लॉकडाउन में ढील के बाद दिल्‍ली में उठी स्‍कूल खोलने की मांग तो विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

दिल्‍ली में स्‍कूल खोलने की मांग पर विशेषज्ञों का कहना है कि यह नुकसानदायक हो सकता है.

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर ये मांग की गई है कि राजधानी में स्‍कूल भी खोले जाने चाहिए. एसोसिएशन का कहना है कि जब दिल्‍ली में कोरोना के मामले काफी कम हो गए हैं साथ ही अन्‍य सभी कामों को खोला जा रहा है तो स्‍कूल भी खुलने चाहिए.

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    नई दिल्‍ली. कोरोना के बाद हुए लॉकडाउन को धीरे-धीरे खोलने की कोशिश की जा रही है. कोरोना की दूसरी लहर से मची तबाही और तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए दिल्‍ली में भी कल यानी सोमवार से बाजार और पार्क आदि को खोला जा रहा है. हालांकि अभी भी 28 जून तक स्‍कूल सहित शिक्षण संस्‍थानों को बंद करने का फैसला लिया गया है.

    दिल्‍ली सरकार के इस फैसले के बाद अब दिल्‍ली के स्‍कूलों को खोलने की मांग की जा रही है. ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन की ओर से दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल और मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर ये मांग की गई है कि राजधानी में स्‍कूल भी खोले जाने चाहिए. एसोसिएशन का कहना है कि जब दिल्‍ली में कोरोना के मामले काफी कम हो गए हैं साथ ही अन्‍य सभी कामों को खोला जा रहा है तो स्‍कूल भी खुलने चाहिए.

    इस बारे में आईपा के अध्‍यक्ष और दिल्‍ली हाईकोर्ट के एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने सभी अभिभावकों की ओर से मांग की है कि दिल्‍ली में सरकार और एमसीडी के स्‍कूलों में लगे वैक्‍सीनेशन कैंप और राशन शिविरों को हटाया जाए. इनके लिए कहीं और व्‍यवस्‍था की जाए. साथ ही बच्‍चों की पढ़ाई को लेकर सरकार गंभीरता दिखाए और सुरक्षा उपायों के साथ बच्‍चों की फिजिकल कक्षाएं शुरू की जाएं.

    एडवोकेट अग्रवाल कहते हैं कि अभी तक के आंकडों के अनुसार दिल्‍ली में मार्च 2020 से मई 2021 तक करीब चार लाख बच्‍चों ने स्‍कूलों से नाम कटा लिया है या फीस न भरने के चलते उनका नाम काट दिया गया है. दिल्‍ली के स्‍कूलों में करीब 25 लाख छात्र पढ़ते हैं लेकिन पिछले साल से पढ़ाई बाधित होने के साथ ही बच्‍चों के उत्‍पीडन और बाल श्रम की शिकायतें भी बढ़ी हैं.

    एलजी से मांग करते हुए अभिभावकों ने कहा है कि दिल्‍ली सरकार और एमसीडी स्‍कूल के शिक्षकों को भी वैक्‍सीनेशन या राशन बांटने के काम से हटाकर शिक्षण में वापस लगाना चाहिए ताकि बच्‍चों को शिक्षा मिल सके.

    क्‍या कहते हैं स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ

    हालांकि स्‍कूलों को खोले जाने को लेकर स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों की अलग राय है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञ स्‍कूलों को अभी कम से कम छह महीने और न खोलने की सलाह दे रहे हैं. साथ ही कह रहे हैं कि अगर तीसरी लहर आई और थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो हालात को संभालना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में सरकार लोगों की मांग न मानकर हालात का जायजा करने के बाद ही कोई फैसला ले तो बेहतर रहेगा. हालांकि पढ़ाई के नुकसान को रोकने के लिए कई उपाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं.

    एनसीडीसी से रिटायर्ड पब्लिक हेल्‍थ एक्‍सपर्ट डॉ. सतपाल कहते हैं कि अभी कम से कम छह महीने तक स्‍कूल नहीं खोले जाने चाहिए. कोरोना की तीसरी संभावित लहर का खतरा अभी बरकरार है. अगले डेढ़ से दो महीने में तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है. अगर यह दिल्‍ली में आई तो उसे रोकना और नियंत्रित कर पाना मुश्किल होगा. वहीं अगर इसकी चपेट में बच्‍चे आए तो बहुत ही खतरनाक हालात पैदा हो जाएंगे. ऐसे में कम से कम दिसंबर तक स्‍कूल न खोले जाएं. बल्कि सरकारों को अभी छह महीने और ऑनलाइन पढ़ाई की व्‍यवस्‍था करनी चाहिए क्‍योंकि एक भी जान बहुत कीमती है.

    डॉ. सतपाल कहते हैं कि सरकारों को लंबी अवधि की योजनाओं पर काम करना चाहिए. बजाय इसके कि केस कम होने और लोगों की भारी मांग पर सभी खोल दिया जाए. अगर चीजें खोली भी जा रही हैं तो उन्‍हें 24 घंटे में इस तरह बांटें कि किसी भी समय भीड़ का पीक आवर न रहे यानी कि किसी एक समय में भीड़ न जुटे. इसके लिए समय प्रबंधन करना होगा.

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