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दिल्‍ली: 8 जुलाई तक स्‍कूल नहीं वसूल पाएंगे छात्रों से बढ़ी हुई फीस

दिल्‍ली: 8 जुलाई तक स्‍कूल नहीं वसूल पाएंगे छात्रों से बढ़ी हुई फीस

8 जुलाई तक दिल्‍ली के प्राइवेट स्‍कूल बढ़ी हुई फीस नहीं वसूल पाएंगे.

8 जुलाई तक दिल्‍ली के प्राइवेट स्‍कूल बढ़ी हुई फीस नहीं वसूल पाएंगे.

अगली सुनवाई तक कोई भी प्राइवेट स्कूल किसी छात्र से बढ़ी फीस नही ले पाएगा. दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट अशोक अग्रवाल का कहना है कि दिल्ली में करीब 300 स्कूल ऐसे हैं जो सरकारी जमीन पर हैं. वह जब भी फीस बढ़ाएंगे डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन से अनुमति लेनी होगी.

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    (राजीव तिवारी)

    दिल्‍ली में सरकारी जमीन पर बने प्राइवेट स्कूलों की फीस बढ़ाेत्‍तरी की मनमानी पर रोक लग गई है. प्राइवेट स्‍कूल दिल्‍ली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 8 जुलाई तक बढ़ी हुई फीस नहीं वसूल पाएंगे. इसके साथ ही 12वीं के वे छात्र जो स्‍कूल छोड़कर जा रहे हैं, स्‍कूल उनसे जबरन फीस और एरियर नहीं ले पाएंगे. यह आदेश दिल्‍ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए सुनाया.

    पिछली तारीख पर दिल्ली सरकार की तरफ से शपथ पत्र दाखिल कर कहा गया था कि सरकारी जमीन पर बने 364 स्कूलों में 266 स्कूलों ने सातवें वेतनमान का हवाला देकर फीस बढ़ाने की अनुमति मांगी थी. हालांकि इनमें भी 34 स्कूलों ने शुल्क बढ़ाने की अपनी अर्जी शिक्षा निदेशालय से वापस ले ली थी. बाकी 232 स्कूल के खातों की जांच के बाद 167 स्कूलों की तरफ से फीस बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया गया.

    ऐसे में इस पूरे मामले पर हुई सुनवाई से अब यह साफ हो गया है कि अगली सुनवाई तक कोई भी प्राइवेट स्कूल किसी छात्र से बढ़ी फीस नही ले पाएगा. दिल्ली हाईकोर्ट के एडवोकेट अशोक अग्रवाल का कहना है कि दिल्ली में करीब 300 स्कूल ऐसे हैं जो सरकारी जमीन पर हैं. वह जब भी फीस बढ़ाएंगे डायरेक्ट्रेट ऑफ एजुकेशन से अनुमति लेनी होगी.

    2004 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था इसे लागू किया जाय
    अब दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशानुसार यह शर्त पूरी करनी होगी. हालांकि सिंगल बेंच ने प्राइवेट स्कूलों को पहले अनुमति दे दी थी लेकिन अब फीस बढ़ाने से पहले अनुमति लेनी होगी. इसके साथ ही फीस बढ़ाने से पहले अपने अकाउंट का ऑडिट भी कराना होगा. इस संबंध में 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया था.

    बिना ऑडिट के मनमानी फीस बढ़ा रहे स्‍कूल
    एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने कहा, 'मेरा अनुभव बताता है कि प्राइवेट स्कूल दुकान की तरह हैं. यह सिर्फ पैसा बनाते हैं. अभी जो फीस प्राइवेट स्‍कूल ले रहे हैं वह भी 50 फीसदी से ज्‍यादा है. ऐसे में अगर जरूरत नहीं है तो स्‍कूल फीस क्‍यों बढ़ा रहे हैं. स्‍कूल सातवें वेतनमान के नाम पर अंधाधुंध फीस बढ़ा रहे हैं.

    Tags: Delhi, DELHI HIGH COURT, Delhi news, Private School

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