217 करोड़ रुपये रखा गया था. यहां से 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं. बता दें कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के तहत 32 आबकारी जोन में खुदरा शराब लाइसेंसों की नीलामी पांच अगस्त से की गई और शुरुआती नीलामी में 20 जोन से सरकार को 5300 करोड़ रुपये कमाई हुई थी. शेष 12 जोन में लाइसेंस की नीलामी बाद में हुई और इस प्रकार कुल लाइसेंस फीस 8,911 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
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    बहरहाल, दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के तहत निजी वेंडरों द्वारा शराब की खुदरा बिक्री के लिए नया लाइसेंस 17 नवम्बर से अमल में आ जाएगा और इसके साथ ही सरकार खुदरा शराब करोबार से निकल जाएगी. राजधानी में कुल 850 खुदरा शराब दुकानों में से करीब 60 फीसदी दुकानें दिल्ली सरकार की एजेंसियों द्वारा संचालित हैं, जहां शराब खरीदने का अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहता है. इसी वजह सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है.

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