दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को लगाई फटकार, COVID-19 टेस्टिंग कैपेसिटी पर उठाया सवाल

केजरीवाल सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट से फटकार.
केजरीवाल सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट से फटकार.

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने आरटी-पीसीआर परीक्षण को लेकर केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) से बड़ा सवाल पूछा है. 

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 1, 2020, 12:03 AM IST
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दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संकट के बीच दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) पर जमकर नाराजगी जाहिर की है. आरटी-पीसीआर परीक्षण में गड़बड़ी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई है. कोर्ट का कहना है कि आरटी-पीसीआर और अन्य माध्यम से दिल्ली में 15,000 परीक्षण की क्षमता है, फिर भी औसतन लगभग 11,000 परीक्षण / दिन ही टेस्ट किए जा रहे हैं. तो वहीं एक बार फिर 12वीं का रिज़ल्ट आने के बाद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार  अपने स्कूलों को लेकर खासी उत्साहित है. दिल्ली यूनिवर्सिटी और दूसरे कॉलेजों में उसके सवा लाख छात्र भारी पड़ेंगे ऐसे दावें किए जा रहे हैं. हर साल दिल्ली सरकार की कोशिशों के चलते 12वीं के रिज़ल्ट के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आ रहा है.

बात सीबीएसई  की हो या फिर प्री-बोर्ड एग्जाम की आंकड़े, सरकारी स्‍कूल प्राइवेट स्कूलों को भी पीछे छोड़ रहे हैं. इन आंकड़ों के पीछे डिप्टी सीएम और शिक्षामंत्री मनीष सिसौदिया बच्चों की लगन और स्कूल स्टाफ की मेहनत का ज़िक्र करते हुए ट्विटर पर ट्वीट की झड़ी लगा देते हैं.





बीजेपी ने ऐसे साधा निशाना
वहीं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली जल बोर्ड को निजी कंपनियों के हाथों में देने के लिए केजरीवाल सरकार आर्थिक संकट  का बहाना बना रही है. उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने पहले तो अपनी नाकामियों के चलते दिल्ली जल बोर्ड की ऐसी हालत कर दी उसके बाद बोर्ड को निजी हाथों में देना चाहती है. यही वजह है कि कभी मुख्यमंत्री केजरीवाल स्वयं तो कभी उनके मंत्री मीडिया के सामने आकर दलीलें दे रहे हैं. पूरी दिल्ली में पाइपलाइन बिछाने के अपने वादे को केजरीवाल सरकार 6 सालों में भी पूरा नहीं कर पाई और न ही दिल्ली वालों को साफ पानी मिल पा रहा है. केजरीवाल सरकार ने 6 सालों में सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें ही की हैं. एक काम तक नहीं किया.

ANI ने ये ट्वीट किया है 



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गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार के आने से पहले दिल्ली जल बोर्ड लगभग 176 करोड़ रुपए के मुनाफे में था और केजरीवाल सरकार आने के बाद लगभग 800 करोड़ रुपए के घाटे में आ गया है. केजरीवाल सरकार ने टैंकर माफिया को खत्म करने की बात कही थी, लेकिन टैंकर माफिया तो खत्म नहीं हो पाए, उलटा केजरीवाल सरकार के ही विधायक दिल्ली जल बोर्ड में टैंकर लगवाने के नाम पर करोड़ों के घोटाले में संलिप्त पाए गए. केजरीवाल सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड को कंगाल करके रख दिया है और अब इस बहाने निजी कंपनियों के साथ मिलकर दिल्ली जल बोर्ड का निजीकरण करने की साजिश कर रही है.
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