केजरीवाल सरकार पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- Corona मरीजों के बेड रिजर्वेशन मामले में जल्द लें फैसला
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केजरीवाल सरकार पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी- Corona मरीजों के बेड रिजर्वेशन मामले में जल्द लें फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार केंद्र सरकार की कोविड-19 गाइडलाइन का पालन नहीं कर रही है. (फाइल फोटो)

दिल्ली (Delhi) में कुल 117 छोटे बड़े अस्पताल और नर्सिंग होम हैं. लिहाजा, इस तरह से अस्पताल और नर्सिंग होम में covid-19 के मरीजों के लिए बेड रिज़र्व किया जाएगा तो संक्रमण का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा.

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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi high court) ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि अस्पतालों और नर्सिंग होम में covid-19 के मरीजों के बेड रिजर्वेशन मामले में जल्द फैसला लें. दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर अदालत ने कहा है कि कोविड-19 महामारी पर बनाई गई पॉलिसी को ध्यान में रख कर फैसला लें. जानकारी के मुताबिक, दिल्ली सरकार पर आरोप है कि वह केंद्र सरकार की covid-19 गाइडलाइन का पालन नहीं कर रही है.

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली सरकार केंद्र सरकार की कोविड-19 गाइडलाइन का पालन नहीं कर रही है. केंद्र सरकार द्वारा बीते 28 मार्च को जारी की गई covid1-9 गाइडलाइन के मुताबिक, राज्य सरकार हॉस्पिटल को पूरी तरीके से कोरोना मरीजों के इलाज के लिए दे दे. इन अस्पतालों के एग्जिट और एंट्री गेट अलग-अलग होने चाहिए. ताकि कोरोना के मरीजों से दूसरे मरीज संपर्क में न आये और संक्रमण का खतरा न हो. अगर किसी अस्पताल के एक ब्लॉक को कोरोना मरीज के इलाज के लिए रखा जाता है तो उसका भी एंट्री और एग्जिट अलग-अलग होना चाहिए. लेकिन, दिल्ली सरकार बीते 24 मई के दिन जारी आदेश के मुताबिक, दिल्ली के सभी अस्पतालों या नर्सिंग होम को अपने 20 फीसदी बेड कोरोना मरीजो के लिए रिज़र्व करने का आदेश है.





दिल्ली में कुल 117 छोटे बड़े अस्पताल और नर्सिंग होम हैं



इस तरह से दिल्ली में कुल 117 छोटे बड़े अस्पताल और नर्सिंग होम हैं. लिहाजा, इस तरह से अस्पताल और नर्सिंग होम में covid-19 के मरीजों के लिए बेड रिज़र्व किया जाएगा तो संक्रमण का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा. क्योंकि जो लोग पहले से अस्पताल में इलाज करा रहे हैं उनकी इम्युनिटी पहले से कमजोर है. लिहाजा, हाईकोर्ट से मांग की गई थी कि राज्य सरकार के इस फैसले को खारिज कर दे. फिलहाल, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से याचिकाकर्ता के इस दलील पर फैसला लेने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि इस मामले में जल्द से जल्द फैसला लें.

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