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दिल्ली पुलिस का बड़ा फैसला, ऑडिट के बाद रिटायर्ड अफसर-जज समेत नेताओं की सुरक्षा में की कटौती

दिल्ली पुलिस का बड़ा फैसला, ऑडिट के बाद रिटायर्ड अफसर-जज समेत नेताओं की सुरक्षा में की कटौती

दिल्‍ली पुलिस के 500 से ज्‍यादा जवान सुरक्षा में लगे हुए थे. (सांकेतिक फोटो)

दिल्‍ली पुलिस के 500 से ज्‍यादा जवान सुरक्षा में लगे हुए थे. (सांकेतिक फोटो)

Delhi Police News: दिल्‍ली पुलिस ने ऑडिट रिपोर्ट के बाद पूर्व आयुक्तों, सेवानिवृत्त अधिकारियों, न्यायाधीशों (Judges) और राजनीतिज्ञों की सुरक्षा में कमी कर दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, बिना किसी आकलन के 535 पुलिसकर्मियों सुरक्षा में लगाया हुआ था. दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) ने हाल ही में सुरक्षा इकाइयों में तैनात कर्मियों का आकलन करने को कहा था.

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  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने अपनी सुरक्षा इकाइयों के ऑडिट के बाद पूर्व आयुक्तों, सेवानिवृत्त अधिकारियों, न्यायाधीशों (Judges) और राजनीतिज्ञों की सुरक्षा कम कर दी है. इसके बाद अब इन सुरक्षाकर्मियों को कानून-व्यवस्था या पुलिस ड्यूटी में तैनात कर दिया है. ऑडिट रिपोर्ट (Audit Report) में सामने आया है कि बगैर सुरक्षा खतरे के आकलन के 535 कर्मियों को उन पूर्व आयुक्तों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और न्यायाधीशों के साथ-साथ राजनेताओं के साथ जोड़े रखा गया. फिलहाल रिपोर्ट के बाद इनकी सुरक्षा कम की गई है या फिर पुलिसकर्मियों को वहां से हटा लिया गया है.

    इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री सुरक्षा दस्ते सहित सुरक्षा इकाइयों के रैंक में कर्मियों की कमी के बावजूद उन्हें डायवर्ट किया जाता रहा. वहीं, दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना (Rakesh Asthana) ने हाल ही में सुरक्षा इकाइयों में तैनात कर्मियों का आकलन करने को कहा था. धनबाद के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को सुरक्षा प्रदान करने का यह फैसला लिया गया.

    ऑडिट रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा
    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऑडिट में पाया गया कि सुरक्षा इकाइयों में 6,828 की स्वीकृत संख्या के मुकाबले 5,465 कर्मी थे. अधिकारी ने कहा, ‘उन्हें यह भी बताया गया कि कई पुलिस कर्मी पूर्व पुलिस आयुक्तों, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के साथ जुड़े हुए हैं.’ उन्होंने कहा कि कई पूर्व आयुक्तों के साथ उनके मल्टी-टास्किंग स्टाफ के अलावा 15 पुलिसकर्मी तैनात पाए गए हैं.

    ऑडिट में यह भी पाया गया कि कई सुरक्षाकर्मी पहले संबंधित अधिकारियों या न्यायाधीशों से जुड़े हुए थे, जब वे सेवा में थे, लेकिन सेवानिवृत्ति या स्थानांतरण के बाद भी उन्हें सुरक्षा में जोड़े रखा गया. अधिकारी ने कहा कि भले ही कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों का सुरक्षा कवर जारी रहा, लेकिन उनकी सुरक्षा का आकलन दो-तीन साल से नहीं किया गया था. गृह मंत्रालय के नियमों के अनुसार, सुरक्षा प्रदान करने वाली एजेंसी को हर छह महीने में खतरे की अवधारणा का आकलन करना होता है.
    सूत्रों ने कहा कि पुलिस सचिवालय ने सुरक्षा विंग को निर्देश दिया है कि वे अब उन लोगों को सुरक्षा मुहैया कराएं जिनके लिए गृह मंत्रालय या अदालतों ने सुरक्षा का आदेश दिया है. अधिकारी ने कहा कि सुरक्षा अब केवल खतरे की धारणा के आधार पर प्रदान की जा रही है. कई निजी सुरक्षा अधिकारियों को वापस बुला लिया गया है और पुलिस की ड्यूटी पर तैनात किया गया है.

    बता दें कि जिन लोगों की सुरक्षा घटाई गई है उनमें स्पेशल सेल के अधिकारी भी शामिल हैं.सूत्रों ने कहा कि कई पुलिस आयुक्तों ने कवर वापस लेने पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों को फोन किया, लेकिन उनकी आपत्तियों को ठुकरा दिया गया.

    Tags: DELHI HIGH COURT, Delhi police, Delhi Police Commissioner, Delhi Police Special Cell, Judges, Rakesh asthana

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