दिल्ली हिंसा के आरोपी आसिफ इकबाल तन्हा को परीक्षा में बैठने के लिए हाईकोर्ट ने दी जमानत

आसिफ इकबाल तन्हा के लिए बीए (ऑनर्स) (फारसी) पूरा करने के लिए तीन पूरक परीक्षाओं में बैठना आवश्यक है इस् देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे हिरासत-जमानत पर छोड़ने का आदेश दिया है

दिल्ली हाईकोर्ट के दो जजों की बेंच ने कहा आसिफ इकबाल तन्हा (Asif Iqbal Tanha) के लिए बीए (ऑनर्स) (फारसी) पूरा करने के लिए तीन पूरक परीक्षाओं में बैठना आवश्यक है इसलिए उसे 13 जून की सुबह हिरासत-जमानत पर छोड़ा जाए और 26 जून की शाम को जेल में वापस लाया जाए

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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा (Delhi Violence) से सिलसिले में गिरफ्तार जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Milia Islamia) के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा (Asif Iqbal Tanha) को दो हफ्ते की अंतरिम जमानत दे दी है. आसिफ को यह राहत 15 जून से होने जा रही परीक्षा के मद्देनजर दी गई है जिसमें वो पढ़ाई करने और परीक्षा में बैठने के लिए दो हफ्ते तक यहां के एक होटल में रहेगा.

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जयराम भम्भानी की बेंच ने कहा कि तन्हा के लिए बीए (ऑनर्स) (फारसी) पूरा करने के लिए तीन पूरक परीक्षाओं में बैठना आवश्यक है इसलिए उसे 13 जून की सुबह हिरासत-जमानत पर छोड़ा जाए और 26 जून की शाम को जेल में वापस लाया जाए. इस दौरान तन्हा जेल के दो सुरक्षाकर्मियों की निगरानी में कालकाजी के एक होटल में ठहरेगा.

इस दौरान आने वाला पूरा खर्च आसिफ इकबाल तन्हा ही वहन करेगा जिसके लिए उसने रजामंदी दी है. कोर्ट ने कहा कि अंतरिम हिरासत-जमानत के दौरान आवेदक अपने परिवार के सदस्यों, मित्रों, सहपाठियों या किसी भी अन्य व्यक्ति को मिलने के लिए नहीं बुलाएगा. चूंकि परीक्षा ऑनलाइन तरीके से होगी इसलिए कोर्ट ने तन्हा से कहा है कि वो लैपटॉप, इंटरनेट और एक सामान्य मोबाइल फोन की व्यवस्था करे. इनकी जांच पहले पुलिस अधिकारी करेंगे और उसके बाद ही यह वस्तुएं तन्हा को सौंपी जाएंगी.

कोर्ट ने यह भी कहा कि तन्हा प्रतिदिन दस मिनट के लिए अपने परिवार या वकील से फोन पर बात कर सकेगा. अंतरिम हिरासत-जमानत की इस अवधि को जेल की सजा में शामिल माना जाएगा.

बता दें कि आसिफ इकबाल तन्हा को पिछले वर्ष मई में गिरफ्तार किया गया था. उस पर दिल्ली हिंसा की साजिश में शामिल होने का आरोप है. 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़की थी जिसने सांप्रदायिक रूप ले लिया था. इस हिंसा में 53 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे.