दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से पूछा - अधिनियम 2016 के अनुरूप दिव्यांगों को पेट्रोल पंप दिया या नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने पेट्रोलियम मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनी HPCL को नोटिस जारी किया (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने पेट्रोलियम मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनी HPCL को नोटिस जारी किया (फाइल फोटो)

दृष्टिबाधित महिला की याचिक पर जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने सुनवाई करते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनी HPCL को नोटिस जारी किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 3:52 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार (Central Government) से पूछा कि दिव्यांग जनों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप दिव्यांग (differently abled) व्यक्तियों को पेट्रोल पंप (petrol pump) आवंटित किए गए या नहीं. मामले की सुनवाई करने के बाद जस्टिस प्रतिभा एम सिंह (Justice Pratibha M Singh) ने एक याचिका पर पेट्रोलियम मंत्रालय, सामाजिक न्याय मंत्रालय और सरकारी तेल कंपनी हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को नोटिस जारी किया.

दृष्टिबाधित महिला की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में 2016 के उक्त अधिनियम के अनुरूप पेट्रोल पंपों या डीलरशिप के आवंटन में दिव्यांग व्यक्तियों को आरक्षण देने की कोर्ट से मांग की गई थी. 75 प्रतिशत तक दृष्टिबाधित महिला की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में दलील दी गई कि डीलरशिप के आवंटन के लिए HPCL अब भी पुराने निरस्त किए गए 1995 के दिव्यांग जन अधिनियम का पालन कर रहा है.

मुख्य आयुक्त के आदेश को चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट में वकील संजय कुमार सिंह के माध्यम से दायर याचिका में महिला ने दिव्यांग जन कानून, 2016 के तहत गठित मुख्य आयुक्त कार्यालय के दिसंबर 2020 के आदेश को चुनौती दी है, जिसे HPCL के नवंबर 2018 के विज्ञापन में दिव्यांग व्यक्तियों के लिए इंगित खुदरा दुकानों के आवंटन के तरीके या कंपनी की योजना में कोई खामी नहीं दिखी.

आवंटन रद्द करने का अनुरोध

वहीं कोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया गया कि आवंटन योजना में कोई खामी नहीं पाते हुए मुख्य आयुक्त ने निरस्त कानून के आधार पर बताने की बजाय HPCL को 2016 के कानून के अनुरूप अपनी नीति में सुधार करने को कहा. याचिका में 2018 के विज्ञापन के आधार पर किए गए आवंटन रद्द करने का भी अनुरोध किया गया है, क्योंकि यह पुराने कानून के आधार पर हुआ है.
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