दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला को 23 हफ्ते के जुड़वां भ्रूण के गर्भपात की दी इजाजत, जानें वजह...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर महिला के असमान्यता से पीड़ित जुड़वां भ्रण को गर्भपात की अनुमति दे दी है

दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर महिला के असमान्यता से पीड़ित जुड़वां भ्रण को गर्भपात की अनुमति दे दी है

पिछले हफ्ते महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में याचिका दाखिल कर गर्भपात (Abortion) की अनुमति मांगी थी. महिला ने याचिका में कहा था कि उसका जुड़वां भ्रूण ‘डैंडी वॉकर विकृति’ से पीड़ित है. यह एक दुर्लभ घटना जन्मजात मस्तिष्क असामान्यताएं होती है

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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने महिला को उसके गर्भ में पल रहे मानसिक विकृति से पीड़ित 23 हफ्ते के जुड़वां भ्रूण का गर्भपात (Abortion) करने की इजाजत दे दी है. हाईकोर्ट ने एम्स (AIIMS) की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया है. एम्स द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महिला के गर्भ में जुड़वां भ्रूण असामान्यताओं से पीड़ित है और यदि उन्हें जन्म दिया गया तो लंबे समय तक विकास संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.

हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच के समक्ष पेश इस मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी गर्भपात करने पर महिला को किसी तरह का कोई जोखिम नहीं होगा. इसके बाद अदालत ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद महिला को गर्भपात करने की अनुमति दे दी. साथ ही इस मांग को लेकर महिला की ओर से दाखिल याचिका का निपटारा कर दिया. मामले की सुनवाई के दौरान महिला और उसके पति दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहे. उन्होंने कोर्ट को बताया कि वो गर्भपात से जुड़े जोखिमों से अवगत हैं.

पिछले हफ्ते महिला ने अदालत में याचिका दाखिल कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी. महिला ने याचिका में कहा था कि उसका जुड़वां भ्रूण ‘डैंडी वॉकर विकृति’ से पीड़ित है. यह एक दुर्लभ घटना जन्मजात मस्तिष्क असामान्यताएं होती है.

महिला की याचिका पर हाईकोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित करने और उसकी जांच के बाद रिपोर्ट पेश करने को कहा था. महिला ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे 28 अप्रैल को पता चला कि उसके गर्भ में पल रहे जुड़वां बच्चे मानसिक विकृति से गुजर रहे हैं. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि उनके डॉक्टर ने पहले ही इस बात की आशंका जताई थी लेकिन पूरी रिपोर्ट का इंतजार किया था. दंपति ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद पता चला कि यह काफी दुर्लभ बीमारी है जो ठीक नहीं हो सकती. साथ ही कहा कि इस बीमारी में बच्चे का विकास नहीं होता और वो कभी सामान्य नहीं हो पाता है.

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