देश में अब तक न‍िकला है 38 हजार 680 मीट्रिक टन कोरोना मेडिकल वेस्ट, जानें क्‍या होता है इस कचरे का

देश मे कोरोना के चलते मेडिकल वेस्ट का निस्तारण सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है

देश मे कोरोना के चलते मेडिकल वेस्ट का निस्तारण सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है

Delhi News: दिल्ली निगम के कर्मचारी ने बताया क‍ि मरीज बढ़े तो कूड़ा भी उस हिसाब से बढ़ गया है. अप्रैल के महीने में कुछ ज्यादा कूड़ा आया. कभी 70 किलो, 75 किलो, 100 किलो और कभी 200 किलो भी आया. अब आज की डेट में ये 20-25 किलो पहुंच गया है.

  • Share this:

देश में कोरोना के चलते मेडिकल वेस्ट का निस्तारण सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है. अस्पतालों और घरों से कोरोना मरीजों के इस्तेमाल के बाद निकलने वाले कचरे का बोझ बढ़ गया है, जिसके निस्तारण के लिए पर्यावरण मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गाइडलाइन तय की है. इस गाइडलाइन को निभाने की जिम्मेदारी सरकार पर ही नहीं आम लोगों पर भी है. क्या है गाइडलाइन और किस तरह से जान जोखिम में डालकर मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा रहा है? देखिए NEWS 18 INDIA की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

कोरोना केस बढ़े हैं तो इसके कचरे का बोझ भी बढ़ा है. पीले रंग के बैग में डाल कचरा अस्पताल और घरों से प्लांट में पहुंचता है. जहां भारी भरकम मशीनों के ज़रिए इसको जलाया जा रहा है. इस कचरे का प्लांट तक पहुंचने का सफर यूं ही नहीं तय होता. घर और अस्पताल का ये कचरा अलग-अलग जगहों पर जमा होता है. फिर, प्लांट तक पहुंचाया जाता है.

दिल्ली निगम कर्मचारी शेखर ने बताया क‍ि कूड़ा जिस हिसाब से बढ़ जाता है, तो उस हिसाब से मरीज बढ़ गए. अप्रैल के महीने में कुछ ज्यादा कूड़ा आया. कभी 70 किलो, 75 किलो, 100 किलो और कभी 200 किलो भी आया. अब आज की डेट में ये 20-25 किलो पहुंच गया है.

क्‍या है कचरे को लेकर गाइडलाइंस?
इस मेड‍िकल वेस्‍ट को लेकर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले साल गाइडलाइन बनाई और इसको चार बार अपडेट भी किया गया है. कोरोना के मामले आने के बाद से अब तक 38 हजार 680 मीट्रिक टन कोविड मेडिकल वेस्ट पूरे देश से निकला है.

- इसमें सिर्फ इस साल मार्च से अब तक पूरे देश में 10 हजार 60 मीट्रिक टन कोरोना का मेडिकल वेस्ट निकला.

- इस साल फरवरी में जहां रोजाना औसतन 53 मीट्रिक टन ये कचरा निकलता था वहीं मई के महीने में ये बढ़कर रोजाना 226 मीट्रिक टन जा पहुंचा.



- पहली लहर में कम मामले आने के बावजूद ये मात्रा ज़्यादा थी, क्योंकि लोग इसमें फूड वेस्ट भी शामिल कर रहे थे.

- फिलहाल, इस कचरे में अव्वल महाराष्ट्र, केरल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान हैं.

जानें कैसे होती है देशभर में कचरे की न‍िगरानी

सीपीसीबी में वेस्ट मैनेजमेंट के डिविजनल हेड विनोद बाबू ने कहा क‍ि हम डेटा की निगरानी कर रहे हैं. एक ट्रैकिंग ऐप का उपयोग करके दिन-प्रतिदिन के आधार पर कोव‍िड 19 वेस्‍ट को ट्रैक क‍िया जाता है. इसे कोव‍िड BMW ट्रैकिंग ऐप कहा जाता है. इस ऐप का इस्तेमाल देश के 7200 कचरा सेंटर्स पर यूज क‍िया जाता है. दिन-प्रतिदिन के आंकड़े इस ऐप में डाले जाते हैं और हम अपशिष्ट उत्पादन के रुझानों की निगरानी कर रहे हैं.

जानें कैसे घरों से कचरा ढलाव तक पहुंचता है

घरों से सामान्य कचरा निकलता है तो उसे कलेक्ट करने और उसे ढलाव तक ले जाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है, लेकिन कोविड के बाद ये जिम्मेदारी बढ़ गयी है. निगम के कर्मचारी पीपीई पहनकर घरों से कोविड का कचरा कलेक्ट कर रहे हैं और उसे अलग-अलग सेंटर पर ले जाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं. उन सेंटर से कोरोना के कचरे को कलेक्ट करने का जिम्मा बायोटिक वेस्ट लिमिटेड कंपनी के पास है. ये कंपनी 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब की दर से कोविड का कचरा कलेक्ट कर रही है और फिर उसे कंपनी में ले जाकर इसे नष्ट करती है, लेकिन कंपनी की शिकायत है कि समय से पैसा नहीं मिलता. कोविड के बढ़ते केस के चलते दिल्ली में साफ सफाई का ज़िम्मा देखने वाले नगर निगम पर काम का बोझ बढ़ गया है. जिसे पूरा करने में कई चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है.

नॉर्थ एमसीडी के मेयर जय प्रकाश ने कहा क‍ि छोटे-छोटे एरिया में जाकर बायो मेडिकल वेस्ट उठाना और साइट तक पहुंचाना और उसका निस्तारण बड़ी चुनौती थी. इसके लिए हमने कोव‍िड हेल्पलाइन नंबर 18008008527 जारी क‍िया. उन्‍होंने बताया क‍ि घरों से निकलने वाली इस गंदगी तक कोरोना का कचरा न पहुंचे इसके लिए सावधानी बरती जा रही है. क्योंकि कोविड के कचरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता है और अगर हल्के में लिया तो बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है.

Corona Chemical Waste, Medical Waste, Mask, Central Pollution Control Board, Ministry of Environment, Delhi News

कोविड के कचरे को लेकर सावधानी जरूरी है, लेकिन इसके साथ उन लोगों को भी सतर्कता बरतना चाहिए जो कोरोना के मरीज नहीं हैं. कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए हैंड सैनेटाइजर, साबुन, मास्क, ग्लब्स और सामाजिक दूरी जैसे नियमों का पालन करना जरूरी है. इस बात का भी ध्यान देने की जरूरत है कि मास्क कैसे पहने. इसका तरीका क्या हो? जानकारों के मुताबिक, अपनी नाक, मुंह और ठोड़ी के ऊपर मास्क लगाएं और सुनिश्चित करें कि मास्क के दोनों ओर कोई गैप ना हो, ठीक से फिट करें.

-मास्क का इस्तेमाल करते वक्त मास्क को छूने से बचें.

-मास्क को गर्दन पर लटकता हुआ ना छोड़ें.

-मास्क को उतारते वक्त मास्क की गंदी बाहरी सतह को न छुएं.

-मास्क को हटाने के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी या अल्कोहल आधारित सैनेटाइजर से धोएं.

-मास्क के गीला होने पर या हर छह घंटे में मास्क को बदलते रहें.

-डिस्पोजेबल मास्क का दोबारा इस्तेमाल ना करें.

मास्क और ग्लब्स का निस्तारण भी सावधानी से करना चाहिए. जब आपका मास्क का इस्तेमाल पूरा हो जाए तो इसे पहले एक कागज के थैले में लपेटें और फिर बंद कूड़ेदान में ही डालें. इसे आम कूड़े में या खुले में ना फेंके क्योंकि इससे संक्रमण फैलने का काफी खतरा होता है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज