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Exclusive: भारतीय रेलवे में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गैंग का पर्दाफाश

दिल्ली पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

दिल्ली पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

Delhi News: डीसीपी दीपक यादव के मुताबिक गैंग का मुख्य आरोपी दयानंद सरस्वती उर्फ अमित बिहार के सासाराम का रहने वाला है. इसके पिता भभुआ इलाके में स्थित ग्रामीण बैंक के पूर्व मैनेजर रह चुके हैं. आरोपी दयानंद सरस्वती 12वीं क्लास तक पढ़ा है

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नई दिल्ली. नई दिल्ली जिला पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है, जो एक संगठित (Organized racket) और साजिश के तहत कई राज्यों के युवाओं को रेलवे में सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा (Indian Railways) देकर कई दर्जन लोगों को अब तक ठग चुका है. नई दिल्ली जिला अंतर्गत संसद मार्ग थाना पुलिस (PS Parliament Street) की टीम ने कार्रवाई को अंजाम देते हुए सुनील कुमार उर्फ अमित और दयानंद सरस्वती उर्फ अमित नाम के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है. इसके साथ ही नौकरी का झांसा देने वाले इस गैंग के दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है. जो इस साजिश को अंजाम देने और सहयोग करने में शामिल था. नई दिल्ली के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक दोनों अन्य आरोपियों का नाम सुखराज सिंह उर्फ सनी उर्फ लव सिंह और अमर कुमार है. इन लोगों से गिरफ्तारी करने के बाद संसद मार्ग थाना पुलिस अब आगे विचार से पूछताछ कर रही है.

ये कहानी एकदम फिल्मी जैसी है, क्योंकि इस साजिश को अंजाम देने वाले आरोपियों द्वारा फिल्मी स्टाइल में पूरे वारदात को अंजाम दे रहे थे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह अपराधी युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर सिर्फ झांसा नहीं देते थे, बल्कि दिल्ली स्थित जो कुछ छोटे स्टेशन होते थे, वहां पर उन युवाओं को ले जाकर रेलवे स्टेशन पर ही उसकी ट्रेनिंग भी करवाते थे, जिसे देखने के दौरान आम लोगों को भी ऐसा लगता होगा कि मानो किसी फिल्म की शूटिंग हो रही हो या वाकई में उन लोगों की ट्रेनिंग चल रही हो. इसी वजह से न तो रेलवे प्लेटफार्म पर कार्यरत किसी रेलवे अधिकारियों/कर्मचारियों या आम यात्रियों को शक भी नहीं होता था. यहां तक कि पीड़ित शिकायतकर्ता को भी कोई शक तब तक नहीं हुआ.

दिल्ली स्थित रेलवे स्टेशन पर नकली रेलवे कर्मचारियों की हुई दो महीने की ट्रेनिंग
संसद मार्ग थाना में इसी साल 26 जुलाई को एक शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि कि उसे रेलवे में टिकट कलेक्टर (TC in Indian Railway) बनवाने का झांसा दिया गया था . इसके लिए दोनों पक्षों के बीच पैसों की लेनदेन संबंधी तमाम बातों पर सहमति भी बनी, उसके बाद आरोपियों द्वारा उसके दस्तावेज की कॉपी मंगवाई गई ,मेडिकल टेस्ट लिया गया और दिल्ली स्थित राजेंद्र नगर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म पर उसे ले जाकर बकायदा करीब दो महीनों की ट्रेनिंग भी दी गई.

नई दिल्ली जिला के डीसीपी दीपक यादव के सुपरविजन में हुआ खुलासा
रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले गैंग को पकड़ना बेहद चुनौती भरा था. क्योंकि ये गैंग बेहद सतर्कता से कई राज्यों के रेलवे स्टेशन पर इस तरह से फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था. तफ़्तीश के दौरान हल्की सी भी लापरवाही या असावधानी इस पूरे जांच को प्रभावित कर सकता था. लिहाजा डीसीपी दीपक यादव, एडिशनल डीसीपी सुधांशु धामा और एसीपी दिनेश कुमार के नेतृत्व में संसद मार्ग थाना के एसएचओ अजय करन शर्मा ,सब इंस्पेक्टर राज किरण ,सिपाही राजेश कुमार को तफ़्तीश की जिम्मेदारी सौंपी गई ,उसके बाद तफ़्तीश के दौरान सबसे पहले आरोपी सुखराज सिंह उर्फ सनी उर्फ लव सिंह को गिरफ्तार किया गया, गिरफ्तारी के बाद आरोपी सुखराज सिंह ने इस बात को कबूल किया कि वह इस गैंग के लिए क्लाइंट को ढूंढने का काम करता था, उसके बाद उस क्लाइंट को वह बिहार में रहने वाले अमित नाम के शख्स के पास भेज देता था.

इस मामले की जानकारी मिलने के बाद संसद मार्ग थाना पुलिस बिहार पहुंची और बिहार में कई अलग-अलग लोकेशन पर छापेमारी के बाद पटना से इस गैंग के मुख्य आरोपी दयानंद सरस्वती उर्फ अमित कुमार और अमित उर्फ सुनील सहित कुल 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के वक्त तफ़्तीश के दौरान इन लोगों के पास से भारतीय रेलवे संबंधित काफी महत्वपूर्ण फर्जी दस्तावेज, रेलवे से संबंधित रबर की स्टाम्प बरामद किया गया, जो देखने में एकदम ओरिजनल डॉक्यूमेंट जैसे थे, एक नजर में रेलवे के अधिकारी भी उसे नकली नहीं बता सकते थे.

दिल्ली पुलिस की टीम ने बिहार से आरोपियों को किया गिरफ्तार
डीसीपी दीपक यादव के मुताबिक गैंग का मुख्य आरोपी दयानंद सरस्वती उर्फ अमित बिहार के सासाराम का रहने वाला है. इसके पिता भभुआ इलाके में स्थित ग्रामीण बैंक के पूर्व मैनेजर रह चुके हैं. आरोपी दयानंद सरस्वती 12वीं क्लास तक पढ़ा है और यह पहले भी झारखंड स्थित जमशेदपुर में टिस्को कंपनी (TISCO, Jamshedpur )में नौकरी दिलाने का झांसा देने मामले में इसका नाम सामने आया था, लेकिन उसके बाद ये फरार चल रहा था. इसके खिलाफ झारखंड ,बिहार में कई मामले पहले से दर्ज थे. लिहाजा अब उन तमाम पुराने मामलों से संबंधित पूछताछ की जा रही है. इसके साथ ही इस गैंग का दूसरा मास्टरमाइंड अमर कुमार उर्फ अमरनाथ के बारे में ये जानकारी मिली कि यही वो आरोपी है. जो पूरे विश्वास के साथ फिल्मी अंदाज में सरकारी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर फर्जी तरीके से बनाए गए यानी ठगे गए उन रेलवे कर्मचारी को ट्रेनिंग करवाकर उसे पूरा विश्वास दिलाता था कि आपकी नौकरी पक्की हो चुकी है,लेकिन कुछ महीनों की ट्रेनिंग आवश्यक है.

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