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यौन उत्पीड़न केस: नाबालिग पीड़िता को दोबारा जिरह के लिए बुलाने से दिल्ली HC का इनकार, पढ़ें पूरा मामला

 दिल्ली हाई कोर्ट ने विजय नायर और अभिषेक बोइनपल्ली की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

दिल्ली हाई कोर्ट ने विजय नायर और अभिषेक बोइनपल्ली की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.

यौन उत्पीड़न के एक मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि नाबालिग को गवाही देने के लिए बार-बार अदालत में नहीं बुलाया ज ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

उत्पीड़न की शिकार नाबालिग को जिरह के लिए बुलाने से कोर्ट का इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने किया विशेष प्रक्रिया अपनाने का जिक्र

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित तौर पर यौन उत्पीड़न की शिकार विशेष जरूरतों वाली पीड़ित बच्ची को दोबारा जिरह के लिए बुलाने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा है कि कानून का निर्देश है कि नाबालिग को गवाही देने के लिए बार-बार अदालत में नहीं बुलाया जाना चाहिए. उच्च न्यायालय ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम विशेष कानून बच्चों के यौन शोषण और यौन उत्पीड़न से प्रभावी ढंग से निपटने और ऐसे जघन्य अपराधों के अपराधियों को दंडित करने के लिए लाया गया था. इसमें कहा गया है कि पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों को पढ़ने से पता चलता है कि बाल गवाह के साक्ष्य दर्ज करने के लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनाई गई है.

उच्च न्यायालय ने कहा कि पॉक्सो अधिनियम की धारा निर्देश देती है कि विशेष अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि नाबालिग को अदालत में गवाही देने के लिए बार-बार नहीं बुलाया जाए.

कोर्ट ने किया याचिका खारिज

न्यायमूर्ति पूनम ए. बंबा ने एक व्यक्ति की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिस पर 2018 में अपनी नाबालिग भतीजी का यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था. आरोपी-याचिकाकर्ता ने पीड़िता को सीआरपीसी की धारा 311 के तहत जिरह के लिए वापस बुलाने की मांग की थी. आरोपी ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें पीड़िता को फिर से बुलाने की याचिका खारिज कर दी गई थी. पीड़िता से मई 2019 में जिरह की जा चुकी थी.

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उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी के वकील ने तीन साल तक पीड़िता को फिर से बुलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया था. उन्होंने इस तरह के कदम उठाने के लिए अन्य महत्वपूर्ण गवाहों की जिरह पूरी होने का इंतजार किया. मालूम हो कि सीआरपीसी की धारा 311 महत्वपूर्ण गवाह को समन करने की अदालत की शक्ति से संबंधित है, जिसमें किसी भी व्यक्ति को बयान के लिए फिर से बुलाया जाना और फिर से पड़ताल करना शामिल है, अगर संबंधित व्यक्ति का साक्ष्य मामले के न्यायोचित निर्णय के लिए आवश्यक प्रतीत होता है.

Tags: DELHI HIGH COURT, Delhi news

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