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MCD को दिल्ली हाईकोर्ट से फटकार, कहा- पेंशन और वेतन लोगों का मौलिक अधिकार

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा संविधान के आर्टिकल 21 के तहत वेतन (Salary) का भुगतान नहीं करने का सीधा तक लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ेगा. यह बहुत जरूरी है कि निगमों के कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों को वेतन और पेंशन का भुगतान किया जाए जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी शामिल हैं, और जो महामारी के समय में भी अपनी सेवाएं दे रहे थे
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा संविधान के आर्टिकल 21 के तहत वेतन (Salary) का भुगतान नहीं करने का सीधा तक लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ेगा. यह बहुत जरूरी है कि निगमों के कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों को वेतन और पेंशन का भुगतान किया जाए जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी शामिल हैं, और जो महामारी के समय में भी अपनी सेवाएं दे रहे थे

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा संविधान के आर्टिकल 21 के तहत वेतन (Salary) का भुगतान नहीं करने का सीधा तक लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ेगा. यह बहुत जरूरी है कि निगमों के कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों को वेतन और पेंशन का भुगतान किया जाए जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी शामिल हैं, और जो महामारी के समय में भी अपनी सेवाएं दे रहे थे

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 8:09 PM IST
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नई दिल्ली. कर्मचारियों को वेतन और पेंशन का भुगतान न करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने दिल्ली नगर निगम की जमकर खिंचाई की है. मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि धन की कमी बहाना नहीं हो सकता और वेतन पाने का अधिकार भारत के संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार है. बुधवार को जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की बेंच दिल्ली नगर निगम (MCD) और विशेष रूप से उत्तर दिल्ली नगर निगम और पूर्वी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों को वेतन (Salary) और पेंशन का भुगतान नहीं करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा, समय पर वेतन का भुगतान न किए जाने का कारण धन की कमी बताया गया है. यह एक बहाना नहीं हो सकता क्योंकि, वेतन और पेंशन लोगों का मौलिक अधिकार है. कोर्ट ने कहा संविधान के आर्टिकल 21 के तहत वेतन का भुगतान नहीं करने का सीधा तक लोगों के जीवन की गुणवत्ता पर पड़ेगा. कोर्ट ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि निगमों के कर्मचारियों और रिटायर कर्मचारियों को वेतन और पेंशन का भुगतान किया जाए जिसमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी शामिल हैं, और जो महामारी के समय में भी अपनी सेवाएं दे रहे थे.

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान आगे कहा कि पैसे की कमी बहाना नहीं हो सकता है, और ना ही इसे स्वीकार किया जाना चाहिए. वेतन और पेंशन के भुगतान को अन्य खर्चों से ज्यादा प्राथमिकता देनी होगी. मामले की सुनवाई 21 जनवरी तक स्थगित करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हम नगर निगम को निर्देश देते हैं कि वो विभिन्न मदों में किए जाने वाले खर्च का ब्यौरा दे. आर्यों के लिए भत्ते की राशि विशिष्ट मद में स्पष्ट रूप से प्रकट किया जाना चाहिए.



बता दें कि नगर निगम के कर्मचारी अपना वेतन नहीं मिलने को लेकर सात जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.
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