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दिल्ली में Covid-19 से मौत के बढ़ते आंकड़ों पर बोले सत्येंद्र जैन- बढ़ा प्रदूषण स्तर है वजह

दिल्ली में इस महीने कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक  लगभग 1900 लोगों की मौत हो चुकी है (Pic- AP File)
दिल्ली में इस महीने कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक लगभग 1900 लोगों की मौत हो चुकी है (Pic- AP File)

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने कहा, 'पराली जलाने (Stubble Burning) से उठे धुएं और उसमें मौजूद सूक्ष्म कणों की वजह से सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों का स्वास्थ्य और खराब हो गया. अब, प्रदूषण में कमी आई है तो हमें इसका असर एक से दो हफ्ते में दिखेगा. मौत के आंकड़ों में भी कमी आएगी'

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 23, 2020, 6:05 PM IST
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नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में पिछले तीन दिन से 100 से ज्यादा लोगों की कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण से मौत होने के बाद, सोमवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने कहा कि मृत्युदर (Death Rate) में तेजी की वजह मरीजों का बढ़े प्रदूषण (Pollution Level) के संपर्क में आना है.

पिछले तीन दिनों से दिल्ली में प्रतिदिन 100 से ज्यादा लोग कोविड-19 के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं. आंकड़ों के मुताबिक 20 नवंबर को 118 जबकि 21 और 22 नवंबर को 111 लोगों की मौत हुई है. 18 नवंबर को सबसे ज्यादा 131 लोगों की महामारी की चपेट में आने से जान चली गई.

जैन ने कहा कि मौत के आंकड़ों में वृद्धि की सबसे बड़ी वजह प्रदूषण स्तर का बढ़ना है. उन्होंने कहा, 'पराली जलाने से उठे धुएं और उसमें मौजूद सूक्ष्म कणों की वजह से सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों का स्वास्थ्य और खराब हो गया. अब, प्रदूषण में कमी आई है तो हमें इसका असर एक से दो हफ्ते में दिखेगा. मौत के आंकड़ों में भी कमी आएगी.'



कोरोना वायरस संक्रमण का रोगी के फेफड़ों पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है, यह उसके लिए संभावित घातक होता है. वैसे मरीज जो पहले से सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं, आम तौर पर सर्दियों के महीने के दौरान जब प्रदूषण स्तर बढ़ जाता है, को यदि कोविड-19 हो जाता है, तो यह समय उनके लिए काफी खतरनाक है.
कोविड-19 से संक्रमित लोगों के फेफड़ों में लगी चोट (खराबी) घातक
इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बाइलरी साइंसेज (ILBS), जो दिल्ली का पहला प्लाज्मा बैंक भी है, के हेड डॉ. एसके सरीन ने न्यूज़ 18 को पूर्व में दिए इंटरव्यू में कहा था कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित होते हैं उनके फेफड़ों में लगी चोट (खराबी) घातक होती है.

उन्होंने कहा था, 'चिंता करने की जो बात है वो यह कि कुछ रोगियों में, वायरस का हमला इतना बुरा होता है कि इसे हम कोरा स्कोर कहते हैं- जिस तरह से आप फेफड़ों की चोट का स्कोर करते हैं - वो a.6 से बहुत कम समय में 12, 20 तक हाई हो सकता है. इन मरीजों पर स्टेरॉयड का असर नहीं होता और न ही इसका कोई एंटी-वायरल दवा है. इसलिए मुझे लगता है, सरकार ने जो कॉकटेल (दवाओं का) निर्धारित (तय) किया है उसका रोगियों पर बहुत सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, मगर इस वायरस के साथ मृत्युदर अधिक है. यह बहुत बुरा वायरस है.'

(इस लेख के मूल रूप को इंग्लिश में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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