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एक परिवार की तीन पीढ़ियां कर रही हैं भगवान की मूर्तियों का संग्रह, 50 वर्ष से अधिक पुरानी मूर्तियां मिलेंगी

घर पर मूर्तियों को छोटा संग्रहालय बना रखा है.

घर पर मूर्तियों को छोटा संग्रहालय बना रखा है.

परिवार की तीन पीढ़ियां भगवान की मूर्तियों का संग्रह कर रही हैं. परिवार में यह परपंरा 50 साल से अधिक समय से चली आ रही ...अधिक पढ़ें

नई दिल्‍ली. दिल्‍ली में रहने वाले एक परिवार की तीन पीढ़ियां भगवान की मूर्तियों का संग्रह कर रही हैं. परिवार में यह परपंरा 50 साल से अधिक समय से चली आ रही है. केवल चार मूर्तियों से शुरू किया गया सफर आज 500 से अधिक मूर्तियों तक पहुंच चुका है. दक्षिण भारत के ज्‍यादातर मंदिरों के भगवान की मूर्तियां इनके पास मौजूद हैं. इनके घर को मूर्तियों को छोटा संग्रहालय कहा जा सकता है.

वीणा वैद्यनाथ एक बैंक में काम करती हैं, वो बताती हैं कि उनकी मां वीणा वी ने मूर्तियों को संग्रह करने का काम शुरू किया था. उनकी मां की उम्र 76 वर्ष की है. हालांकि दक्षिण भारत में कुछ जगहों पर यह एक परंपरा भी है, लेकिन इन्‍होंने इस परंपरा को शौक बना लिया है. वो बताती हैं कि 50 वर्ष से अधिक पुरानी मूर्तियां उनके पास हैं. मां की उम्र बढ़ने के बाद वीणा ने स्‍वयं मूर्तियां इकट्ठा करना शुरू किया. अब इनकी तीसरी पीढ़ी राधिका रामचंद्रन भी मूर्तियां इकट्ठा कर रही हैं.

वे बताती हैं उनके पास दक्षिण भारत के ज्‍यादातर मंदिरों के भगवान मूर्तियां हैं. इनमें तिरुमाला, चिदंबरम, कांचीपुरम, अन्नावरम, सबरीमलाई समेत 500 से अधिक भगवान की मूर्तियां हैं. ये मूर्तियां दिल्‍ली में दक्षिण भारतीय मंदिर सर्किट को दर्शाती हैं. वे जिस भी मंदिर में दर्शन करने के लिए जाती हैं, वहां के भगवान की मूर्ति जरूर लाती हैं. अब मूर्तियों का संग्रह परंपरा के साथ साथ शौक बना गया है. वे बताती हैं कि पिछले 50 सालों में मूर्तियों की बनावट में किस तरह बदलाव हुआ है, यह सब यहां पर देखा जा सकता है.

वीणा के अनुसार नवरात्र के मौके पर मूर्तियों को सजाया जाता है. इस दौरान घर में उत्‍सव का माहौल रहता है. आसपास के तमाम लोगों को मूर्तियों के संग्रह की जानकारी है, वे नियमित रूप में दर्शन के लिए आते हैं.

Tags: New Delhi, New Delhi news, Temples

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