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Delhi Hospitals: कहीं ठप ना हो जाए दिल्ली का हेल्थ सिस्टम? स्वास्थ्यकर्मियों ने दिल्ली सरकार को दी ये चेतावनी

स्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द से जल्द नहीं माना गया तो मजबूरन और कोई सख्त कदम उठाना पड़ेगा.

स्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द से जल्द नहीं माना गया तो मजबूरन और कोई सख्त कदम उठाना पड़ेगा.

Delhi Government Hospitals: स्वास्थ्य कर्मचारी यूनियन ने दिल्ली सरकार को चेतावनी दी है कि अभी तक स्वास्थ्य कर्मी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से मरीजों के हित में काम कर रहे हैं. लेकिन अगर उनकी मांगों को जल्द से जल्द नहीं माना गया तो मजबूरन और कोई सख्त कदम उठाना पड़ेगा. इसका बड़ा खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ सकता है जिसके लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरीके से जिम्मेदार होगा.

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    नई दिल्ली. दिल्ली में कोरोना संक्रमण (Coronavirus) की दूसरी लहर (Second Wave) में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की है. अब जब कोरोना की दूसरी लहर पर काबू पा लिया गया है और तीसरी लहर (Third Wave) के आने की प्रबल संभावना बनी हुई है. ऐसे में अब स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए दिल्ली सरकार (Delhi Government) से गुहार लगाई है.

    कर्मचारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार 6 सालों से कर्मचारियों की मांगों को लंबित रखे हुए हैं. सरकार के उदासीन रवैये के चलते अब स्वास्थ्य कर्मचारियों के पास आंदोलन को और तेज करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा है.

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    नेशनल पब्लिक हेल्थ एलाइंस (NPHA) के आह्वान पर दिल्ली के सभी अस्पतालों के लैब कैडर के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज तेज कर दी है. लैब कैडर का फाइनेंशियल अपग्रेडेशन 17 जुलाई 2015 से देने और दिल्ली सरकार में जल्द महंगाई भत्ता लागू करने के साथ-साथ जनवरी 2020 से एरियर सहित देने की मांग की है.



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    दिल्ली सरकार के इन अस्पतालों के कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता
    इस मौके पर लोक लोकनायक अस्पताल, जीबी पंत अस्पताल मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, जीटीबी अस्पताल, अंबेडकर अस्पताल, बाबू जगजीवन राम अस्पताल, गुरु गोविंद सिंह अस्पताल और दिल्ली के सभी अस्पतालों के लैब कैडर के कर्मचारियों के साथ- साथ अस्पताल की यूनियनों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई.

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    केंद्र सरकार के इन अस्पतालों के कर्मचारियों का भी मिला मांगों को समर्थन

    मांगों के समर्थन में केंद्र सरकार (Central Government) के कलावती सरण अस्पताल, एनआईसीडी ने भी मांगों का समर्थन किया है. इस  प्रदर्शन में डी.एम.टी.ई.ए और आई.एम.एल. टी.एफ ने विशेष रुप से हिस्सा लिया. दिल्ली की सभी यूनियन/ फैडरेशन/पैरामेडिकल यूनियन/लैब कैडर की यूनियन ने एनपीएचए की अगुवाई में एकजुट होकर बड़े स्तर पर आंदोलन करने की तैयारी कर रही है.

    सरकार से इन मांगों को जल्द पूरा करने की लगाई गुहार
    दिल्ली सरकार के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, लोकनायक, जीबी पंत अस्पताल में बड़ी संख्या में  कर्मचारियों ने एकत्र होकर मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है. इस मौके पर डीएमएलटीए के अध्यक्ष सुखपाल सिंह यादव और महासचिव रमेश कामरा ने कहा कि मांगों को सरकार लागू करने में देर कर रही है. 17 जुलाई, 2015 से अभी तक लागू नहीं किया गया है जबकि केंद्र सरकार में उसको लागू कर दिया गया. आई एम एल टी एफ के उपाध्यक्ष किशोर ने कहा कि सरकार में बैठे मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन के अलावा 6 साल में कुछ नहीं दिया.

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    दिल्ली रेडियोग्राफर यूनियन के अध्यक्ष भारत वीर और महासचिव दीपक कुमार ने दोनों मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि पैरामेडिकल के कैडर रिव्यू की मांग को सरकार अभी तक पूरा नहीं कर पा रही है. रेडियोयोग्राफर डेंटल हाइजीन, ऑक्यूपेशनल थैरेपिस्ट, ऑपरेशन थिएटर और बहुत से पैरामेडिकल का कैडर रिव्यू बहुत सालों से नहीं हुआ है. और सभी पैरामेडिकल कैडरो में पे- एनोमब्लिज को जल्द से जल्द दूर कराया जाना चाहिए.

    सालों से लंबित पड़ी हैं स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगे
    इस मौके पर नेशनल पब्लिक हेल्थ एलाइंस (स्टेट सेक्टर दिल्ली) अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि एक तरफ तो कोविड-19 (COVID-19) के दौरान अपनी जान को दांव पर लगाकर लोगों की सेवा करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों पर फूल बरसा कर और तालियां बजाकर उत्साहित किया जाता है. दूसरी तरफ उनकी लंबित मांगों को सालों से नहीं मानकर हतोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने सरकार से मांग की थी कोरोना काल उनकी सभी सेवाओं को देखते हुए मांगों को जल्द से जल्द पूरा कर लागू किया जाए.

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    यूनियन ने कहा-मरीजों को उठाना पड़ सकता है खामियाजा, सरकार होगी जिम्मेदार
    एमपीएचसी के अध्यक्ष ने सरकार को चेतावनी दी कि अभी तक स्वास्थ्य कर्मी अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से मरीजों के हित में काम कर रहे हैं. लेकिन अगर उनकी मांगों को जल्द से जल्द नहीं माना गया तो मजबूरन और कोई सख्त कदम उठाना पड़ेगा. इसका बड़ा खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ सकता है जिसके लिए सरकार और प्रशासन पूरी तरीके से जिम्मेदार होगा. उन्होंने कहा कि कर्मचारी पिछले 6 साल के लंबे समय से अपनी मांगों को पूरा करने के लिए आवाज उठाता रहा है.

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