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दिल्‍ली हाईकोर्ट के जज की वकील को फटकार; 'माई लॉर्ड, माई लॉर्ड मत कीजिए, मुद्दे पर ध्‍यान दीजिए'

अदालत वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उधर, दिल्‍ली सरकार की तरफ से पेश वकील जावेद ने जस्टिस नजमी वजीरी को आश्‍वस्‍त किया कि मामला मुख्‍य सचिव के समक्ष रखा गया है और अप्रैल के अंत तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा. उन्‍होंने दो माह के भीतर इस कार्य को तेजी से पूरा करने की बात कही.

अदालत वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उधर, दिल्‍ली सरकार की तरफ से पेश वकील जावेद ने जस्टिस नजमी वजीरी को आश्‍वस्‍त किया कि मामला मुख्‍य सचिव के समक्ष रखा गया है और अप्रैल के अंत तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा. उन्‍होंने दो माह के भीतर इस कार्य को तेजी से पूरा करने की बात कही.

अदालत वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उधर, दिल्‍ली सरकार की तरफ से पेश वकील जावेद ने जस्टिस नजमी वजीरी को आश्‍वस्‍त किया कि मामला मुख्‍य सचिव के समक्ष रखा गया है और अप्रैल के अंत तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा. उन्‍होंने दो माह के भीतर इस कार्य को तेजी से पूरा करने की बात कही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 1, 2021, 12:11 PM IST
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नई दिल्ली : लंबित रिक्तियों को न भरे जाने के चलते डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलायड साइंसेज (IHBAS) की तरफ से पेश वकील को सोमवार को दिल्‍ली हाईकोर्ट की नाराजगी का सामना करना पड़ा. इस बाबत अदालत के निर्देशों का अनुपालन न करने को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस नजमी वजीरी इहबास के वकील की दलीलों से नाराज़ दिखे और उन्‍हें फटकार लगाते हुए कह दिया कि 'माई लॉर्ड, माई लॉर्ड मत कीजिए... इधर-उधर की बात करने की बजाय आपको मुद्दे पर ध्‍यान देना चाहिए'.

दरअसल, अदालत वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी की तरफ से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी. उधर, दिल्‍ली सरकार की तरफ से पेश वकील जावेद ने जस्टिस नजमी वजीरी को आश्‍वस्‍त किया कि मामला मुख्‍य सचिव के समक्ष रखा गया है और अप्रैल के अंत तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा. उन्‍होंने दो माह के भीतर इस कार्य को तेजी से पूरा करने की बात कही.

जस्टिस वजीरी ने उनसे कहा कि इस काम के लिए 8 सप्‍ताह काफी हैं. इसे जल्‍द पूरा कीजिए. IHBAS हमारे पास सबसे अच्छे संस्थानों में से एक है. इसमें मेडिकल स्टाफ की कमी नहीं होनी चाहिए. अगर कुछ कठिनाई है, तो हमारे पास वापस आइये.



अदालत को सूचित किया गया कि मुख्य सचिव स्वयं उस बैठक का नेतृत्व करते हैं, जिसमें संस्था के अपेक्षित संकाय और कर्मियों को रखने की बात शामिल होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जनहित में काम को सुचारू रूप से पूरा किया जा सके. मामले की अगली तारीख 18 मई तय की गई है.
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