दिल्‍ली: चाकू निगल गया था हरियाणा का यह युवक, AIIMS के डॉक्‍टर्स ने 3 घंटे की सर्जरी के बाद निकाला
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दिल्‍ली: चाकू निगल गया था हरियाणा का यह युवक, AIIMS के डॉक्‍टर्स ने 3 घंटे की सर्जरी के बाद निकाला
एम्‍स के डॉक्‍टर्स के लिए यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

चाकू (Knife) का करीब 10 सेमी हिस्‍सा अमाशय (Stomach) की परत को भेदकर लीवर (Lever) में धंस गया था.

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नई दिल्‍ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) में बीते दिनों हरियाणा के एक गांव से एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया. करीब 28 साल के एक युवक गांजे (Cannabis) की लत के कारण मानसिक रूप से बीमार हो गया था. करीब डेढ़ महीने पहले यह युवक 20 सेंटीमीटर लंबा एक चाकू (Knife) निगल गया था. तब किसी ने उसे ऐसा करते नहीं देखा, लेकिन जब चाकू ने अंदर नुकसान करना शुरू किया तो उसके बाद पेट दर्द (Stomach Pain) व भूख न लगने की शिकायत सामने आई.

घरवालों ने युवक का स्‍थानीय डॉक्‍टर से इलाज भी कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. परेशान होकर युवक को लेकर परिजन दिल्‍ली से सफदरजंग अस्‍पताल पहुंचे, जहां युवक का एक्‍स-रे कराया गया. एक्‍स-रे की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उसके पेट में करीब 20 सेमी लंबा चाकू है. एक्सरे में पेट में इतना बड़ा चाकू देखकर डॉक्टर चौंक गए. काफी पूछताछ पर मरीज ने इसकी जानकारी दी. लेकिन तब तक इसकी हालत काफी खराब हो चुकी थी. मरीज की हालत देखकर सफदरजंग हॉस्पिटल के डॉक्‍टर्स ने 12 जुलाई को उसे एम्‍स के लिए रेफर कर दिया.

लिवर में धंसा था चाकू
गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के सर्जन डॉ. एनआर दास ने बताया कि जब हमने मरीज का सीटी स्कैन किया तो पता चला कि चाकू का करीब 10 सेंटीमीटर धारदार हिस्सा आमाशय की परत को भेद कर पूरी तरह लिवर में धंसा है. वहीं, चाकू को पकड़ने वाला हिस्सा आमाशय में था. डॉ. दास ने बताया कि इंफेक्शन के कारण लिवर व फेफड़े में मवाद भर गया था. मरीज के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर केवल 6 था और खून में संक्रमण का स्तर 22000 तक था. लीवर में मवाद व फेफड़े में पानी भर गया था.
तीन घंटे चला ऑपरेशन


19 जुलाई को डॉक्टर्स की टीम ने सर्जरी की. डॉ. दास ने बताया कि तीन घंटे चली सर्जरी में चाकू को न केवल सुरक्षित निकाल लिया गया, बल्कि मरीज भी अब जोखिम से बाहर है. यह ऑपरेशन कितना चुनौतीपूर्ण रहा, इसे लेकर डॉ. दास ने कहा कि चाकू लिवर से निकालने की चुनौती सबसे बड़ी थी, क्योंकि चाकू वहां धंसा था, जहां लिवर के अंदर व बाहर खून ले जाने वाली मुख्य नसें थीं. साथ ही लिवर से पित्त ले जाने वाली नली भी थी. इनमें से किसी को भी क्षति पहुंच सकती थी, जिसमें बहुत ज्यादा खून बहने व मरीज की जान जाने का डर था.
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