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जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने साकेत कोर्ट में दायर की एक्शन टेकेन रिपोर्ट

जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल कर दी है. (फाइल फोटो)
जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल कर दी है. (फाइल फोटो)

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने जामिया हिंसा (Jamia Violence) के मामले में एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल कर दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 16, 2020, 3:42 PM IST
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नई दिल्ली. जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी (Jamia Milia University) में हिंसा और पुलिस लाठीचार्ज के मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट दाखिल कर दी है. दिल्ली पुलिस ने एक्शन टेकेन रिपोर्ट में लिखा है कि, 15 दिसंबर 2019 को उन्हें जानकारी मिली थी कि जामिया यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 7 पर CAA और NRC के खिलाफ आम लोग, छात्र, पूर्व छात्र, स्थानीय नेता और स्थानीय लोग इकट्ठा होंगे और प्रदर्शन करेंगे. पार्लियामेंट की तरफ मार्च करेंगे. दोपहर करीब 2.20 से 3 बजे के बीच करीब 3500 लोग इकट्ठा हुए थे.

लाठी, पत्थर, ट्यूब लाइट्स और पेट्रोल बम लिए हुए थे प्रदर्शनकारी
पुलिस के मुताबिक, बजाय शांतिपूर्ण प्रदर्शन के इरादा कुछ और लग रहा था. भीड़ उकसाने वाले नारे लगा रही थी. लॉ एंड आर्डर को बनाए रखने के लिए एन्टी रायट स्टाफ को वहां नियुक्त किया गया. भीड़ अपने हाथ में लाठी, पत्थर, ट्यूब लाइट्स और पेट्रोल बम लेकर एस्कॉर्ट हॉस्पिटल की तरफ बढ़ रही थी. दोपहर 3.40 बजे बजाए पीछे जाने को प्रदर्शनकारी माता मंदिर रोड पहुंच गए और कई जगहों पर गमलों के द्वारा सड़क जाम कर दिया.

रणनीति के तहत भीड़ जामिया में घुस गई
भीड़ ने डीटीसी बस, प्राइवेट कार और बाइक को आग के हवाले कर दिया. इसके बाद पुलिस ने गोली चलने की आवाज सुनी. कोई उपाय न देख कर पुलिस ने टीयर गैस का इस्तेमाल किया ताकि भीड़ को पीछे धकेला जा सके. भीड़ पीछे हटी, लेकिन एक रणनीति के तहत भीड़ जामिया में घुस गई.



कानून हाथ में नहीं लेने की दी गई चेतावनी
यूनिवर्सिटी कैंपस को शेल की तरह इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी अंदर से पत्थर चलाने लगे. अंदर से ट्यूब लाइट और अन्य चीजें फेंकी गईं, जिससे पुलिस के कई जवान और आम लोग घायल हुए. इस बीच लगातार नारेबाजी होती रही. पुलिस ने भीड़ को लाउडस्पीकर की मदद से चेतवनी दी कि कानून हाथ में न लें, लेकिन भीड़ नहीं मानी. फिर पुलिस ने टीयर गैस का इस्तेमाल किया.

यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल हो गए बाहरी उपद्रवी
जामिया यूनिवर्सिटी परिसर से पुलिस पर तीन तरफ से पत्थरबाजी की जा रही थी. यानी बाहरी उपद्रवी यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल हो गए थे. हिंसा पर काबू करने के लिए पुलिस यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल हुई और 52 उपद्रवियों को हिरासत में लिया. जांच के दौरान 8 से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. सभी छात्र जिन्हें चोट पहुंची थी, पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई. इनमें से अधिकतर को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई.

किसी भी छात्र को गिरफ्तार नहीं किया गया
पुलिस ने यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर को बुलाया ताकि स्टूडेंट की पहचान हो पाए. जो स्टूडेंट थे, उन्हें प्रॉक्टर के हवाले किया गया. किसी भी छात्र को गिरफ्तार नहीं किया गया. परिस्थितियों के मद्देनजर पुलिस को यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल होना पड़ा, ताकि फंसे हुए बेगुनाह छात्रों को बचाया जा सके. पुलिस के लिए यह संभव नहीं था कि छात्रों और उपद्रवियों के बीच पहचान की जा सके. जामिया में हिंसा के संबंध में दो एफआईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने असामाजिक तत्वों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है. पहली एफआईआर एनएफसी थाने में और दूसरी एफआईआर जामिया नगर थाने में दर्ज की गई.

7 अप्रैल को होगी मामले की अगली सुनवाई
आपको बता दें कि जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस पर 15 दिसंबर को यूनिवर्सिटी में अवैध प्रवेश, लाठीचार्ज और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. जामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साकेत कोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. पिछली सुनवाई में जामिया प्रशासन की अर्जी पर सुनवाई करते हुए साकेत कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एक्शन टेकेन रिपोर्ट (एटीआर) दायर करने का निर्देश दिया था.

रिपोर्ट - अमित सिंह 

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