दिल्‍ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की अर्जी पर मांगा जवाब, जानें क्‍या है मामला

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 अक्टूबर तय की है.
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 अक्टूबर तय की है.

दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (Chief of Bhim Army Chandrashekhar Azad) की अर्जी पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है. आजाद ने अदालत से बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) लड़ने के लिए निशान आवंटित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 11:41 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने बुधवार को चुनाव आयोग से भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद (Chief of Bhim Army Chandrashekhar Azad) की उस अर्जी पर जवाब मांगा जिसमें उन्होंने अदालत से आयोग को उनके राजनीतिक दल को ‘आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)’ के नाम से पंजीकृत करने और आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) लड़ने के लिए निशान आवंटित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है. न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने आयोग को नोटिस जारी कर उससे जवाब मांगा और इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 20 अक्टूबर तय की. इस अर्जी में आपत्ति दर्ज कराने की अवधि 30 दिनों से घटाकर सात दिन करने की भी दरख्वास्त की गयी है.

चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में कही ये बात
चंद्रशेखर ने अपनी याचिका में कहा है कि वह और पार्टी के कार्यकर्ता बिहार चुनाव और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में उपचुनाव में भाग लेने की गंभीर कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यदि आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 30 दिनों से नहीं घटायी जाती है तो वह पार्टी के नाम और निशान पर बिहार में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे. आयोग के वकील राजीव शर्मा ने यह कहते हुए इस याचिका का विरोध किया कि अन्य राजनीतिक दलों ने भी आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 30 दिनों से घटाने का अनुरोध किया था जिसे आयोग ने पहले ही खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि समय में एक बारगी ढील 2019 में दी गयी थी लेकिन अब इसे नहीं किया जा सकता है. याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता ने 16 मार्च को ही चुनाव आयोग में आवेदन दिया था और कुछ आपत्तियां दूर करने के चार अगस्त के पत्र के संदर्भ में उन्होंने 13 अगस्त को आयोग की सभी जरूरतें पूरी कीं.

यही नहीं, याचिका के मुताबिक जब पार्टी नाम के पंजीकरण का पत्र नहीं जारी किया गया तब याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय पहुंचे और सुनवाई से एक ही दिन पहले पार्टी के नाम की मंजूरी दी गयी. याचिकाकर्ता ने कहा कि आयोग के निर्देश के मुताबिक उन्होंने अपनी पार्टी के नाम के सिलसिले में 30 दिनों में आपत्तियों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के दो राष्ट्रीय एवं स्थानीय अखबारों में 25 सितंबर और 26 सितंबर को सार्वजनिक नोटिस छपवाये, लेकिन आयोग ने इसी बीच 25 सितंबर को बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी. (भाषा इनपुट)
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