दिल्ली के स्कूलों में नहीं मिल रहा मिड-डे मील, हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार से पूछे सवाल

एक एनजीओ ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर स्कूली बच्चों को फूड सिक्योरिटी अलॉउन्स देने की मांग की है (प्रतीकात्मक तस्वीर)
एक एनजीओ ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर स्कूली बच्चों को फूड सिक्योरिटी अलॉउन्स देने की मांग की है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार (Delhi Government) की तरफ से हाईकोर्ट में कहा गया कि सरकारी स्कूल में मिलने वाले मिड-डे मील (Mid Day Meal) का फंड केंद्र से अभी तक उन्हें नहीं मिला है. इस पर अदालत ने कहा कि प्लस माइनस चलता रहता है. लेकिन इसका प्रभाव बच्चों पर तो नहीं पड़ना चाहिए

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 30, 2020, 11:55 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौरान दिल्ली के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील (Mid Day Meal) को लेकर दाखिल याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में मंगलवार को सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार (Delhi Government) से कहा कि कोरोना वायरस (COVID-19) को लेकर स्कूल बंद हैं लेकिन मिड-डे मील को लेकर बच्चे क्यों महीनों तक परेशान रहें. जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि छोटे बच्चों को मिड-डे मील को लेकर परेशान करने की जरूरत नहीं है. यह बात सरकार को समझने की जरूरत है.

दरअसल, एक एनजीओ की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया कि कोविड-19 की वजह से स्कूल बंद हैं, इस वजह से बच्चों को मिड-डे मील नहीं मिल पा रहा है. हमारे समाज में ऐसे बहुत से परिवार हैं जिनके बच्चे मिड-डे मील पर निर्भर हैं. लिहाजा, राज्य सरकार मिड-डे मील या फिर फूड सिक्योरिटी अलॉउन्स (भत्ता) बच्चों को दे.

'केंद्र सरकार की तरफ से मिड-डे मील का फंड नहीं मिला'



सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से अदालत में कहा गया कि सरकारी स्कूल में मिलने वाले मिड-डे मील का फंड केंद्र से अभी तक उन्हें नहीं मिला है. इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि प्लस माइनस चलता रहता है. लेकिन इसका प्रभाव बच्चों पर तो नहीं पड़ना चाहिए. दिल्ली सरकार ने मामले में अपना जवाब दाखिल करने से लिए कोर्ट से समय मांगा. जिस पर अदालत ने उसे 21 जुलाई तक का समय दिया है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी.
बता दें कि केंद्र सरकार की पहल पर देश भर के सरकारी विद्यालयों, सरकारी सहायता प्राप्त, स्थानीय निकायों की ओर से संचालित स्कूलों और मदरसे में मिड-डे मील दिया जाता है. इसके तहत पढ़ने आने वाले बच्चों को दोपहर का भोजन दिया जाता है. इसके लाभार्थी समाज के वंचित और गरीब तबके के बच्चे होते हैं.
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