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Manohar Lal Khattar: दिल्‍ली पुलिस ने मनोहर लाल खट्टर को जांच में दी क्‍लीन चिट, कहा- संज्ञेय अपराध नहीं बनता

Manohar Lal Khattar: दिल्‍ली पुलिस ने मनोहर लाल खट्टर को जांच में दी क्‍लीन चिट, कहा- संज्ञेय अपराध नहीं बनता

दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने किसानों के खिलाफ भड़काऊ वीडियो के मामले में अदालत में स्थिति रिपोर्ट दायर करते हुए उन्‍हें क्‍लीन चिट दी. (फाइल फोटो)

दिल्‍ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने किसानों के खिलाफ भड़काऊ वीडियो के मामले में अदालत में स्थिति रिपोर्ट दायर करते हुए उन्‍हें क्‍लीन चिट दी. (फाइल फोटो)

Manohar Lal Khattar : राउज एवेन्‍यू कोर्ट के एसीएमएम सचिन गुप्‍ता के समक्ष दायर स्‍टेट्स रिपोर्ट में दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच ने कहा कि शिकायत की सामग्री और संलग्न वीडियो की जांच में पाया गया कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है. साथ ही जांच एजेंसी की तरफ से आगे कहा गया कि यह वीडियो चंडीगढ़ (Chandigarh) में रिकॉर्ड किया गया, जोकि दिल्‍ली के ज्‍यूरिडिक्‍शन में नहीं आता. लिहाजा, उचित जांच के आधार पर जांच पूरी करते हुए उसे बंद किया जाता है.

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नई दिल्‍ली: एक वीडियो में किसानों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के मामले में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) को दिल्‍ली पुलिस ने अपनी जांच में क्‍लीन चिट दे दी है. दिल्‍ली की एक अदालत में दायर स्‍टेट्स रिपोर्ट में पुलिस ने हरियाणा के सीएम को क्‍लीन चिट दी. जांच एजेंसी का कहना है कि मुख्‍यमंत्री के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है. अदालत ने शिकायतकर्ता की ओर से तर्क प्रस्तुत करने के लिए 21 दिसंबर की तारीख तय की है.

राउज एवेन्‍यू कोर्ट के एसीएमएम सचिन गुप्‍ता के समक्ष दायर स्‍टेट्स रिपोर्ट में दिल्‍ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच ने कहा कि शिकायत की सामग्री और संलग्न वीडियो की जांच में पाया गया कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है. साथ ही जांच एजेंसी की तरफ से आगे कहा गया कि यह वीडियो चंडीगढ़ (Chandigarh) में रिकॉर्ड किया गया, जोकि दिल्‍ली के ज्‍यूरिडिक्‍शन में नहीं आता. लिहाजा, उचित जांच के आधार पर जांच पूरी करते हुए उसे बंद किया जाता है.

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दरअसल, पिछले दिनों वायरल हुए एक वीडियो में हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर एक बैठक में बीजेपी (BJP) कार्यकर्ताओं से आंदोलनरत किसानों के खिलाफ लठ्ठ उठा लेने और ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाने सरीखी बातें कहते नज़र आए थे. सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील अमित साहनी (Social Activist and Lawyer Amit Sahni) ने राउज एवेन्‍यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में इस बाबत अर्जी दायर की थी. इसमें उन्‍होंने कहा, हरियाणा के मुख्यमंत्री का 03-10-2021 को चंडीगढ़ में अपने आवास पर भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसमें वह कहते नज़र आए, ‘कुछ नए किसानों के जो संगठन और उभर रहे हैं, उनको भी प्रोत्‍साहन देना पड़ेगा, उनको आगे चलाना पड़ेगा. और अगर हर जिले में खासकर उत्‍तर और पश्चिम हरियाणा के, दक्षिण हरियाणा में ये समस्‍या ज्‍यादा नहीं है, लेकिन उत्‍तर और पश्चिम हरियाणा के हर जिले में अपने किसानों के 500, 700, 1000 लोग आप लोग अपने खड़े करो, उनको वॉलंटियर बनाओ’. वह आगे कहते हैं, ‘और फ‍िर जगह-जगह ‘सठे साठयम समाचरेत’, (पूछते हैं क्‍या अर्थ होता है इसका), अंग्रेजी में बता दिया ना हिंदी में बताओ, यानि जैसे को तैसा. ठा लो डंडे, ठीक है’.

उन्‍होंने अर्जी में आगे कहा कि वीडियो में मुख्‍यमंत्री खट्टर आगे कहते दिखे कि ‘नहीं वो देख लेंगे और दूसरी बात ये है कि जब ठा लोगे डंडे तो जमानत की परवाह मत करो. छह महीने, दो महीने जेल में रह आओगे ना, तो इतनी पढाई इस मीटिंग में नहीं होगी, दो-चार महीने वहां रह आओगे तो अपने आप बड़े लीडर बन जाओगे. नहीं, नहीं दो चार महीने में अपने आप बड़े नेता बन जाओगे, चिंता मत करो. ये इतिहास में नाम लिखा जाता है. इसमें एक ही बात ध्‍यान रखनी है जोश के साथ अनुशासन को बनाकर रखना है. जो सूचना मिल गई, यहां तक करना है, इसके आगे नहीं करना, तो नहीं करना’.

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उन्‍होंने अर्जी में कहा कि उपरोक्त वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा राज्य के मुखिया अपनी पार्टी के सदस्यों को किसानों के खिलाफ खड़े होने के लिए उकसा रहे हैं और ऐसा बयान देकर उन्‍होंने आईपीसी की धारा 153/153A/505 के तहत अपराध किया है. साथ ही यह कि एमएल खट्टर ने कार्यकर्ताओं को बताए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर देते हुए, आपराधिक बल का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया. इससे पहले ही हरियाणा के एक आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा ने किसानों के “सिर फोड़ने” का एक विवादित बयान दिया था.

एडवोकेट अमित साहनी ने याचिका में कहा, ‘मुख्‍यमंत्री खट्टर के बयान का लहजा और तरीका स्वतः स्पष्ट है और उन्‍हें संवैधानिक पद पर होने के कारण दुश्मनी, नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इस वीडियो में इस तरह की अभद्र भाषा और मौजूदा मुख्यमंत्री जैसे सरकारी पदाधिकारी द्वारा अपनी पूरी क्षमता से उकसाने से आंदोलन तेज हो सकता था और दिल्ली और एनसीआर में कानून-व्यवस्था खराब होने की स्थिति पैदा हो सकती थी. मीडिया रिपोर्टों से यह भी पता चला कि वीडियो में उनकी भाषा के बाद विभिन्न सामाजिक हलकों में अशांति फैल गई थी’.

याचिका में आगे बताया गया कि उनकी तरफ से बीते 23 अक्‍टूबर को डीसीपी, ज्‍वॉइंट कमिश्‍नर एवं स्‍पेशल कमिश्‍नर (क्राइम ब्रांच) को इस बाबत शिकायत दी गई थी, लेकिन आरोपी व्यक्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. लिहाजा, किसी राजनेता द्वारा नफरत फैलाने की हालिया प्रवृत्ति हमारे लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति से सबसे सख्त तरीके से निपटा जाना चाहिए. इसलिए खट्टर एवं अन्‍य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित जांच के निर्देश जारी किए जाएं.

Tags: Delhi police, Manohar Lal Khattar

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