माता-पिता की देखभाल करना सभी बच्चों की जिम्मेदारी, नहीं हो सकता ड्यूटी का विभाजन: हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को कहा कि अभिभावकों की देखभाल उनके सभी बच्चों द्वारा की जानी चाहिए और उनके बीच ‘ड्यूटी का कोई विभाजन नहीं’ हो सकता है.
दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को कहा कि अभिभावकों की देखभाल उनके सभी बच्चों द्वारा की जानी चाहिए और उनके बीच ‘ड्यूटी का कोई विभाजन नहीं’ हो सकता है.

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को कहा कि अभिभावकों की देखभाल उनके सभी बच्चों द्वारा की जानी चाहिए और उनके बीच ‘ड्यूटी का कोई विभाजन नहीं’ हो सकता है.

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  • Last Updated: September 24, 2019, 9:57 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने मंगलवार को कहा कि अभिभावकों की देखभाल उनके सभी बच्चों द्वारा की जानी चाहिए और उनके बीच ‘ड्यूटी का कोई विभाजन नहीं’ हो सकता है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. एन. पटेल (Chief Justice D.N. Patel) और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने एक व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की. याचिका में वरिष्ठ नागरिक देखभाल न्यायाधिकरण के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उसे अपने माता-पिता को गुजारे भत्ते के रूप में प्रति माह 2,000 रुपए देने को कहा गया था.

याचिका में गुजारे भत्ते की तय राशि को दी गई थी चुनौती
दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा, ‘माता-पिता की देखभाल के लिए ड्यूटी का कोई विभाजन नहीं हो सकता. सभी पुत्रों/ बच्चों को अपने माता-पिता की देखभाल करनी चाहिए.’ याचिकाकर्ता ने दावा किया कि देखभाल न्यायाधिकरण और अपीली न्यायाधिकरण ने उसकी कथित खराब वित्तीय स्थिति पर गौर किए बिना गुजारे भत्ते की राशि तय कर दी. याचिका में दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी.

बहुत कम है 2,000 रुपए की रकम
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दोनों न्यायाधिकरणों के आदेश के साथ ही एकल न्यायाधीश के फैसले को भी चुनौती दी थी. एकल न्यायाधीश ने दोनों न्यायाधिकरणों के फैसलों को बरकरार रखा था. पीठ ने अपील को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपए बहुत कम रकम है और इसलिए इसमें किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.



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