दूसरे मजहब की लड़की से बात करने पर राहुल की हत्या मामले में दिल्ली पुलिस ने शुभम भारद्वाज को पकड़ा

18 वर्षीय राहुल राजपूत की दोस्ती दूसरे धर्म की एक लड़की से थी, यह बात लड़की के घरवालों को नागवार गुजरी और उन्होंने सरेआम पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी (फाइल फोटो)
18 वर्षीय राहुल राजपूत की दोस्ती दूसरे धर्म की एक लड़की से थी, यह बात लड़की के घरवालों को नागवार गुजरी और उन्होंने सरेआम पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी (फाइल फोटो)

गौरतलब रहे कि इस मामले को लेकर बीजेपी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस (Congress) पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

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  • Last Updated: October 14, 2020, 10:33 AM IST
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नई दिल्ली. दूसरे मजहब की लड़की से दोस्ती और बात करने के चलते कुछ दिन पहले दिल्ली में राहुल नाम के छात्र का मर्डर (Rahul Murder Case) हो गया था. आरोप है कि लड़की के घर वालों ने राहुल की पिटाई की थी, जिसके चलते उसकी मौत हो गई. इस मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने शुभम भारद्वाज नाम के छात्र को गिरफ्तार किया है. जबकि इससे पहले पहले भी पुलिस तीन नाबालिगों को हिरासत में लेने के साथ तीन अन्य को गिरफ्तार कर चुकी है. गौरतलब रहे कि इस मामले को लेकर बीजेपी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस (Congress) पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

ट्यूशन की बात करने घर से बुलाया और कर दी पिटाई

जानकारी के अनुसार, 18 साल का राहुल आदर्श नगर इलाके में रहता था. वह डीयू के एसओएल से बीए सेकंड ईयर की पढ़ाई करने के साथ ही ट्यूशन पढ़ाता था, जबकि उसके पिता संजय पेशे से ड्राइवर हैं. राहुल की मां रेनू ने बताया कि घटना के दिन 7 अक्टूबर को राहुल को फ़ोन करके ट्यूशन की बात करने घर से बुलाया गया था. घर से कुछ दूरी पर राहुल के साथ मारपीट की गयी. राहुल को इतना ज्यादा पीटा गया कि राहुल की मौत हो गयी. राहुल की मां ने बताया कि राहुल ट्यूशन पढ़ाता था.



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दिल्ली पुलिस पर यह लगे हैं आरोप

एक प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाते हुए आप विधायक और पार्टी प्रवक्ता सौरभ ने कहा था कि राहुल की हत्या के वक्त लड़की वहां मौजूद थी. जिस वक्त राहुल को पीटा जा रहा था तो लड़की ने दिल्ली पुलिस से भी मदद मांगी थी. वहीं जब लड़की लगातार पत्रकारों से बात कर रही थी, तो दिल्ली पुलिस ने पहुंचकर उसके मोबाइल का सिमकार्ड ही तोड़ दिया है.

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस को कुछ करना ही था तो उस दिन राहुल की मदद करती. अगर उस दिन पुलिस ने लड़की द्वारा मदद मांगने पर मदद की होती तो आज राहुल जिंदा होता. लड़की हाथ जोड़ती रही, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पसीजा. फिर जब घटनास्थल पर 8-10 लोग थे तो पुलिस ने सिर्फ 5 लोगों को ही नामजद क्यों किया.
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