दिल्ली: तीनों निगम के महापौर 13 हजार करोड़ की मांग को लेकर CM आवास के सामने धरने पर बैठे

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले के बाहर धरने देते तीनों निगम के मेयर.,
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले के बाहर धरने देते तीनों निगम के मेयर.,

दिल्ली (Delhi) के तीनों निगमों के महापौर सीएम अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) के निवास के सामने धरने पर बैठ गये हैं. महापौर (Mayor) निगम के बकाया 13,000 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं. तीनों महापौर का आरोप है कि उनकी बात कोई सुन नहीं रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2020, 2:14 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली(Delhi) में तीनों निगम के महापौर (Mayor) सीएम अरविंद केजरीवाल(CM ArvindKejriwal) के बंगले के बाहर धरने पर बैठ गये हैं. तीनों निगमों के मेयर (Mayor) निगम की बकाया राशि 13,000 करोड़ रुपय लेने के लिए सीएम के आवास पर पहुंचे हैं. निगम को राशि नहीं मिलने पर तीनों मेयर धरना दे रहे हैं. उनका आरोप है कि हम लोग धरना दे रहे हैं, लेकिन CM साहब अपने AC कमरे से बाहर नहीं निकल रहे हैं. मेयर कह रहे हैं कि सीएम साहब निगम के 13,000 करोड़ रुपये कब देंगे. 



पिछले महीने पैसों की कमी और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने के कारण दिल्ली नगर निगम ने काम रोक दिया था. तब भी निगम के महापौरों ने केजरीवाल सरकार पर फंड ना देने का आरोप लगाया था. नॉर्थ दिल्ली नगर मिगम के मेयर जय प्रकाश ने आरोप लगाया था कि लाखों निगमकर्मी कोरोना काल में सैनेटाइजेशन, साफ- सफाई के काम में जुटे हैं, वहीं दिल्ली सरकार उनका पैसा रोककर बैठी है.
मेयर जय प्रकाश का आरोप था कि पहली तिमाही में दिल्ली सरकार को 556 करोड़, दूसरी तिमाही का 1045 मिलाकर कुल 1600 करोड़ बाकी है. जबकि दिल्ली सरकार ने निगम को सिर्फ 400 करोड़ ही दिए हैं, लेकिन दिल्ली सरकार निगम के 1200 करोड़ रुपये की फाइल पर आलती-पालती मारकर बैठी है. दिल्ली सरकार ने अंतरिम बजट पेश करके उत्तरी दिल्ली नगर मिगम को 2 हजार 22 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया था.



वहीं दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष विकास गोयल ने कहा था कि दिल्ली सरकार ने निगम का कोई पैसा नहीं रोका है. पहली तिमाही का पूरा पैसा दिया जा चुका है. दूसरी तिमाही का भी जल्द ही दे दिया जाएगा. दिल्ली सरकार ने निगम को अब तक समय से पैसा दिया है. इसके अलावा उन्होंने दिल्ली सरकार से 3800 करोड़ का लोन भी लिया है. जिसका ब्याज भी नहीं दिया है. खुद निगमों का इंटरनल रेवेन्यू अकेले 18 हजार करोड़ का है. वो पैसा कहां जाता है? सारा करप्शन की भेंट चढ़ रहा है.
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