दिल्ली HC ने 18+ वकीलों के वैक्सीनेशन के मामले में कहा- बिना बंदूक के युद्ध में नहीं भेज सकते

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से 18+ वकीलों के  वैक्सीनेशन कराने को लेकर जवाब तलब किया है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से 18+ वकीलों के वैक्सीनेशन कराने को लेकर जवाब तलब किया है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से पूछा कि जेलों में भीड़भाड़ कम करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करवाने के लिए काम में जुटे विधिक सहायता वकील और न्यायिक अधिकारी जिला अदालतों में लगाए गए केंद्रों पर टीका लगवाने सीधे आ सकते हैं.

  • Last Updated: May 13, 2021, 5:12 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से पूछा कि जेलों में भीड़भाड़ कम करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करवाने के लिए काम कर रहे विधिक सहायता वकील और न्यायिक अधिकारी, जो 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग में आते हैं, क्या वे जिला अदालतों में लगाए गए केंद्रों पर टीका लगवाने सीधे आ सकते हैं. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आप किसी को बिना बंदूक के युद्ध के मैदान में नहीं भेज सकते हैं. कोर्ट ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण की याचिका पर सुनवाई के करते हुए ये टिप्पणी की.

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नवीन चावला ने कहा कि कानूनी सहायता वकील और न्यायिक अधिकारी सुप्रीम कोर्ट  के निर्देशों को लागू करने के लिए काम कर रहे हैं. इन लोगों का कोविड-19 महामारी से बचाव करने की जरूरत है. DSLSA की ओर से वकील अजय वर्मा ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि केंद्र और दिल्ली सरकार को न्यायिक अधिकारियों एवं कानूनी सहायता वकीलों का डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में बनाए गए टीकाकरण केंद्रों पर तत्काल टीकाकरण करने का निर्देश दिया जाए.

केंद्र सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी है कि वर्तमान में वकीलों को टीकाकरण में प्राथमिकता देने के लिए अग्रिम पंक्ति के कर्मचारी के तौर पर उनके लिए अलग से कोई वर्गीकरण नहीं है. उसने कहा कि कानूनी सहायता वकीलों के टीकाकरण का मुद्दा देशभर में चिंता का विषय बना हुआ है.

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चेतन शर्मा की तरफ से कोर्ट को दी गयी जानकारी

एडिशनल सॉलिसीटर जनरल चेतन शर्मा ने कोर्ट को यह भी बताया कि टीकाकरण की पहली और दूसरी खुराक के बीच एक महीने से अधिक का अंतर है और इस अवधि में कानूनी सहायता वकीलों का कोविड-19 के खतरे से सामना हो सकता है. इस पर कोर्ट ने कहा कि शर्मा की बात सही है और यदि इन वकीलों को प्राथमिकता के आधार पर टीके की पहली खुराक मिल जाती है तो इससे उन्हें कुछ तसल्ली तो मिलेगी. कोर्ट अदालत ने कहा हम जो भी दे सकते हैं कम से कम वह तो हमें उन्हें देना चाहिए.

दिल्ली सरकार के वकील ने दी यह दलील



दिल्ली सरकार के स्थायी वकील संतोष के त्रिपाठी ने कोर्ट से कहा कि 45 वर्ष या अधिक आयु के वकील और न्यायिक अधिकारी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट  में बने टीकाकरण केंद्रों पर सीधे जा सकते हैं. हालांकि यह व्यवस्था 18 से 44 साल उम्र के वकीलों और न्यायिक अधिकारियों के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग के लोगों को टीकाकरण के लिए सीधे पहुंचने की अनुमति देने का दिल्ली सरकार को अधिकार नहीं है. इस बाबत फैसला केंद्र को लेना है.

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