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दिल्ली HC ने सुपरटेक के MD को 3 साल की सजा के NCDRC के आदेश पर लगाई रोक, खरीदार को देने होंगे 50 लाख

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुपरटेक के MD की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुपरटेक के MD की गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक के लिए रोक लगा दी है.

Delhi NCR News: दिल्ली हाई कोर्ट 20 सितंबर के उस आदेश को चुनौती देने वाली सुपरटेक की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें अरोड़ा को 3 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. इस पर NCDRC के निर्देशों का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Disputes Redressal Commission-NCDRC) के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सुपरटेक के एमडी मोहित अरोड़ा (Supertech MD Mohit Arora) को तीन साल जेल की सजा सुनाई गई थी, साथ ही सुपरटेक में एक घर खरीदार द्वारा दायर एक मामले में आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था.

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने रियल स्टेट कंपनी को अदालत को अपनी उपस्थिती दिखाने के लिए 1.75 करोड़ रुपए की बकाया राशि में से 50 लाख रुपये घर खरीदार के अकाउंट में एक हफ्ते के भीतर जमा कराने का निर्देश दिया. कोर्ट ने कहा कि कंपनी के प्रबंध निदेशक को तीन साल सजा देने के NCDRC के आदेश पर सुनवाई की अगली तारीख तक रोक रहेगी.

अदालत ने कंपनी और घर खरीदार दोनों को NCDRC के आदेश के मुताबिक, बकाया राशि का स्टेटमेंट रिकॉर्ड में पेश करने का भी निर्देश दिया. हाई कोर्ट ने 20 सितंबर के उस आदेश को चुनौती देने वाली सुपरटेक की याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें अरोड़ा को तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई थी और एनसीडीआरसी के निर्देशों का पालन न करने के लिए उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था.

विला में कब्जा देने में देरी की गई थी शिकायत 

एनसीडीआरसी का मामला यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में कंपनी की एक परियोजना में एक विला का कब्जा देने में देरी के लिए घर खरीदार की शिकायत से संबंधित है, जिसे एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि लेकर आवंटित किया गया था. सुपरटेक का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने दलील दी कि एनसीडीआरसी का आदेश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 27 के प्रावधानों से परे था और ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, जो कंपनी द्वारा डिफ़ॉल्ट की स्थिति में एमडी पर आपराधिक या सिविल मामले में उन्हें उत्तरदायी बनाने के लिए प्रतिवर्ती दायित्व डालता है. वहीं, घर खरीदार कंवल बत्रा के वकील ने याचिका का विरोध किया और कहा कि कंपनी एनसीडीआरसी के आदेश का बार-बार उल्लंघन कर रही है.

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