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राइट टू एजुकेशन: एक बच्चे की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा खर्च करती है दिल्ली सरकार

UP: बेसहारा बच्चों और बाल श्रमिक भी सीखेंगे A,B,C,D....(News18 Hindi ग्राफिक्‍स)

UP: बेसहारा बच्चों और बाल श्रमिक भी सीखेंगे A,B,C,D....(News18 Hindi ग्राफिक्‍स)

राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE) के तहत गरीब बच्चों को भी प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में एडमिशन दिलाया जाता है. हर एक प्राइवेट स्कूल में 25 प्रतिशत सीट गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रहती हैं.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 1:02 PM IST
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नई दिल्ली. राइट टू एजुकेशन एक्ट (RTE) के तहत गरीब बच्चों को भी प्राइवेट पब्लिक स्कूलों में एडमिशन दिलाया जाता है. हर एक प्राइवेट स्कूल में 25 प्रतिशत सीट गरीब बच्चों के लिए रिजर्व रहती हैं. पढ़ाई का पूरा खर्च प्रदेश और केन्द्र सरकार मिलकर उठाते हैं. खास बात यह है कि मौजूदा वक्त में दिल्ली और हिमाचल प्रदेश सरकार आरटीई के तहत हर साल एक बच्चे पर सबसे ज्यादा खर्च कर रही है. वहीं, सबसे कम खर्च करने वालों में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रालय की एक रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है.

पढ़ाई पर कहां-कहां होता है खर्च

आरटीई के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चे का एडमिशन होने के बाद स्कूल का खर्च प्रदेश सरकार केन्द्र के साथ मिलकर उठाती है. बच्चों को स्कूल में न तो फीस देनी होती है, और न ही यूनिफार्म, बुक, ट्रांसपोर्टेशन या मीड-डे मील जैसी चीजों पर फीस के रूप में कोई भुगतान करना होता है.



एक्ट के तहत ऐसे बच्चे ले सकते हैं एडमिशन
शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में ऐसे अभिभावक जिनकी वार्षिक आय 55 हजार रुपए या उससे कम है, बच्चों का प्रवेश करा सकते हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अनाथ बच्चे, शारीरिक रूप से विकलांग, विधवा और तलाकशुदा माता पर आश्रित बच्चे किसी भी प्राइवेट पब्लिक स्कूल में एडमिशन पाने के हकदार हो जाते हैं.



हर स्कूल में 25 फीसदी सीटें होती हैं आरक्षित

आरटीई में स्कूल जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी को मान्यता के लिए स्वघोषणा पत्र भरकर देते हैं. इसमें वे यह घोषणा करते हैं कि उनके स्कूल की शुरुआती क्लास में कितनी सीटें हैं. इस सीट के 25 फीसदी सीटें आरटीई के लिए आरक्षित रखी जाती हैं. और फिर जैसे ही आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के आवेदन आते हैं तो उन्हें एडमिशन दे दिया जाता है.

RTE में प्रति बच्चा हर साल होने वाला खर्च

ज्यादा खर्च करने वाले राज्य

दिल्ली 28108, हिमाचल प्रदेश 28095, त्रिपुरा 21000, उत्तराखण्ड 18700, महाराष्ट्र 17670, चंडीगढ़ 16440 और असम 16396 रुपये है.



सबसे कम खर्च करने वाले राज्य

कर्नाटक 8000, छत्तीसगढ़ 7650, बिहार 6569, उत्तर प्रदेश 5400, झारखण्ड 5100 और

मध्य प्रदेश 4640 रुपये है.

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