क्‍या द‍िल्‍ली के सीएम ने क‍िया है त‍िरंगे का अपमान? केन्‍द्रीय मंत्री ने LG को ल‍िखे पत्र में लगाया यह बड़ा आरोप

द‍िल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरव‍िंंद केजरीवाल पर लगा त‍िरंगे के अपमान का आरोप

द‍िल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरव‍िंंद केजरीवाल पर लगा त‍िरंगे के अपमान का आरोप

Delhi News: केन्‍द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह ने पत्र में लिखा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बैकग्राउंड में जो तिरंगा दिखाया जा रहा है, उसमें ऐसा प्रतीत होता है कि सफेद रंग के भाग को कम करके हरे रंग को ज्यादा दिखाया जा रहा है.

  • Share this:

केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर बड़ा आरोप लगाया है. प्रह्लाद पटेल ने अरविंद केजरीवाल और और दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को चिट्ठी लिखकर तिरंगे के अपमान की शिकायत की है.

केन्‍द्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आजकल जो प्रेसवार्ता कर रहे है, उसमें तिरंगे का इस्तेमाल सजावट की तरह किया जा रहा है. प्रहलाद सिंह ने पत्र में लिखा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बैकग्राउंड में जो तिरंगा दिखाया जा रहा है, उसमें ऐसा प्रतीत होता है कि सफेद रंग के भाग को कम करके हरे रंग को ज्यादा दिखाया जा रहा है. प्रह्लाद पटेल ने लिखा की यह राष्ट्रीय ध्वज संहिता का उल्लंघन है और दिल्ली के मुख्यमंत्री भारतीय तिरंगे का अपमान कर रहे हैं.

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज संहिता

भारतीय ध्वज संहिता भारतीय ध्वज यानी तिरंगे को फहराने और प्रयोग करने के नियम को बताता है. इस नियम में 2002 में बड़ा बदलाव हो चुका है. 'झंडा संहिता-भारत' के स्थान पर 'भारतीय झंडा संहिता, 2002' को 26 जनवरी, 2002 से लागू किया गया है.
इंडियन फ्लैग कोड को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहले हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज के आकार और निर्माण के बारे में नियमों का उल्लेख है. दूसरे हिस्से में आम लोग, निजी संगठनों, शैक्षिक संस्थानों द्वारा झंडा फहराने और रखरखाव आदि से संबंधित नियमों का उल्लेख है. तीसरे हिस्से में केंद्र एवं राज्य सरकार और उनके संगठन एवं एजेंसियों द्वारा झंडा फहराने एवं इसके रखरखाव से जुड़े नियमों का उल्लेख किया गया है.

भारत का कोई भी व्यक्ति, कोई भी शिक्षा संस्थान, कोई भी गैर सरकारी संगठन राष्ट्रीय झंडे को सभी दिन और अवसरों पर फहरा सकता है. लेकिन उसे झंडे की मर्यादा रखने और उसके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए. राष्ट्रीय झंडे का निर्माण हाथ से काते गए और हाथ से बुने गए धागे या ऊन या सिल्क या खादी के कपडे का बना हुआ होना चाहिए.

भारत के राष्ट्रीय झंडे में सामान चौड़ाई वाली अलग-अलग रंगों की तीन पट्टियां होती हैं. ध्वज की सबसे ऊपर की पट्टी का रंग भारतीय केसरिया होगा और सबसे नीचे की पट्टी का रंग भारतीय हरा होगा. झंडे के मध्य भाग की पट्टी का रंग सफ़ेद और इसमें नीले रंग का एक अशोक चक्र होगा, जिसमें 24 तीलियां होंगी और ये सभी तीलियां एक दूसरे से समान दूरी पर स्थित होंगी.



भारत के राष्ट्रीय झंडे का आकार आयताकार होगा. झंडे की लम्बाई और चौड़ाई (ऊंचाई) का अनुपात 3:2 होगा. झंडे का आकार भी इस बात पर निर्भर करेगा कि उसको कहां पर इस्तेमाल किया जाना है. वीवीआईपी व्यक्तियों को ले जाने वाले हवाई जहाजों पर 450x300 मिमी. आकार के झंडे का इस्तेमाल किया जाना चाहिये जबकि 225x150 मिमी. आकार के झंडे का प्रयोग वीवीआईपी व्यक्तियों की कारों में होना चाहिए और मेज पर लगाये जाने वाले झंडों का आकार 150x100 मिमी. का होना चाहिए.

झंडे का प्रयोग व्यावसायिक उद्देश्‍यों के लिए नही किया जाना चाहिए. किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए झंडे को नहीं झुकाया जाना चाहिए. झंडे का प्रयोग किसी वर्दी या पोशाक में नहीं किया जाना चाहिए, ना ही झंडे को रुमाल, तकियों या किसी अन्य ड्रेस पर मुद्रित किया जाना चाहिए.

झंडे के केसरिया रंग को जानबूझकर नीचे की तरफ करके नहीं फहराया जाना चाहिए. झंडे का प्रयोग किसी भवन में पर्दा लगाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.

राष्ट्रीय ध्वज के अनादर पर सजा

झंडे का किसी तरह से अनादर करने की स्थिति में प्रीवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नैशनल ओनर ऐक्ट, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) के तहत सजा का प्रावधान है. इस कानून में 2003 में संशोधन किया गया. इसके तहत पहली बार जुर्म करने पर 3 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। दोबारा जुर्म करने पर कम से कम एक साल सजा का प्रावधान है.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज