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दिल्ली सरकार ने 13 संस्थानों का विलय कर विश्वविद्यालय बनाने का निर्णय लिया

दिल्ली सरकार की ओर से जारी वक्तव्य के अनुसार, इस निर्णय से शहर में कौशल शिक्षा में सुधार होगा.(File Photo)

दिल्ली सरकार की ओर से जारी वक्तव्य के अनुसार, इस निर्णय से शहर में कौशल शिक्षा में सुधार होगा.(File Photo)

इस विलय से कौशल पारिस्थितिकी तंत्र (Skill Ecosystem) और प्रभावी होगा तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

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नई दिल्ली. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने 13 सरकारी संस्थानों का मंगलवार को विलय कर ‘दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय’ बनाने का निर्णय लिया. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कहा, “दिल्ली सरकार हमारे युवाओं के लिए कौशल के अवसर बढ़ाने के प्रति प्रतिबद्ध है. इस विलय से कौशल पारिस्थितिकी तंत्र (Skill Ecosystem) और प्रभावी होगा तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.”

दिल्ली सरकार की ओर से जारी वक्तव्य के अनुसार, इस निर्णय से शहर में कौशल शिक्षा में सुधार होगा. बयान के अनुसार कैबिनेट ने छात्रों को कौशल अवसर मुहैया कराने और नए एवं उभरते क्षेत्रों में उनके रोजगार की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए पुष्प विहार में नए विश्व स्तरीय कौशल केंद्र की स्थापना की भी घोषणा की.

पत्थर रखने के लिए आमंत्रित करें
वहीं, कल खबर सामने आई थी कि दिल्ली के किराड़ी स्थित प्रेम नगर में नए सरकारी स्कूल  के निर्माण के लिए जमीन नहीं आवंटित करने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद दिलचस्प आदेश दिया है. स्कूल के लिए जमीन आवंटित करने की जानकारी पर जस्टिस नज्मी वजीरी की बेंच ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को कहा है कि निर्माण कार्य शुरू होने पर एडवोकेट अशोक अग्रवाल को नींव का पत्थर रखने के लिए आमंत्रित करें.
आवंटित करने में समस्या क्या


हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डीडीए ने बेंच को बताया कि स्कूल के निर्माण के लिए 26 फरवरी को भूमि आवंटित कर दिया गया है. बेंच ने इस पर दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि तीन महीने के अंदर स्कूल बनाने का काम शुरू किया जाए. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि वो एडवोकेट अशोक अग्रवाल से नींव का पत्थर रखवाए. वहीं मामले में पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने भूमि आवंटित नहीं करने पर डीडीए के उपाध्यक्ष की खिंचाई करते हुए पूछा था कि आखिर कोर्ट के आदेश के बावजूद भी स्कूल के लिए अभी तक जमीन क्यों नहीं आवंटित की गई. अदालत ने कहा था कि आखिर स्कूल के लिए जमीन आवंटित करने में समस्या क्या है.
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