केजरीवाल सरकार की 'फरिश्ते' स्कीम पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
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केजरीवाल सरकार की 'फरिश्ते' स्कीम पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल. (File Photo)

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejriwal Government) की फरिश्ते स्कीम (Farishte) पर सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने कहा कि इस स्कीम का 10 लोगो फायदा उठा रहे हैं, तो 40 इसका दुरुपयोग कर रहे हैं.

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  • Last Updated: October 30, 2019, 5:05 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejriwal Government) की फरिश्ते स्कीम (Farishte) पर सवाल खड़े किए हैं. कोर्ट ने कहा कि इस स्कीम का 10 लोग फायदा उठा रहे है, तो 40 इसका दुरुपयोग कर रहे है. कोर्ट ने कहा कि फरिश्ता स्कीम का दलालों के माध्यम से गलत इस्तेमाल हो रहा है. जिसे रोकने और उस पर तुरंत ध्यान देने की दिल्ली सरकार को जरूरत है, नहीं तो इस पूरी स्कीम को दलाल ही take over कर लेंगे. आम लोगों को मदद मिल ही नहीं पाएगी.

कोर्ट ने यहां तक कहा कि अगर कोई व्यक्ति बाथरूम में गिर जाता है तो दूसरा व्यक्ति अस्पताल पर उसको भर्ती करने के लिए दबाव बनाता है. कोर्ट ने कहा कि सरकार की स्कीम अच्छी है लेकिन इसका फायदा जरूरतमंद लोगों को मिलना चाहिए न कि दलालों को. कोर्ट ने टिप्पणी अस्पतालों में साफ-सफाई को लेकर लगाई गई एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की.

इसी महीने हुआ ऑफिशियल लॉन्च
गौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में  दिल्ली सरकार ने एक साल के ट्रायल के बाद आखिरकार ‘फरिश्ते दिल्ली के’ योजना की शुरुआत की है. इस योजना के लॉन्च होने के बाद दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल अब सड़क हादसे में घायल शख्स को लौटा नहीं सकेंगे. साथ ही निजी अस्पतालों को मरीजों का इलाज कैशलेस  भी करना होगा. यह योजना सिर्फ और सिर्फ सड़क हादसे में पीड़ितों के लिए लाई गई है. 7 अक्टूबर को सीएम अरविंद केजरीवाल ने योजना लॉन्च की थी.





इस योजना को लॉन्च करने के बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा था, 'दिल्ली सरकार हर दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाएगी. दिल्ली के हर नागरिक की जान हमारे लिए कीमती है. सड़क हादसे का शिकार हर शख्स के इलाज का पूरा खर्च भी दिल्ली सरकार उठाएगी. घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले शख्स फरिश्ते कहलाएंगे.'

सरकार ने कहा, आप भी 'फरिश्ते' बन सकते हैं
7 अक्टूबर को दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल (MAMC) में योजना की शुरुआत करते हुए केजरीवाल ने कहा था, 'डेढ़ साल पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस योजना को लागू किया गया था. इस दौरान योजना में मिली खामियों को दूर किया गया. इस योजना में अब तक करीब तीन हजार लोगों की जान बची है. दुर्घटना होने के बाद पहला एक घंटा गोल्डन पीरियड होता है. अगर उस दौरान इलाज मिल गया तो जान बचने की 80 फीसद संभावना होती है. पहले लोग डरते थे कि अस्पताल पहुंचाने पर समस्या न बढ़ जाए, अस्पताल इलाज से इनकार न कर दे, पुलिस न परेशान करे, लेकिन तीन हजार जान बचने के बाद अब साफ हो गया है कि अब ऐसा नहीं हो रहा है. अब घायल के इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. चाहे खर्च कितना ही क्यों न आए. ऑटो और टैक्सी चालकों से अपील करता हूं कि वह काफी समय सड़क पर रहते हैं, कोई भी घायल दिखे तो उसे जरूर अस्पताल पहुंचाए और फरिश्ते बनें.'

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First published: October 30, 2019, 4:29 PM IST
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