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दिल्‍ली सरकार को HC से बड़ी राहत, शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

दिल्‍ली सरकार को HC से बड़ी राहत, शराब की दुकानों को बंद करने के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार

दिल्‍ली सरकार को नई आबकारी नीति से करोड़ों रुपये का फायदा हुआ है.

दिल्‍ली सरकार को नई आबकारी नीति से करोड़ों रुपये का फायदा हुआ है.

Delhi New Excise Policy: दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति को लेकर दिल्‍ली हाईकोर्ट ने किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. दरअसल कोर्ट में नई नीति को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं लंबित हैं. बता दें कि दिल्‍ली में कल यानी 1 अक्‍टूबर से सभी प्राइवेट शराब की दुकानें बंद हो रही हैं, क्‍योंकि सरकार ने 30 सितंबर के बाद लाइसेंस बढ़ाने से इनकार कर दिया है.

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  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने राजधानी में प्राइवेट शराब दुकानों (Liquor Shops) के लाइसेंस 30 सितंबर से आगे न बढ़ाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि दिल्‍ली सरकार के पास नई आबकारी नीति (New Excise Policy) बनाने की पूरी शक्ति और अधिकार है, इसमें कोर्ट हस्तक्षेप नहीं करेगा. दरअसल राज्‍य सरकार की नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं कोर्ट के समक्ष लंबित हैं.

    मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की खंडपीठ ने राजधानी में एल-7 लाइसेंसों को आगे न बढ़ाने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली अर्जी खारिज करते हुए कहा कि यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि परिवर्तन अपरिहार्य है. आबकारी नीति इस नियम का अपवाद नहीं है. नीतिगत मामलों में हमेशा नए प्रयोगों की अनुमति दी जाती है. प्रथम दृष्टया हम नई नीति के परिणाम और प्रभाव का पूर्व-आकलन नहीं करना चाहते हैं.

    दिल्ली सरकार ने कोर्ट में दी ये दलील
    दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, राहुल मेहरा और सरकारी वकील संतोष त्रिपाठी ने मामले की पैरवी की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि नई नीति राज्य के लिए एक ‘बोनांज़ा’ साबित हुई है, क्योंकि सरकारी राजस्व पिछले वर्ष के 5,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,500 करोड़ रुपये हो गया है. मेहरा ने कोर्ट को बताया कि वे महज 1,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लाभ की उम्मीद कर रहे थे.

    बता दें कि दिल्‍ली सरकार की नई आबकारी नीति को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं कोर्ट के समक्ष लंबित हैं. नई नीति 17 नवंबर से लागू होने वाली है. पिछली नीति के तहत एल-7 लाइसेंस का मतलब निजी क्षेत्र में भारतीय शराब के खुदरा विक्रेता और एल-10 का मतलब शॉपिंग मॉल और हवाईअड्डे पर शॉपिंग में भारतीय शराब और विदेशी शराब के खुदरा विक्रेता थे. सरकार ने 10 सितंबर को दोनों प्रकार के लाइसेंस को 30 नवंबर तक के विस्तार से बाहर कर दिया, जैसा कि कुछ अन्य लाइसेंस प्रकारों के लिए घोषित किया गया था.

    कोर्ट ने बुधवार को कहा कि नई नीति के तहत विभिन्न प्रकार के लाइसेंस हैं और सरकार 30 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से पिछले लाइसेंसों को बंद करने जा रही है. उसने कहा कि वह आवेदक के साथ सहमत नहीं था कि मानमाने ढंग से विस्तार दिया गया था. बेंच ने कहा, ‘नई आबकारी नीति के मद्देनजर, प्रतिवादी उन निजी दुकानों को बंद कर रहे हैं जिनके पास 2010 की नीति के तहत एल-7 और एल-10 लाइसेंस हैं. प्रथम दृष्टया यह मेकेनिज्म याचिकाकर्ता के किसी भी अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है.’

    Tags: DELHI HIGH COURT, Liquor Mafia, Liquor shop, New excise policy, Price of Liquor, Price of liquor in delhi

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