स्‍कूल फीस विवाद: दिल्‍ली CM केजरीवाल और LG को भेजा 3000 अभिभावकों का सर्वे, HC में पक्ष रखने की मांग

दिल्‍ली के प्राइवेट स्‍कूलों की फीस को लेकर अभिभावक विरोध जता रहे हैं.

दिल्‍ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्‍यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि दिल्ली पेरेंट्स को शिक्षा विभाग के एक आर्डर के तहत ट्यूशन फीस, वार्षिक चार्ज और डेवलपमेंट फीस 15 फीसदी कटौती के साथ साल 2020-21 और 2021-22 के लिए स्‍कूलों में जमा करानी है. जिसके कारण मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है.

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    नई दिल्‍ली. दिल्‍ली पेरेंट्स एसोसिएशन (Delhi Parents Association) ने दिल्‍ली के  मुख्यमंत्री केजरीवाल और अनिल बैजल को पत्र लिखकर 3000 पेरेंट्स द्वारा भरा गया गूगल फॉर्म भेजा है. इसमें 98 फीसदी अभिभावकों ने कोरोनकाल में प्राइवेट स्‍कूलों की ओर से मांगे जा रहे  एरियर का विरोध किया है. साथ ही सभी अभिभावकों का कहना है कि 12 जुलाई को दिल्‍ली हाईकोर्ट में फीस मामले पर होने वाली सुनवाई में दिल्‍ली सरकार अभिभावकों के पक्ष को दृढ़ता से रखे.

    हाल ही में डीपीए (DPA) ने दिल्‍ली के सभी अभिभावकों से गूगल फॉर्म (Google Form) में अपना पक्ष रखने की अपील की थी. जिसमें अभी तक तीन हजार अभिभावक अपना मत फीस  को लेकर रख चुके हैं. इसमें 90 फीसदी अभिभावकों ने माना है कि दिल्‍ली शिक्षा विभाग (Delhi Education Department) हाईकोर्ट की एकल बैंच के सामने अभिभावकों का पक्ष रखने में विफल रहा है. साथ ही 98 फीसदी अभिभावक यह भी मानते हैं कि कोरोनाकाल में केवल 15 फीसदी की छूट देकर एरियर के नाम पर मांगी जा रही मोटी रकम पूरी तरह गलत है.

    दिल्‍ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्‍यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि दिल्ली पेरेंट्स को शिक्षा विभाग के एक आर्डर के तहत ट्यूशन फीस, वार्षिक चार्ज और डेवलपमेंट फीस 15 फीसदी कटौती के साथ साल 2020-21 और 2021-22 के लिए स्‍कूलों में जमा करानी है. जिसके कारण मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है.



    उन्‍होंने कहा कि अभिभावकों की ओर से बताई कई परेशानी के बाद डीपीए ने एक फॉर्म में अपना पक्ष रखने के लिए कहा ताकि आम लोगों की आवाज को सरकार तक पहुंचाया जा सके. इसके बाद कुछ ही घंटों में लगभग 3000 पेरेंट्स ने गूगल फॉर्म भरकर ली जा रही फीस को लेकर विरोध जताया है. आज स्‍कूल उन मदों की भी फीस मांग रहे हैं जिनकी सुविधाएं बच्‍चों को कोरोना काल में नहीं दी गईं.

    ऐसे में 12 जुलाई को हाईकोर्ट की डबल बैंच के सामने हो रही सुनवाई में अभिभावकों की इस मांग को जोर देकर रखा जाए. ताकि अभिभावकों और बच्‍चों को कोर्ट से राहत मिल सके.

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