तीसरी लहर से बच्चों को बचाने का अलर्ट: इस तरह तैयार हो रहे अस्पताल, इन बातों का रखें ध्यान

कोरोना की संभावित 3rd वेव में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंकाओं को देखते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने उनके इलाज के लिए अलग से तैयारी शुरू कर दी.

कोरोना की संभावित 3rd वेव में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंकाओं को देखते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने उनके इलाज के लिए अलग से तैयारी शुरू कर दी.

कोरोना की संभावित 3rd वेव में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंकाओं को देखते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने उनके इलाज के लिए अलग से तैयारी शुरू कर दी. दिल्ली में बच्चों के अस्पताल चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय और कस्तूरबा गांधी अस्पताल को बच्चों के लिए तैयार किया जा रहा.  

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नई दिल्ली. कोरोना की संभावित 3rd वेव में बच्चों के अधिक संक्रमित होने की आशंकाओं को देखते हुए दिल्ली के सरकारी अस्पतालों ने उनके इलाज के लिए अलग से तैयारी शुरू कर दी. दिल्ली में बच्चों के अस्पताल चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय और कस्तूरबा गांधी अस्पताल को बच्चों के लिए तैयार किया जा रहा.  दिल्ली सरकार के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार सरकार ने तीसरी वेव में बच्चों में संक्रमण अधिक फैलने की संभावनाओं को देखते हुए बच्चों के इलाज की तैयारी के लिए अलग से स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है. यह बच्चों के इलाज के प्रबंधन की निगरानी करेगा.


 इसके साथ ही अस्पताल में बच्चों के लिए ऑक्सीजन बेड की भी व्यवस्था करने की तैयारियां शुरू हो चुकी है, ताकि किसी भी तरीके से ऑक्सीजन बेड की कमी न हो. हर बेड पर ऑक्सीजन का पॉइंट दिया जा रहा है और इसके साथ ही अस्पतालों में लगे ऑक्सीजन प्लांट को भी बड़ा करने की तैयारी है.चाचा नेहरू हॉस्पिटल की MS डॉ ममता के अनुसार पेरेंटस को बच्चों का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है उन्होंने बताया कि कैसे बच्चों को इस थर्डवेव से बचाया जा सकता है.

कोविड- से ठीक हुए बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत
डॉ ममता ने बताया कि जिन बच्चों को कोविड हुआ था उन बच्चों में 3-4 हफ्ते के बाद एक खास तरीके की बीमारी देखने के लिए मिल रही है, जिसे मेडिकल की भाषा में MISC ( multisystem inflammatory syndrom in children) कहते हैं. इसमें बच्चे को तेज बुखार आता है. शरीर पर लाल चकत्ते हो जाते हैं. कई बार आंखें लाल हो जाती हैं और इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बच्चों की किडनी हार्ट और ब्रेन पर असर करती है.  ऐसे में पेरेंट्स को पता रहना चाहिए कि बच्चे को अगर बुखार आता है या इस तरीके के लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

क्या-क्या रखें ध्यान

बच्चों को सही तरीके से मास्क पहनने की आदत डालें. हाथ धोने और  सैनिटाइजेशन की आदत डालें. हर दिन व्यायाम करने की आदत डालें.



बच्चों की डाइट का खास ख्याल रखें. बच्चों में किसी तरीके की एंजाइटी ना रखें और बच्चों को डर से दूर रखें.

बच्चों में सर्दी खांसी से शुरू होता है कोविड-19

डॉक्टर ममता ने बताया कि छोटे बच्चों में सर्दी खांसी नाक बंद होना उल्टी और मोशन के साथ प्रेजेंट होता है. एक बात का खास ख्याल रखें डॉक्टर से पूछे बिना कोई दवाई न दें. सिर्फ पेरासिटामोल का इस्तेमाल करें. अगर ज्यादा परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. बच्चे को अगर ज्यादा तेज बुखार हो ज्यादा सुस्ती नजर आए या फिर पेट में ज्यादा दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

बच्चों को हाइड्रेट रखें

डॉक्टर ममता ने बताया कि अगर बच्चे को किसी भी तरीके से बुखार आता है तो बच्चे की बॉडी में पानी की कमी न होने दें. उसे नरियल पानी हल्का गुनगुना गर्म पानी ताजा फलों का जूस पिलाते रहें.

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