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प्रदूषण से बचने के लिए दिल्‍ली मेट्रो की पहल, राजधानी में लगाईं 14 एंटी स्‍मॉग गन

प्रदूषण से बचने के लिए दिल्‍ली मेट्रो की पहल, राजधानी में लगाईं 14 एंटी स्‍मॉग गन

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमआरसी एंटी स्‍मॉग गन लगा रहा है.

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए डीएमआरसी एंटी स्‍मॉग गन लगा रहा है.

Delhi Air Pollution: दिल्‍ली मेट्रो द्वारा निर्माण साइटों पर लगाई जा रहीं ये आधुनिकतम एंटी स्मॉग गनें 70 से 100 मीटर की दूरी तक हल्की फुहारें छोड़ने में कारगर हैं. ऐसे में एक एंटी स्मॉग गन 20,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र के लिए पर्याप्त मानी जाती है. वैसे दिल्‍ली में प्रदूषण के स्‍तर लगातार सुधार हो रहा है, बावजूद इसके यह 'खराब' श्रेणी में बना हुआ है.

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    नई दिल्‍ली. दिल्‍ली में वायु प्रदूषण (Delhi Air Pollution) स्‍तर अभी भी बढ़ा हुआ है, जिसके चलते लोगों को कई दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि वायु प्रदूषण से बचाव को लेकर दिल्‍ली मेट्रो एंटी स्‍मॉग गन का इस्‍तेमाल करने जा रहा है. दिल्‍ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन अपनी कंस्ट्रक्शन साइटों पर प्रदूषण से बचाव के विभिन्न उपायों के रूप में 14 एंटी स्मॉग गनों का इस्तेमाल कर रहा है, जो समय-समय पर निर्माण कार्यों से उत्पन्न होने वाले धूल-कणों के वातावरण में बिखराव को हल्की फुहारों से रोकेंगी.

    डीएमआरसी के मुताबिक, इस समय फेज-IV के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली मेट्रो की कुछ अन्य निर्माण परियोजनाओं के 12 सिविल कॉन्ट्रैक्ट चल रहे हैं. ये आधुनिकतम एंटी स्मॉग गनें 70 से 100 मीटर की दूरी तक हल्की फुहारें छोड़ने में कारगर हैं ऐसे में एक एंटी स्मॉग गन 20,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र के लिए पर्याप्त मानी जाती है.

    स्‍मॉग गनों के अलावा ऐसे भी घटा रही डीएमआरसी प्रदूषण 

    डीएमआरसी अपने निर्माण स्थलों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए एंटी स्मॉग गनों के नियमित इस्तेमाल के अलावा कई अन्य उपाय भी कर रही है. इन उपायों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बैरिकेडों की रोजाना सफाई की जाती है और किनारों से धूल साफ की जाती है. सभी निर्माण सामग्री को पूरी तरह से तिरपाल और अन्य सामानों से ढक कर रखा जाता है. साइटों से निकलने वाले वाहनों की उचित तरीके से सफाई की जाती है ताकि सड़कों पर धूल या मिट्टी न फैले. इसके साथ ही वाहनों में ले जाई जाने वाली सामग्री को भी पर्याप्त रूप से ढका जाता है.

    बता दें कि एंटी स्मॉग गनों के इस्‍तेमाल के दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि छिड़काव के लिए इस्तेमाल होने वाला पानी कॉलीफोर्म, वायरस और बैक्टीरिया रहित हो. अधिक प्रभाव छोड़ने के लिए 10 से 50 माइक्रो मीटर वाली बूंदों के आकार के लिए अच्छी क्वालिटी के नोज़ल उपयोग में लाए जाते है. निर्माण कार्यों के क्रमिक विस्तार के साथ आने वाले दिनों में निर्माण स्थलों पर ऐसी और एंटी स्मॉग गनें लगाई जाएंग. डीएमआरसी का पर्यावरण विभाग निरीक्षणों के द्वारा यह सुनिश्चित करता है कि साइटों पर ठेकेदार नियमित रूप से एंटी स्मॉग गनों का इस्तेमाल करते हों.

    2016 में दिल्‍ली मेट्रो ने पहली बार लगाई थीं गनें 

    पारंपरिक तौर पर, पूरे विश्व में कोयला और सीमेंट निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाता है. नवंबर, 2016 में, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीएमआरसी संभवतः पहली ऐसी निर्माण कंपनी बनी जिसने एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अपने निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया. निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन के आरंभिक इस्तेमाल पर प्राप्त फीडबैक के आधार पर, डीएमआरसी के चौथे चरण के विस्तार कार्यों के लिए कॉन्ट्रेक्ट में इनके इस्तेमाल को अनिवार्य कर दिया गया है.

    गौरतलब है कि अब दिल्ली सरकार ने भी प्रदूषण से बचाव के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सभी निर्माण एजेंसियों के लिए एंटी स्मॉग गनों का इस्तेमाल करना अनिवार्य कर दिया है. जल छिड़काव करने, नोज़ल इत्यादि के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं. चूंकि भारत का पूरा उत्तरी भूभाग, विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अक्टूबर से दिसंबर माह के दौरान गंभीर प्रदूषण की गिरफ्त में रहता है.

    निर्माण में ऐसे फैलता है प्रदूषण
    प्रमुख निर्माण स्थलों की ओर जाने वाली सभी सड़कों पर तारकोल की परत बिछाई जाती है और निर्माण कार्यों से निकलने वाले अपशिष्ट और मलबे को निर्धारित सीएंडडी रिसायकलिंग स्थलों पर रिसायकल किया जाता है. उक्त सामग्री के लोडिंग और अनलोडिंग में लगे श्रमिकों के लिए चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध रहती हैं. अपनी कार्य संस्कृति के एक अभिन्न अंग के तौर पर डीएमआरसी पर्यावरण के संरक्षण को उच्च प्राथमिकता देती है.

    Tags: Air pollution, Delhi Metro, Delhi Metro News, DMRC

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